Tuesday, November 20, 2012

कन्याकुमारी का लेडी ऑफ रैनसम चर्च


देश का आखिरी छोर तमिलनाडु का शहर कन्याकुमारी। जहां तीन समंदर भारत भूमि को चूमते हैं। वहां कन्याकुमारी का कुमारी अम्मान मंदिर और विवेकानंद रॉक मेमोरियल तो है हीं। एक और धार्मिक स्थली है यहां। जी हां, कन्याकुमारी में समंदर के किनारे एक और आकर्षण है लेडी ऑफ रैनसम चर्च। इस सुंदर चर्च का निर्माण 1914 में हुआ था।



समंदर के किनारे पीले रंग का ये चर्च दूर से ही दिखाई देता है। इस चर्च का गुंबद 153 फीट ऊंचा है। चर्च के मुख्य भवन की लंबाई 153 फीट और चौड़ाई 53 फीट है। यदि आप कन्याकुमारी में हैं तो लेडी ऑफ़ रैनसम चर्च ज़रूर जाएं। ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि महान संत सेंट थामस भी यहां पर आए थे। वहीं 1542 में कन्याकुमारी की धरती पर सेंट फ्रांसिस जेवियर भी आए। 

इस चर्च को ऑवर लेडी ऑफ रैनसम के नाम से भी जाना जाता है। तो यहां के लोगों द्वारा प्यार से ईसा की मां का चर्च कहा जाता है। जब आप समुन्दर के किनारे खड़े होकर तीन विशाल ऑफ वाइट गोथिक टावर को देखेंगे तो आपको अपने आप ही पुर्तगाली सभ्यता का अनुभव होगा। इस चर्च की इमारत बहुत ही ऐतिहासिक और पुरानी है। सौ साल से ज्यादा पुरानी यह इमारत मदर मैरी को समर्पित है।


इस चर्च में सबसे पहले जो चीज़ आपका ध्यान आकर्षित करेगी वो है बीच में खड़ा ऊंचा टावर जिसके क्राउन में लगे क्रॉस की सोने के चमक आपका दिल लुभाने को मजबूर कर देगी।

इस चर्च की सुन्दरता सच में आने वाले लोगों को मंत्र मुग्ध कर देती है। समंदर के किनारे खड़ी चर्च की इमारत सागर की लहरों के साथ मिलकर सुंदर नजारा पेश करती है। यहां आकर घंटों बैठकर अद्भुत शांति मिलती है। चर्च का प्रार्थना हॉल काफी बड़ा है। चर्च के अंदर मदर मेरी और इसा मसीह के जीवन से जुड़ी कहानियों को दर्शाती कुछ तस्वीरें भी लगी हैं।


-         -------  विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

आगे भी पढ़ते रहिेए हमारी तमिलनाडु की यात्राएं.... (OUR LADY RANSOM CHURCH, KANYAKUMARI, TAMILNADU, 
SOUTH INDIA IN SEVENTEEN DAYS - 25

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