Tuesday, July 2, 2013

अहमदाबाद से गांधीनगर - हाईवे पर वैष्णो माता का मंदिर

गुजरात का सबसे बड़ा शहर अहमदाबाद है पर राज्य की राजधानी गांधी नगर है। ये अहमदाबाद से 40 किलोमीटर दूर है लेकिन अब कालोनियां बनती जा रही हैं और दोनों शहरों के बीच दूरियां खत्म होती जा रही हैं। आटो वाले बाबर हमें सड़क के दाहिनी तरफ स्थित वैष्णो माता के मंदिर परिसर में ले जाकर रोक देते हैं। 

गांधी नगर के मार्ग पर रास्ते में वैष्णो माता का गुफा मंदिर भी आता है इसका शिल्प भी शानदार है। यह सरखेज हाईवे पर खोडियार में स्थित है। हमारे देश में किसी प्रसिद्ध मंदिर की कॉपी बनाने का चलन खूब है। तो यहां गुजरात के लोगों ने जम्मू के पास कटरा वाली वैष्णो माता का गुफा मंदिर बना डाला है। स्थानीय लोगों के बीच यह मंदिर काफी लोकप्रिय है। मई की दोपहर में तेज गर्मी है पर मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी हुई है। तो हमलोग भी माता के दर्शन के लिए गुफा में प्रविष्ट हो जाते हैं। ये काफी हद तक कटरा के वैष्णो देवी गुफा जैसी ही है। मंदिर में छुट्टी के दिन और नवरात्रि में खूब भीड़ होती है। 


आसाराम बापू का आश्रम अहमदाबाद में साबरमती नदी पार करने के बाद बापू के गांधी आश्रम के बाद एक और आश्रम आता है आसाराम बापू का। ये साबरमती में है लेकिन ये अहमदाबाद के प्रसिद्ध मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम के बगल में है। देश विदेश में लोकप्रिय संत आसाराम बापू का ये प्रधान आश्रम है। आश्रम में सादगी दिखाई देती है। 

यहां आने वाले श्रद्धालु 20 रुपये का टोकन लेकर भोजन कर सकते हैं। आश्रम में रियायती दरों पर रहने का भी इंतजाम है। पहली बार आश्रम आने वालों के लिए आश्रम दिखाने का भी इंतजाम है। आश्रम में बापू के जीवन से जुड़े स्मृति स्थल हैं। पर इस आश्रम में आकर हमें कुछ अच्छी अनुभूति नहीं हुई। मोटेरा में ही प्रसिद्ध क्रिकेट स्टेडियम भी है जहां कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच भी होते हैं। 


वैष्णो मता मंदिर परिसर में आईसक्रीम... बहुत गर्मी है भाई....


1966 में बसा गांधीनगर - अब थोड़ी बातें गांधीनगर के बारे में। सन 1966 में इसे गुजरात की राजधानी बनाने की शुरुआत की गई। इस नए शहर का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया। सन 1970 के आसपास सभी प्रमुख दफ्तर यहां शिफ्ट हो चुके थे।

 गुजरात की राजधानी गांधीनगर एक योजनाबद्ध शहर है। काफी हद तक चंडीगढ़ शहर की तरह। पूरे शहर में चौड़ी चौड़ी सड़कें हैं और चारों तरफ हरियाली भी है। यहां भी चंडीगढ़ की तरह जाम नहीं नजर आता है। 


इस शहर के वास्तुकार थे एच के मेवाड़ा। शहर 205 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। शहर का 54 फीसदी इलाका वृक्षों से आच्छादित है। गुजरात के ज्यादातर मंत्रियों के बंगले गांधीनगर में हैं। गांधीनगर शहर की आबादी तीन लाख के करीब है। शहर में बहुत सारे पार्क होने के कारण इसे हरित शहर भी कहा जाता है। 


गांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर के अलावा पंचदेव मंदिर, अंबे माता मंदिर जैसे हिंदू मंदिर भी हैं। यहां सब कुछ नया नया है। हर साल शहर में जगन्नाथ रथ यात्रा बड़े ही धूमधाम से निकाली जाती है। अब गांधीनगर और अहमदाबाद के बीच दूरी खत्म होती जा रही है। बीच में खाली जगह में बड़े बड़े अपार्टमेंट बनते हुए नजर आ रहे हैं। कुछ बड़े स्कूल भी रास्ते में दिखाई दे रहे हैं।



गांधीनगर से अहमदाबाद लौटते हुए हमें भूख और प्यास लग गई है हालांकि थोड़ी सी पेट पूजा अक्षर धाम मंदिर में कर रखी थी। पर मई की दोपहर में प्यास खूब लगती है। तो प्यास से बचाव के लिए गन्ने के जूस से भला अच्छा क्या हो सकता है। तो हमलोग सड़क के किनारे एक जूस वाले के पास रुक गए और गन्ने का जूस पीकर थोड़ी तरावट महसूस की। तो अब चलें आगे। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( GUJRAT, TEMPLE, GANDHINAGR HIGHWAY)