Wednesday, August 7, 2013

ओंकारेश्वर से उज्जैन वाया पाताल पानी, महू, इंदौर


ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन, मां नर्मदा में आस्था की डूबकी और प्रकृति के सुंदर नजारों को आत्मसात करने के बाद हम अब आगे चल पड़े हैं उज्जैन की ओर। वैसे ओंकारेश्वर से इंदौर की दूरी 80 किलोमीटर है और उज्जैन 140 किलोमीटर। ओंकारेश्वर से दोनों जगह के लिए बसें भी मिल जाती हैं।
पर हम एक बार फिर ओंकारेश्वर रोड से उज्जैन के लिए   मीटर गेज के पैसेंजर   ट्रेन के शयनयान श्रेणी में आरक्षण करा चुके थे। ओंकारेश्वर से हमलोग आटो रिक्शा बुक करके रेलवे स्टेशन पहुंच गए। 


ओंकारेश्वर रोड से दोपहर ढाई बजे आने वाली   अकोला-उज्जैन पैसेंजर   थोड़ी देर से यानी    चार बजे पहुंची। इसमें पैसेंजर में भी स्लीपर क्लास के तीन कोच लगाए जाते हैं। बहुत कम लोग ही दिन में इस रेल में आरक्षण कराते हैं। पर हमने करा लिया था इसलिए कि  जनरल डिब्बे की भीड़ का सामना नहीं करना पड़े। ट्रेन के टीटीई साहब जैसे हमारा इंतजार ही कर रहे थे। मिलते ही बड़े सम्मान से बोले, अच्छा तो आप लोग आ गए। वह  इसलिए कि हमारी तरह  शायद ही कोई दिन में आरक्षण कराकर सफर करता है।


यहां से जाएं महेश्वर -   ट्रेन ओंकारेश्वर रोड से चल पड़ी है। इसके बाद अगला स्टेशन आया है बड़वाह। इस स्टेशन से  पहले हमारी ट्रेन नर्मदा नदी पर बने पुल को पार करती है।   बड़वाह से एक और पर्यटक स्थल महेश्वर जाया जा सकता है। ( यहां से 40 किलोमीटर है महेश्वर की दूरी। ) महेश्वर में रानी अहिल्याबाई के बनवाए मंदिर और सुंदर नर्मदा तट हैं। तो कभी अगली यात्रा महेश्वर की होगी।


देश में बहुत कम जगह अब मीटर गेज की ट्रेने चलती हैं। उज्जैन से अकोला मार्ग भी गेज भी आमान परिवर्तन की प्रक्रिया में है। कुछ महीने बाद ही मेगा ब्लॉक होने वाला है। हमारे टीटी बाबू बता रहे हैं कि जल्द ही  इस सफर पर विराम लगने वाला है। पर यह रेल मार्ग इस इलाके के लोगों की जीवन रेखा की तरह है। कुछ साल तक लोगों के लिए ये सुविधा बंद रहेगी। इस रेलमार्ग का रास्ता पहाड़ी और बड़ा ही मनोरम है।

पाताल पानी से गुजरते हुए - मुखतियाड़ा, बलवारा, चोरल जैसे रेलवे स्टेशनों के गुजरने के बाद आया स्टेशन कालाकुंड। ट्रेन पहाड़ की घाटियों और सुरंगों से होकर गुजर रही है। कालाकुंड के बाद आता है पाताल पानी। यहां बहुत ही गहराई वाला झरना है। इसलिए इसका नाम दिया गया है पाताल पानी। इंदौर के लोग यहां पिकनिक मनाने पहुंचते हैं।



खतरनाक भी है पाताल पानी - ट्रेन के टीटीई साहब जो टिकट चेक करने के बाद हमारे पास आकर बैठ गए हैं। हमसे बातें करने लगे हैं। उन्होंने  बताया कि बारिश के दिनों में झरने के पानी छींटे ट्रेन के डिब्बे में भी आ जाते हैं। पर पाताल पानी बहुत खतरनाक भी है। कई बार यहां नौजवानों की लापरवाही से जान जा चुकी है। मुझे याद आता है ईटीवी मध्य प्रदेश चैनल में रहते हुए मैं पातालपानी हादसे की कई खबरें चला चुका हूं। 


डॉक्टर आंबेडकर और महू छावनी -  पाताल पानी के बाद  हम आ पहुंचे हैं महू छावनी। यहां पर हमारी ट्रेन 15 मिनट रुकी। महू बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जन्मस्थली है। डॉक्टर आंबेडकर के पिता यहां छावनी में सेना में पदस्थापित थे। यहीं पर  इस  महान विभूति का जन्म हुआ था।  अब इस शहर का नाम बदलकर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर नगर कर दिया गया है। 
महू के बाद हमारी छुक-छुक ट्रेन ने हमें पहुंचाया इंदौर। इस बीच में हरणया बेरी, राउ, राजेंद्र नगर, लोकमान्य नगर जैसे छोटे स्टेशन आए। वैसे अब इंदौर शहर का विस्तार महू तक हो गया है।  इंदौर में हमने प्लेटफार्म की दुकान से इंदौर के पोहा का स्वाद लिया। शाम को भी पोहा। हां मालवा इलाके के स्टेशनों पर दिन भर पोहा मिलता रहता है। यहां पोहा में चीनी की चासनी मिलाते हैं, जिससे वह थोड़ा मीठा मीठा लगता है। साथ ही उसकी नरमी भी देर तक बरकरार रहती है।

हमारी ट्रेन उज्जैन डेढ़ घंटे देर से पहुंची है। हम अपने मेजबान बाबू सिंह कुशवाह के घर घास मंडी (फ्रीगंज) शेयरिंग आटो रिक्शा से सकुशल पहुंच गए। उनसे पहले से बात हो रखी थी इसलिए परिवार के लोग हमारा इंतजार कर रहे थे। हमारी लंबी यात्रा का यह आखिरी पड़ाव था जहां हम किसी होटल में न ठहरकर किसी मित्र के घर में ठहरे थे। मैं उज्जैन दूसरी बार पहुंचा हूं तो माधवी और अनादि पहली बार।

(  मीटर गेज रेल मार्ग - ओंकारेश्वर रोड, बड़वाह,  मुख्तयार बलवाड़ा , चोरल , कालाकुंड, पातालपानी, महू ,  हरसया खेरी, राउ, राजेंद्रनगर, लोकमान्य नगर, इंदौर,  फतेहाबाद चंद्रावती गंज जंक्शन,  लेकोदा, चिंतामण गणेश, उज्जैन ) 

-    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com   
 ( METER GAUGE, RAIL, ONKARESHWAR ROAD, PATAL PANI, MAHU, INDORE, UJJAIN ) 

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