Saturday, July 19, 2014

कुछ ऐसी है हमारी सदभावना रेल ((3))


( पहियों पर जिंदगी-4)
सदभावना रेल के लिए आसमानी रंग चुना गया है। ये संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर निर्धारित शांति का रंग है। रेल भी देश भर में शांति का संदेश देने जाएगी। इस विशेष रेल गाड़ी में कुल 14 डिब्बे हैं। हर डिब्बे पर सदभावना रेल यात्रा हिंदी अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लिखा गया है। आपको पता है संयुक्त राष्ट्र के झंडे का रंग भी नीला है। 


 नदियों के नाम पर हैं कोच के नाम - हर डिब्बे पर तिरंगा झंडा और दोस्ती हाथ चित्रित किया गया है। विशेष ट्रेन के सभी डिब्बों के नाम देश की प्रमुख नदियों के नाम पर दिए गए हैं जो देश की विविधता और राष्ट्रीय एकता के परिचायक हैं। सबसे आगे के डिब्बा दामोदर है जो ब्रेक वैन है। उसके बाद एक स्टोर कोच है जिसमें रेलयात्रियों की साइकिलें रहती हैं। इसके बाद भाखड़ा ( जेनरेटर कार) है। इसके आगे क्रम में गोदावरी, सरयू, झेलम, कावेरी स्लीपर कोच हैं। ये आवासीय डिब्बे हैं। कावेरी में चलता है सदभावना रेल यात्रा का दफ्तर। इसमें एस एन सुब्बराव समेत दफ्तर से जुड़े हुए लोग रहते हैं। इसके बाद है अन्नपूर्णा जो पेंट्रीकार है। अन्नपूर्णा में ही ट्रेन का उदघोषणा केंद्र है।हर डिब्बे में स्पीकर लगे हुए हैं। चलती हुई ट्रेन में भी उदघोषणा की जा सकती है। युवा गीत बजाए जा सकते हैं। उसके आगे क्रम से नर्मदा, सिंधु, गंगा और यमुना  शयनयान कोच हैं। अंत में एक स्टोर कोच और ब्रह्मपुत्र नामक ब्रेकवैन है।

रेलगाड़ी के कोच पर गांधी, विवेकानंद जैसे महापुरूषों की महत्वपूर्ण उक्तियां भी लिखी गई हैं। हर डिब्बे पर दुनिया के प्रमुख दस धर्मों के प्रतीक चिन्ह भी बनाए गए हैं।
रेलवे ने रेलगाड़ी के कोच उपलब्ध करा दिए। पर उसे डिजाइन करने का काम राष्ट्रीय युवा योजना के कार्यकर्ताओं ने किया। ट्रेन को सुंदरता से डेकोरेट करने में बेंगलुरू के आर्ट्स कॉलेज के छात्रों ने काफी मेहनत की है। उन्होंने दिन रात एक करके निजामुद्दीन यार्ड में ट्रेन के हर कोच पर गांधी, विवेकानंद जैसे महापुरुषों के चित्र बनाए हैं। हर कोच पर सदभावना के नारे लिखे हैं। 
कावेरी में चलता है दफ्तर -  ट्रेन के बीचों बीच स्थित कावेरी दफ्तर का कोच है जिसमें निदेशक सुब्बराव जी, सचिव, रणसिंह परमार, जन संपर्क अधिकारी लिसी भरुचा, रामकृष्ण ( एकाउंट्स) मधुसूदन दास, विद्युत प्रकाश मौर्य, देवेंद्र गौड़, दीपक लामा जैसे लोग रहते हैं जिनके जिम्मे दफ्तर चलाने की अलग अलग जिम्मेवारियां हैं। मैं रजिस्ट्रेशन का काम देखने के अलावा जन संपर्क के कार्य में सहयोग करता हूं।
पेंट्री कार अन्नपूर्णा के प्रभारी बनाए गए हैं द्वारकानाथ (मैसूर) और बनमाली (ओडिशा)। मेजर ईश्वर जायस भी पेंट्री कार में ही रहते हैं। उनके जिम्मे खरीद फरोख्त का काम है। इसके ठीक बाद वाला नर्मदा कोच महिलाओं का है जिसकी प्रभारी नागपुर की रेखा मुड़के हैं।

नीले रंग की साइकिलें - सभी सदभावना यात्रियों को नीले रंग की साइकिलें दी गई हैं। ट्रेन में कुल 212 साइकिलें हैं जो आगे और पीछे के स्टोर में रहती हैं। ये साइकिलें एवन कंपनी की हैं। इन्हे दिल्ली के पास साहिबाबाद के एवन साइकिल प्लांट से खरीदा गया है। एक सदभावना यात्रियों का दल सााहिबाबाद स्थित प्लांट गया और इन साइकिलों को लेकर आया। सभी यात्रियों को नीले रंग की कैप, नीले रंग के ही फोटो के साथ लेमिनेट करके परिचय पत्र दिए जाते हैं। रेलयात्रा में एक यात्री को न्यूनतम 20 दिन का समय देना आवश्यक है। स्वयंसेवकों के लिए इसी हिसाब से योगदान करने के (ज्वाएनिंग) और छोड़कर जाने के (रिलीविंग) स्टेशन बनाए गए हैं।      

-   विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com  ( SADBHAWNA COACH, CYCLE ) 

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