Sunday, July 7, 2013

अहमदाबाद से वडोदरा की ओर वाया आनंद

अहमदाबाद से चलने वाली गुजरात क्वीन एक्सप्रेस। आनंद, बड़ौदा, सूरत होते हुए मुंबई की ओर गुजरात के आखिरी स्टेशन वलसाड तक जाती है। गुजरातियों की लोकप्रिय ट्रेन। इसमें हमने चेयरकार में बड़ौदा तक सफर किया। गुजरात क्वीन पूरी तरह सिटिंग ट्रेन है। इसमें नार्मल और एसी चेयरकार के कोच लगते हैं।यह अहमदाबाद से मुंबई मार्ग के सभी प्रमुख स्टेशनों को जोड़ती है। इसमें आरक्षण भी कुछ दिन पहले भी मिल जाता है। 

ट्रेन समय से चल पड़ी है। अहमदाबाद के बाद अमूल का शहर आनंद रेलवे स्टेशन आया। आनंद मतलब अमूल का शहर।अमूल से न जाने कितनी बातें याद आ जाती हैं। शायद आपको पता हो अमूल यानी AMUL शब्द बना है आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड के संक्षीप्तिकरण से। गुजरात में श्वेत क्रांति की शुरूआत इसी आनंद शहर से हुई थी। आज अमूल देश भर में लोकप्रिय ब्रांड बन चुका है।

हमें रेलवे स्टेशन पर अमूल का एक स्टाल दिखाई दिया। एक बुजुर्ग सज्जन तो दौड़ कर गए और अमूल के स्टाल से आईसक्रीम लेकर आ भी गए। हम इतना साहस नहीं जुटा सके। ट्रेन कई स्टेशनों पर रुकती है लेकिन कब हमारा वडोदरा स्टेशन आ गया बातों बातों में पता भी नहीं चला। बीच में रेलगाड़ी में कुछ आयुर्वेदिक चूरन बेचने वाले भी नजर आए। लगभग दो घंटे के सफर में हमलोग बडौदा पहुंच गए। गुजरात का एक ऐतिहासिक शहर।बड़ौदा को वडोदरा भी कहते हैं। गायकवाड राजघराने की राजधानी।

बडौदा जंक्शन गुजरात का बड़ा रेलवे स्टेशन है। दिल्ली से आने वाली ट्रेने और अहमदाबाद से आने वाली ट्रेनें बड़ौदा जंक्शन में एक पटरी पर आ जाती हैं। हमारी अगली ट्रेन में बड़ौदा मुंबई एक्सप्रेस दो घंटे बाद है। इसलिए हमें डिनर बड़ौदा में ही करना है। 

वडोदरा जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर भी दो रेस्टोरेंट हैं। लेकिन हमारे पास समय था इसलिए हम स्टेशन के बाहर पाठक कांप्लेक्स में गायत्री भवन में खाने के लिए पहुंच गए। गायत्री भवन के बगल में न्यू गायत्री भवन, इंद्रा भवन, न्यू इंद्रा भवन समेत कई अच्छे भोजनालय हैं। यहां 65 या 70 रुपये की थाली है। इस थाली में तवा चपाती, चावल, दाल, तीन सब्जियां, पापड़ सब कुछ। तेज सर्विस और खाने का स्वाद बिल्कुल घर जैसा। खाना सबको खूब पसंद आया। ( 2015 में दुबारा बड़ौदा पहुंचा तो गायत्री भवन के थाली की दरें बढ़कर 90 रुपये हो गई थीं।) 


भले ही बड़ौदा हम दो घंटे के लिए रुके लेकिन बड़ौदा शहर का खाना याद रहेगा। दिल्ली की तरह स्टेशन के बाहर होटलों की तरह कोई ठगी का माहौल नहीं। होटल वालों का व्यवहार भी अच्छा था। हमें नास्ते में गुजरात का थेपला काफी पसंद आया था। इसलिए हमने यहां से आगे के नास्ते के लिए थेपला फिर खरीदा। इससे पहले थेपला द्वारका से लेकर चले थे। 


-   -विद्युत प्रकाश मौर्य
(( VADODRA, BRC, RAIL, GUJRAT )