Thursday, July 18, 2013

चप्पे चप्पे में फैली है खूबसूरती - पंचगनी


महाबलेश्वर से अब चलने की वेला है। यहां से 17 किलोमीटर पहले सतारा मार्ग पर है पंचगनी। ये जगह अपनी सदाबहार जलवायु के लिए प्रसिद्ध है। अंग्रेजों का पंसदीदा शहर रहा। वे यहां स्वास्थ्य लाभ के लिए लंबा वक्त गुजारते थे। तो पंचगनी मतलब है पांच गांव। पहाड़ों के पांच गांव को मिलाकर इस हिल स्टेशन का को ये नाम मिला। पंचगनी समुद्र तल से 1300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। महाबलेश्वर से थोड़ी कम ऊंचाई पर जरूर है पर मौसम सालों भर मनोरम रहता है।




महाबलेश्वर में हमारे होटल प्रीति संगम के मालिक आनंद भांगड़िया ने होटल छोड़ते समय यह सलाह दी थी कि आप पंचगनी और वाई का गणेश मंदिर घूमते हुए वापस जाएं। हमलोग महाबलेश्वर से महाराष्ट्र रोडवेज बस से पंचगनी पहुंचे। पंचगनी के बस स्टैंड में बस ने हमें उतार दिया। महाराष्ट्र में बस स्टैंड को बस स्थानक कहते हैं। तो पंचगनी का बस स्थानक काफी साफ सुथरा और सुंदर है। अनादि और माधवी को बस स्टैंड के प्रतीक्षालय में बिठाकर मैं किसी टैक्सी की तलाश में निकल पड़ा। बस स्टैंड के बाहर मुझे आम बिकते दिखाई दिए। ताजे और रसीले स्थानीय आम।



मैंने एक दो टैक्सीवालों से बात की। हमारा प्रस्ताव था कि पंचगनी के सारे प्वाइंट घूमाने के बाद हमें वाई बस स्थानक तक छोड़ देना है। तो यहां हमने मोलभाव करके एक टैक्सी बुक की। हमें टैक्सी ड्राइवर चंद्रकांत ( मोबाइल 98606-16488 ) मिले। थोड़े मोल भाव पर वे तैयार हो गए हमें घूमाने के लिए। उन्होंने हमे अपने अंदाज में बड़ी शालीनता से पंचगनी शहर के बारे में बताना शुरू किया। उनका कुछ घंटे का साथ बहुत अच्छा रहा। उन्होंने हमें पंचगनी और वाई के बारे में काफी अच्छी जानकारियां दीं। 

पंचगनी का बस स्टैंड 


पंचगनी के ये अनूठे स्कूल - हमें चंद्रकांत ने पंचगनी के स्कूलों के बारे में बताना शुरू किया। मनभावन मौसम के कारण अंग्रेजों ने पंचगनी में कई स्कूल बनवाए। यहां आजकल कुल 38 आवासीय विद्यालय हैं। इनमें आठ स्कूल ब्रिटिश काल के हैं। इन स्कूलों में सालाना फीस ढाई लाख से आरंभ होती है। कई स्कूल काफी महंगे भी हैं। पंचगनी के पुराने स्कूलों में एक है सेंट जोसेफ कान्वेंट। इसकी स्थापना 1895 में पुणे के बिशप के सानिध्य में हुई थी।यह लड़कियों का स्कूल है। अब देखिए यहां से पढ़ कर कौन कौन निकला -  रीता फारिया (1966 की मिस वर्ल्ड), जीनत अमान, काजोल देवगन, किम शर्मा और प्राची देसाई। 

यहां का दूसरा प्रमुख लोकप्रिय स्कूल है सेंट पीटर्स स्कूल। पंचगनी में स्थित यह बॉयज बोर्डिंग स्कूल है। इसकी स्थापना 1902 में हुई थी। यह भारत के शीर्ष दस बोर्डिंग स्कूलों में शुमार किया जाता है। स्कूल परिसर लगभग 58 एकड़ क्षेत्र में फैला है।

गर्मी की छुट्टी में बच्चे घर नहीं जाते - 
ज्यादातर मुंबई के सेठों के बच्चे यहां पढ़ने आते हैं। ज्यादातर बोर्डिंग स्कूलों में बच्चे छुट्टी में घर आते हैं पर पंचगनी में उल्टा होता है। यहां छुट्टियों में अभिभावक ही बच्चों से मिलने आते हैं। इन स्कूलों में से कई में अभिभावकों के रहने के लिए गेस्ट हाउस भी बनाए गए हैं। यानी आप अपने बच्चों से मिलने भी आएं और साथ में पहाड़ों की सैर भी जाए। 
  
तो चलें पारसी प्वाइंट की ओर - पंचगनी में हम सबसे पहले देखने पहुंचे पारसी प्वाइंट। मुंबई के कुछ पारसी समुदाय के लोगों के नाम पर इसका नाम पारसी प्वाइंट पड़ा है। यहां से कृष्णा नदी का सुंदर नजारा दिखाई देता है। वही कृष्णा जो विजयवाड़ा में जाकर विशाल रूप में दिखाई देती है यहां पर पहाड़ों से घाटी में उसकी धारा देखना सुखकर है। इस प्वाइंट निर्माण मुंबई के पारसी समाज के अमीरों ने कराया। पारसी समाज के लोग यहां छुट्टियां बीताने आते हैं।

सेहत के लिए अच्छी आबोहवा -  मुंबई के जाने माने टीबी स्पेशलिस्ट डॉक्टर रुस्तमजी बिलिमोरिया ने 1940 में पंचगनी में एक सेनेटोरियम की स्थापना की। यह खास तौर पर टीबी के मरीजों को अच्छी आबोहवा प्रदान कर ठीक करने के लिए था।  

--- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com   
( (PANCHGANI, SATARA, MAHARASTRA, PARSI POINT, SCHOOLS
पंचगनी के पारसी प्वाइंट पर, पीछे दिखाई दे रही है कृष्णा नदी। 

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