Thursday, May 30, 2013

पोरबंदर से कृष्ण की नगरी द्वारका की ओर

कीर्ति मंदिर के पास पोरबंदर का बाजार। 
बापू के शहर पोरबंदर से कान्हा के शहर द्वारका की दूरी 100 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से होकर द्वारका जाने का रास्ता समंदर के साथ साथ चलता है। पोरबंद से सोमनाथ की दूरी भी 110 किलोमीटर ही है। ये रास्ता भी समंदर के साथ साथ ही चलता है। वास्तव में पोरबंदर द्वारका और सोमनाथ के बीच में स्थित है।

पोरबंदर के बाद हमारा अगला पड़ाव था द्वारका। हमने जीएसआरटीसी की सुबह की बस में आनलाइन टिकट बुक करा रखा था। हमारी बस सुबह 10.30 बजे है। यह कहीं पीछे से आने वाली है। हमलोग होटल से चेकआउट के बाद पोरबंदर के बस स्टैंड में पहुंचकर बस का इंतजार कर रहे हैं। बस स्टैंड में सफाई बिल्कुल नहीं है। दोनों प्रवेश द्वार पर गंदगी का आलम है।


बस में पहुंचने पर कंडक्टर के पास पहले से ही हमारी पीएनआर की सूची मौजूद थी। गुजरात में बस बुकिंग का हमारा अनुभव काफी अच्छा रहा है। पोरबंदर से द्वारका के रास्ते में जगह जगह पवन ऊर्जा के प्रोजेक्ट दिखाई देते हैं। हवा का रुख सही रहने पर पवन ऊर्जा की पंखियां चलती रहती हैं। विंड वर्ल्ड नामक कंपनी ने ये पवन ऊर्जा वाली पंखियां लगाई हैं। पोरबंदर से पहले लालपुर जाम में इसका बड़ा प्रोजेक्ट है।

मूल द्वारका और हरसिद्ध महादेव का मंदिर - पोरबंदर से द्वारका के रास्ते में 27 किलोमीटर आगे मूल द्वारका का मंदिर आता है। इसके आगे हरसिद्ध महादेव का मंदिर है। अगर आप सारे मंदिरों को देखते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपको निजी टैक्सी करनी चाहिए फिर निजी बस सेवा से रास्ते के ठहराव के बारे में पूछकर यात्रा करनी चाहिए।




दोपहर का लंच ब्रेक -  दोपहर में रास्ते में हमारी बस एक मनोरम स्थल पर लंच के लिए भी रुकी। अब जगह का नाम नहीं याद आ रहा। हमने यहां लंच तो नहीं किया क्योंकि पोरबंदर में जमकर नास्ता कर लिया है। पर गुजराती ढाबे में खाट पर बैठकर खूब आराम फरमाया। अनादि को भी यहां बहुत मजा आया। भरी दुपहरिया में नारियल के छोटे छोटे पेड़ों की छांव में यूं लग रहा था बस यहीं रुक जाएं। पर बस चल पड़ी। मार्ग पर एक गांव पड़ा लांबा।


बस आगे बढ़ती जा रही है। मई में धूप तेज है तो गरमी लग रही है। रास्ते में कहीं कहीं सड़कों की हालत खराब भी दिखी। यानी गुजरात के विकास का दावा खोखला।

लगभग दो घंटे के बस के सफर के बाद हमें द्वारकाधीश के नगर के दर्शन हो गए। हाईवे पर शहर से कुछ किलोमीटर पहले से ही होटल और मंदिर दिखाई देने लगते हैं।

 बस स्टैंड में उतरने के बाद हम अपने पहले से बुक किए होटल उत्तम पहुंच गए। यहां पहुंचने के लिए हमें आटो रिक्शा करना पड़ा। पर ये होटल जवाहर रोड पर द्वारकाधीश के मंदिर के ही पास था। हमने इसे  क्लियर ट्रिप से बुक किया था। ( http://www.hoteluttam.com/) तीन बत्ती चौक के पास दोपहर का भोजन लेने के बाद हमने आज के ही दिन द्वारका घूमने का फैसला किया।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 (PORBANDAR TO DWARKA BY BUS, HOTEL UTTAM ) 



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