Wednesday, July 31, 2013

नासिक रोड से ओंकारेश्वर वाया खंडवा- किशोर कुमार की याद


त्रयंबकेश्वर से चलने के बाद हमें क्रूजर के चालक महोदय ने नासिक शहर में नासिक रोड रेलवे स्टेशन के पास शाम को छोड़ दिया। महाराष्ट्र के शहर नासिक के बाद हमारा अगला पड़ाव था मध्य प्रदेश का ओंकारेश्वर। ओंकारेश्वर जाने के लिए हमें नासिक रोड से खंडवा जाएंगे। पर हमारी ट्रेन रात को 1.50 बजे है। शाम से आधी रात के बाद तक का वक्त काटने के लिए हमने नासिक रोड रेलवे स्टेशन के सामने होटल में कमरा ले लिया। रात को रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में खाना खाने के बाद आकर कमरे में सोने की कोशिश करने लगे। नासिक रोड स्टेशन के सामने एक मार्केट में दूसरी मंजिल पर होटल। कमरा मिला 350 रुपये में डबल बेड। हालांकि यहां मच्छर बहुत थे इसलिए नींद नहीं आई। वैसे में मध्य रात्रि में ट्रेन थी तो सोना संभव नहीं था। 
नासिक रोड रेलवे स्टेशन के बाहर रात का नजारा। 

रात को एक बजे होटल छोड़कर प्लेटफार्म पर आ गए। रेलवे स्टेशन का नाम नासिक रोड है। आम तौर पर जिस रेलवे स्टेशन के नाम से आगे रोड लगा होता है वह मुख्य शहर से दूर होता है। पर नासिक के साथ ऐसा नहीं है। नासिक रोड स्टेशन नासिक शहर के अंदर आ गया है। हो सकता है कभी शहर के बाहर रहा हो पर अब शहर के अंदर है। खैर हमारी ट्रेन समय पर आई। यह ट्रेन हमारे शहर पटना जाती है, हालांकि हम इस ट्रेन में फिलहाल छोटी यात्रा कर रहे हैं। नासिक रोड के बाद निफाड, लासलगांव, मनमाड जंक्शन, नंदगांव, चालीसगांव, जलगांव, भुसावल के बाद ट्रेन मध्य प्रदेश में प्रवेश कर गई। भुसावल में सुबह हो गई है। बुरहानपुर, नेपानगर के बाद आता है खंडवा। 

किशोर कुमार के शहर खंडवा में - हम सुबह आठ बजे खंडवा जंक्शन पहुंच गए थे। खंडवा गायक अभिनेता किशोर कुमार की जन्मस्थली है। वही जिंदगी एक सफर है सुहाना वाले....किशोर दा। मुझे सन 1986 का दूरदर्शन पर आया उनका आखिरी लाइव शो याद आता है। वे मंच पर ईडीली उडली उ...करते हुए आए और अपना परिचय किशोर कुमार खंडवा वाले कह कर दिया। उसके एक साल बाद 13 अक्तूबर 1987 को किशोर दा नहीं रहे। पर खंडवा के लोग भी किशोर कुमार को खूब याद करते हैं।
किशोर कुमार गांगुली ( 04 अगस्त 1929, खंडवा, मध्य प्रदेश ) 

उनके जन्मदिन पर खंडवा शहर में उनको संगीतमय श्रद्धांजलि दी जाती है। तब दिन भर संगीत की महफिल चलती है। लोग किशोर दा के गीत गाकर उन्हें याद करते हैं। जब मैं ईटीवी में मध्य प्रदेश चैनल में कार्यरत था तो खंडवा में किशोर दादा की जयंती जो चार अगस्त को आती है तब लोगों को दिन भर उनके तरानों को गाते हुए सुना था। पर हमें खंडवा में ज्यादा वक्त गुजारने का मौका नहीं मिल सका। किशोर कुमार अपने आखिरी दिन में खंडवा आकर रहना चाहते थे पर ऐसा नहीं हो सका। तो किशोर कुमार की इस धरती को नमन।  
अनादि  खंडवा से ओंकारेश्वर मीटर गेज पैसेंजर ट्रेन की उपरी बर्थ पर. कभी ऐसे भी सफर करना पड़ता है
मीटर गेज के पैसेंजर ट्रेन का सफर -  खंडवा जिले में ही शहर से 55 किलोमीटर की दूरी पर है ओंकारेश्वर। खंडवा से ओंकारेश्वर के बीच छोटी लाइन यानी मीटर गेज की रेल सेवा है। अकोला-इंदौर-उज्जैन रेल मार्ग। हालांकि अब इस मीटर गेज को ब्रॉड गेज में बदलने की तैयारी चल रही है। खंडवा में ट्रेन से उतरते ही हमें ओंकारेश्वर वाले पैसेंजर ट्रेन के आने की जानकारी मिली जो एक घंटे लेट होने के कारण हमें मिल गई। हमलोग फटाफट टिकट खरीदकर ट्रेन में सवार हो लिए। पर पैसेंजर ट्रेन में बैठने के लिए आसानी से जगह नहीं मिल सकी। अनादि और माधवी के लिए शायद यह मीटर गेज का पहला रेल का सफर है। 




अनादि और मैं पैसेंजर ट्रेन के ऊपर वाले बर्थ पर पहुंच गए। पहाड़ी रास्ते से में कई छोटे-छोटे स्टेशन कोटलाखेड़ी, निमाडखेडी, सनावद से गुजरते हुए ट्रेन डेढ़ घंटे बाद ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन आ पहुंची है। यहां से ओंकारेश्वर 12 किलोमीटर है। बसें जाती हैं और आटोरिक्शा भी। हमने एक आटो बुक किया। ओंकारेश्वर रोड से ओंकारेश्वर जाने के लिए आटो  रिक्शा और बस वालों की मनमानी जलती है। बिना किसी टाइम टेबल के घंटों इंतजार के बाद वे चलते हैं। यहां पर इसी चक्कर में हमारे कई घंटे बरबाद हो गए। मध्य प्रदेश में सरकारी रोडवेज बसों की सेवा नहीं है। तो कई जगह निजी बस वालों की मनमानी चलती है। 



ओंकारेश्वर में रहने के लिए सबसे अच्छी जगह गजानन आश्रम - 
गजानन आश्रम में - ओंकारेश्वर पहुंचने पर हमेें रहने के लिए जगह की तलाश करनी थी। पहले से कुछ ब्लॉगर साथियों ( मुकेश भालसे ) ने यहां के गजनान संस्थान के बारे में लिख रखा था। इसलिए हम सीधे गजानन संस्थान ही पहुंचे। कई एकड़ में फैला गुलाबी रंग का अति सुंदर हरित परिसर। हम स्वागत कक्ष पर पहुंचे। थोड़ी औपचरिकता के बाद भक्त निवास -2 में कमरा नंबर छह मिला हमें। तीन बेड वाला विशाल कमरा आधार तल पर।


जीरो प्वाइंट से गजानन आश्रम । 
दो तरफ खिड़की के बाहर हरियाली। विशाल कूलर की ठंडी हवा के साथ। टायलेट अटैच, अलमारी वैगेरह सुविधाओं के साथ कमरे का किराया महज 325 रुपये। कूलर का 50 रुपये अतिरिक्त है। पूरे देश में प्रकृति के गोद में इतना सुंदर और सस्ता आवास शायद ही कहीं उपलब्ध हो।

यहां कुल चार भक्त निवास में कई सौ लोगों के रहने की व्यवस्था है। समूह में आने वालों के लिए बड़े-बड़े हॉल भी हैं। परिसर में नीम और पीपल के पेड़ की ठंडी हवा इतनी अच्छी लगती है की कहीं जाने का जी ही नहीं करता। हरी-हरी घास इतनी नरम की अनादि इस पर ही लेटे रहना चाहते थे। परिसर में गजानन महाराज का सुंदर सा मंदिर भी है जिसमें नियमित पूजा होती है। 

गजानन आश्रम में हमारा कमरा। 
आश्रम में भोजनालय भी - गजनान आश्रम में एक शानदार भोजनालय भी है जहां 30 रुपये में भोजन की थाली उपलब्ध है। भोजनालय में स्वच्छता का खास ख्याल रखा जाता है। नास्ते में 6 रुपये में पोहा तो 9 रुपये में उपमा मिल जाता है। आश्रम में मिनरल वाटर की ठंडी बोतल में महज 11 रुपये में मिल जाती है, जो बाहर 20 रुपये की मिलती है। यहां तक की आश्रम के रिसेप्शन पर बीमारों के लिए दवाएं भी मुफ्त में मिल जाती हैं। आसपास के गरीब लोग भी यहां पर दवाएं लेने के लिए आते दिखाई दिए। 

-    ------   विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( (GAJANAN ASHRAM, OMKARESHWAR, KHANDWA, MP, METER GAUGE ) 

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