Thursday, July 4, 2013

लकड़ी के कोल्हू से गन्ने का रस - गांधीनगर हाईवे पर

गांधीनगर से अहमदाबाद की ओर लौटते हुए हाईवे पर सड़क के किनारे जगह जगह गन्ने का रस निकालने वाले दिखे। दोपहर की गरमी थी तो हमलोग एक जगह रुक गए गन्ने का जूस पीकर थोड़ी तरावट लाने के लिए। मई की गर्मी में गन्ने का रस पीने से अच्छी बात क्या हो सकती है। मैं देख रहा हूं कि गन्ने का रस निकालने वाली मशीन पूरी तरह लकड़ी की है। यूं कहें की लकड़ी के कोल्हू से गन्ने का रस निकाला जा रहा है।
परंपरागत मशीनें के निहाई लोहे की होती है। इस आमतौर पर डीजल इंजन से चलाया जाता है। पर लकड़ी के इस कोल्हू को एक या दो लोग हाथों से घूमा कर गन्ने का रस निकालते हैं। हमारे आर्डर देते ही पति बैल बनकर कोल्हू चलाने लगा और पत्नी कोल्हू में गन्ने डालने लगी। हमने बचपन में अपने गांव में कलुहाड़ी चलती देखी है। पर उसे हमें बैलों से चलाते थे। पर यहां बैलों की जगह इंसान खुद जूत गया है गन्ने का रस निकालने के लिए। निश्चय ही इसमें श्रम ज्यादा है। पर लकड़ी के कोल्हू से निकले गन्ने के रस का स्वाद भी कुछ अलग है।


गन्ने का रस निकालने वाले दंपति महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के अकोला जिले से आए हैं। वहां उनकी खेतीबाड़ी है। पर उनके गांव में बारिश नहीं होने के कारण सूखा पड़ गया है। उनके गांव में अब पानी नहीं है। लिहाजा वे गुजरात की राजधानी में पहुंच गए हैं और यहां गांधीनगर हाईवे पर गन्ने का कोल्हू चला रहे हैं। पति पत्नी मिलकर गन्ने का रस निकाल रहे हैं। यहां कोई मशीन नहीं है। प्रदूषण रहित कोल्हू है इनका। इस लकड़ी के कोल्हू में पहिया लगा हुआ है। इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। 

इन मराठी भाई से थोड़ी और बात होती है। दिन भर में कोई ज्यादा कमाई नहीं हो पाती है। बस रोटी पानी के जुगाड़ भर कमा लेते हैं। छोटे बच्चें भी हैं। उन्हें भी काम पर लगा रखा है। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता है। पर रोटी का इंतजाम उससे पहले जरूरी है। जिंदगी मुसीबत पैदा करती रहती है, लेकिन रोटी के लिए संघर्ष जारी है। उनकी मेहनत और हौसले को सलाम। 



जय विजय की पंजाबी थाली का स्वाद - अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के पास रेस्टोरेंट्स में आपको हर तरह का स्वाद मिल जाएगा। यहां आप गुजराती थाली, दक्षिण भारतीय थाली, पंजाबी थाली जो ढूंढे सब मिल जाएगा। देश भर से व्यापारी और सैलानियों की आवाजाही के कारण यहां हर तरह के रेस्टोरेंट्स हैं। और सबका स्वाद उम्दा है। 

हमने जय विजय रेस्टोरेंट में रात्रि भोजन करना तय किया। 85 रुपये की पंजाबी थाली। पनीर की सब्जी, दाल, चपाती, चावल, छाछ सब कुछ। यहां गुजराती की अनलिमिटेड थाली भी उपलब्ध है। अगर आप मसाला डोसा ढूंढ रहे हैं तो वह भी यहीं मिल जाएगा।
होटल के स्टाफ और वेटर का व्यवहार बहुत की अच्छा है। जय विजय के ही बगल में सनराइज नामक एक और रेस्टोरेंट है। यहां भी खाने वालों की भीड़ उमड़ती है। यहां आपको सीट पाने के लिए आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ सकता है।

कपासिया रोड पर मोतीमहल में आप मांसाहारी खाने का मजा ले सकते हैं। इन होटलों में खाने वाले सिर्फ बाहरी लोग नहीं बल्कि ये शहर के लोगों की भी पसंद हैं। वैसे अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के आसपास साल 2013 में पेट भरने के लिए कम से कम 40 रुपये की थाली भी उपलब्ध है।

मोती बेकरी का स्वाद -  रेलवे स्टेशन के पास ही कपासिया रोड मोती बेकरी है। इस लोकप्रिय बेकरी कई आइटम लोगों में काफी लोकप्रिय हैं। अहमदाबाद की सुबह वैसे तो ढोकला,  थेपला जैसे नास्ते के साथ होती है, लेकिन यहां आप पंजाबी स्वाद या दक्षिण भारतीय स्वाद, मैंगो शेक, फ्रूट चाट जो भी ढूंढे मिल जाएगी।

-    विद्युत प्रकाश मौर्य -  vidyutp@gmail.com 
(    (AHMADABAD, FOOD, JAI VIJAYA, SUNRISE, GUJRATI AND PUNJAB FOOD ) 

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