Tuesday, July 30, 2013

ओंकारेश्वर– प्रणव रूप में हैं यहां हैं शिव (04)

मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित शिव का ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथे स्थान पर आता है। यहां सुरम्य वादियों के बीच नर्मदा नदी के तटपर स्थित है शिव का मंदिर ओंकारेश्रर। ओंकारेश्वर में नर्मदा और कुबेर नदियों के बीच एक विशाल टापू बन गया है। इसी टापू पर बना है ओंकारेश्वर मंदिर। यह टापू 4 किलोमीटर लंबा और 2 किलोमीटर चौड़ा है। इस टापू का मान्धाता पर्वत या शिवपुरी भी कहते हैं। यह पर्वत ओम के आकार का है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर कहा गया है। यहां नदी के किनारे पक्के घाट बने हुए हैं।
शिवपुराण में ओंकारेश्वर के दर्शन और उसका महात्मय वर्णित है। ओंकारेश्वर का मंदिर सफेद रंग का है। मंदिर पांच मंजिला है। मंदिर में मौजूद शिवलिंग गढ़ा नहीं गया है, बल्कि ये प्राकृतिक है। यहां प्रणव लिंग के दर्शन और अभिषेक का बड़ा महत्व है। मंदिर में शिवलिंग के पास ही माता पार्वती की भी प्रतिमा है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन। 
ओंकारेश्वर का मुख्य मंदिर ऊंचे शिखर से युक्त उत्तर भारतीय वास्तुकला में बना हुआ है। मंदिर के निर्माण के विषय में कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती है। इसे किसने बनवाया और कब यह अज्ञात ही है। मंदिर का गर्भ गृह मूलतः पुरानी निर्माण शैली में बने एक छोटे मंदिर के सामान लगता है इसका गुम्बद पत्थर की परतों को जमा कर बनाया गया है।
कहा जाता है कि पुराण काल में इच्छवाकु वंश के राजा युवनाक्ष के प्रतापी पुत्र मान्धाता ने इस स्थान पर घोर तपस्या कर शिव को प्रसन्न किया था। सिक्खों के प्रथम गुरू गुरूनानक देव जी ने भी ओंकार पर्वत की परिक्रमा की थी। उनकी स्मृति में शिवपुरी में गुरूद्वारा है। जगतगुरु शंकराचार्यजी ने अपने गुरु भगवतपादाचार्य जी से यहीं शिक्षा ली थी।
नर्मदा के किनारे ओंकारेश्वर मंदिर। 

ओंकार पर्वत की परिक्रमा -
ओंकार पर्वत का परिक्रमा मार्ग लगभग 8 किलोमीटर का है। पैदल परिक्रमा में लगभग 4 घंटे लगते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या में लोग हैं जो परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा मार्ग पर लगभग 108 मंदिर हैं। कई लोग नदी में नाव आरक्षित करके भी परिक्रमा करते हैं। आपके पास भी समय हो तो परिक्रमा अवश्य करें। प्रकृति से साहचर्य का आनंद आएगा। ओंकारेश्वर मंदिर केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

ममलेश्वर महादेव का मंदिर  -ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के इस पार ममलेश्वर महादेव का मंदिर है। दोनों मंदिरों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग के तौर पर की गई है। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालु दोनों ही मंदिरों के दर्शन करते हैं। ओंकारेश्वर में शिव प्रणव रूप में विराजते हैं तो दूसरे मंदिर में पार्थिव शिव लिंग है जो अमरेश्वर के रूप में है। ममलेश्वर मंदिर गजानन आश्रम के बगल में स्थित है। इसके भवन की वास्तुकला भी काफी सुंदर है।
ओंकारेश्वर स्थित ममलेश्वर महादेव का मंदिर। 

ममलेश्वर महादेव का यह मंदिर पांच  मंजिला है। इसके हर मंजिल पर एक शिवालय है। इस मंदिर प्रांगण में छह मंदिर और भी बने हुए हैं। पत्थर के बेहतरीन नक्काशियों वाला यह मंदिर अब पुरातत्व के अधीन है। मंदिर की दीवारों पर शिव महिमा स्तोत्र लिखा गया। इन शिलालेखों की तारीख 1063 ई बताई जाती है। इससे इस मंदिर की प्राचीनता का पता चलता है। 

कहां ठहरें - ओंकारेश्वर में महंगी शापिंग के लिए कुछ खास नहीं है, लेकिन यह कुछ दिन प्रकृति की गोद में ईश्वर में आस्था के साथ गुजारने के लिए बड़ी अच्छी जगह हो सकती है। ओंकारेश्वर में रहना घूमना मन को आनंदित करता है। यहां मध्य प्रदेश टूरिज्म के अच्छे होटल भी हैं। तो रहने के लिए काफी सस्ती धर्मशालाएं भीं हैं। पर यहां ठहरने के लिए सबसे बेहतरीन जगह गजानन आश्रम है। 

कैसे पहुंचे - ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन से ओंकारेश्वर मंदिर 13 किलोमीटर है। उज्जैन,खंडवा या इंदौर से सीधे बस से भी ओंकारेश्वर पहुंचा जा सकता है। ओंकारेश्वर मंदिर जाने के लिए नर्मदा नदी पर एक झूले का पुल बना है तो दूसरा स्थायी पुल। कई श्रद्धालु नर्मदा में स्नान के बाद नाव में बैठकर मंदिर जाते हैं।
 --- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com

 (OMKARESHWAR, MAMLESHWAR, JYOTIRLINGAM, TEMPLE, SHIVA)