Saturday, June 8, 2013

पानी का महत्व बताता है रुकमणि मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर से दो किलोमीटर आगे कृष्ण की मुख्य रानी यानी पटरानी रुकमणि देवी का मंदिर है। ये मंदिर समंदर के किनारे है।
कृष्ण की 16 हजार रानियां थीं लेकिन इनमें रुकमणि उनकी पटरानी थीं। द्वारका के रुकमणि देवी का मंदिर 12वीं सदी का बना हुआ है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर संरक्षित स्मारकों की सूची में है। हालांकि स्थानीय लोग मंदिर को ढाई हजार साल पुराना बताते हैं। मंदिर की दीवारों पर मानव आकृतियां और हाथियों को बड़ी खूबसूरती से उकेरा गया है।   

मंदिर में रुकमणि और कृष्ण की संगमरमर की बनी सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रुकमणि को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। द्वारकाधीश कृष्ण को रणछोड़ भी कहते हैं क्योंकि वे 17 बार जरासंध से युद्ध करने के बाद मथुरा छोड़कर द्वारका में आ बसे।

कथा है कि एक बार कृष्ण और रुकमणि ने दुर्बासा ऋषि को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया। दोनों ऋषि को लेकर अपने घर जा रहे थे। तभी रास्ते में रुकमणि को प्यास लगी। कृष्ण और रुकमणि ने खुद पानी पीया पर दुर्बासा ऋषि को पानी पिलाना भूल गए। आप जानते हैं कि ऋषि दुर्बासा के बारे में कहा जाता है कि वे काफी गुस्सैल स्वभाव के हैं।

 नाराज ऋषि ने भोजन करने से मना कर दिया और दोनों को शाप दे डाला। कहा जाता है कि ऋषि के शाप के कारण द्वारका नगरी का पानी भी पीने योग्य नहीं है। शाप के कारण रुकमणि को लंबे समय तक जंगल में प्रवास करना पड़ा अपने पति कृष्ण से अलग रहते हुए।

यहां किया जाता है पानी दान 
समंदर के किनारे बना रुकमणि का मंदिर वास्तुकला का सुंदर नमूना दिखता है। इस मंदिर में पानी दान करने की महत्ता है। श्रद्धालु यहां अपनी इच्छानुसार पानी का दान करते हैं। दान में मिले पानी को शहर के गोशालाओं में और जरुरतमंदों तक पहुंचाया जाता है। मंदिर के पास पानी दान की दरें लिखी हुई हैं। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसान पानी दान करते हैं। अगर आप पानी दान नहीं करना चाहते तो भी आपके लिए पीने का पानी यहां मौजूद रहता है। रुकमणि मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में साधु बैठे रहते हैं। श्रद्धालु उन्हें भी दान करते हैं।
दरअसल गुजरात के द्वारका क्षेत्र में पानी की भारी कमी है। समंदर का पानी खारा होता है। इसलिए पीने के पानी को यहां बड़े जतन से रखना पड़ता है। यह मंदिर पीने के पानी के महत्व को बताता है। 

खुलने का समय - मंदिर सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है। द्वारका शहर से मंदिर की दूरी 2 किलोमीटर है। आपको पैदल साइकिल रिक्शा, तांगा या अारक्षित वाहन से यहां पहुंचना होगा। 

-    ------  माधवी रंजना   
(RUKIMANI TEMPLE , DWARKA, GUJRAT, WATER )