Tuesday, May 21, 2013

पोरबंदर : बा के घर में वर्षा जल संचय का अनूठा इंतजाम

पोरबंदर में बा के घर के बाहर । 
पोरबंदर में बापू का घर देख लिया तो अब चलिए बा यानी बापू की पत्नी कस्तूरबा गांधी का घर देखने चलें। जब आप पोरबंदर में बापू का घर देखने जाते हैं तो बापू की पत्नी कस्तूरबा गांधी का घर देखना नहीं भूलें। बा का घर कीर्ति मंदिर के ठीक पीछे है। कीर्ति मंदिर देख लेने के बाद इसके पिछवाड़े से ही बा के घर जाने का रास्ता है। रास्ते में घर जाने के लिए मार्ग प्रदर्शक भी लगा हुआ है। कीर्ति मंदिर से लोग वहां जाने का रास्ता भी बता देते हैं।


तो हम पहुंच गए हैं बा के घर के बाहर। बा का घर तीन मंजिला है। पक्का घर है। इस घर को देखकर लगता है कि बा के परिवार वाले अपने समय में काफी संपन्न रहे होंगे। बा के घर में तीन रसोई घर बने हुए हैं। यह एक संयुक्त परिवार का घर लगता है। कमरे में गुसलखाना बना है और खाने के लिए डायनिंग हॉल भी बने हुए हैं। बा का पूरा घर अभी भी अच्छी हालत में है। इसे पूरी तरह घूम कर देखा जा सकता है। सबसे ऊपर की मंजिल पर भी जा सकते हैं। घर को देखकर लगता है कि उनका संयुक्त परिवार था। घर में मेहमानों के लिए भी कमरे बने हुए हैं।




बा का जन्म अप्रैल 1869 को हुआ था। हालांकि सही सही तारीख नहीं मिलती। उनका शादी के पहले नाम कस्तूरबा कपाडिया था। वे पोरबंदर के अमीर व्यापारी गोकुलदास माखरजी की बेटी थीं। 14 साल की उम्र में उनकी बापू से शादी हुई। शादी के समय वह बापू से छह माह बड़ी थीं। जीवन भर हर सुख दुख में बापू का साये की तरह साथ निभाती रहीं बा। बा का जीवन उन्हें बापू के समांतर महान बनाता है। कई बार वे चर्चा में काफी उच्च बुद्धिमता का परिचय देती हैं। वे अत्यंत ममतामयी भी थीं। पर 22 फरवरी 1944 को वे पुणे में बापू का साथ छोड़ गईं। 

बा के घर में वर्षा जल संचय का अनूठा इंतजाम  

कस्तूरबा गांधी का घर 
दो सौ साल पुराने इस कस्तूरबा गांधी के घर में हमें वर्षा जल संचय का अद्भुत इंतजाम दिखाई दिया। छत से बारिश का पानी नीचे आने के लिए कई छोटे-छोटे छेद बनाए गए हैं। इससे छत का पानी पाइप के सहारे आधार तल पर आ जाता है। 

आधार तल पर जमीन के नीचे पानी की टंकी बनाई गई है जिसमें बारिश का पानी जमा हो जाता है। इस पानी का इस्तेमाल बारिश के बाद दिनों में अलग अलग तरह के कार्यों के लिए किया जाता है। बताया जाता है पोरबंदर के तमाम संपन्न लोगों ने अपने घरों में बारिश के पानी के संचय के लिए इंतजाम कर रखे थे। बारिश के पानी के संचय का यह इंतजाम प्रेरक है। दो सौ साल पहले भी पानी बचाने को लेकर लोगों में जिस तरह की चेतना थी यह आज भी सीखने योग्य है। आज सार्वजनिक भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की बात की जा रही है, पर ऐसा इंतजाम तो घर घर में होना चाहिए।


सात साल में सगाई और 13 साल में हुई शादी
बा और बापू की शादी कब हुई ये सही सही पता नहीं चलता। किसी भी पुस्तक में उनकी शादी की तारीख नहीं मिलती। इतना लिखा हुआ मिलता है कि मई 1883 में मोहनदास और कस्तूरबा का विवाह धूमधाम से हुआ। पर तारीख नहीं पता चलता। वैसे उन दोनों का विवाह होना 7 साल की उम्र में ही तय हो गया था। तय होने पर सगाई कर दी गई। पर शादी आगे जाकर 1883 में हुई। तब बापू साढ़े 13 साल के थे और बा 14 साल की।

जन्म और शादी की तारीखें स्पष्ट नहीं  वनमाला पारिख अपनी पुस्तक में बा का जन्म अप्रैल 1869 लिखती हैं। जन्म तारीख स्पष्ट नहीं है। ठीक इसी तरह बा और बापू की शादी की तारीख भी स्पष्ट नहीं है। बा के पिता का नाम गोकुल दास मकन जी था। मां का नाम ब्रज कुअंर। उनका परिवार पूरी तरह से वैष्णव था। यानी शुद्ध शाकाहारी। बा के तीन भाई और दो बहनें थीं। पर लंबे समय तक जीवित बा और उनके भाई माधवदास ही रहे। बाकी बहनों का कम उम्र में निधन हो गया। बा का बापू के साथ साथ पुणे तक रहा। पुणे का आगा खां पैलेस में नजरबंदी के दौरान बा ने आखिरी सांस ली। वहीं पर उनकी समाधि बनी हुई है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com 
( KASTURBA GANDHI, KAPADIA, BA HOUSE, PORBANDAR ) 

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