Sunday, June 30, 2013

साबरमती तीरे- अहमदाबाद - महमूद बेगड़ा ने बनवाए थे 12 दरवाजे


दीव से बस का सफर करके शाम को हमलोग वेरावल रेलवे स्टेशन पहुंच गए। दीव से वेरावल वाली बस में हमने ऑनलाइन टिकट बुक किया था। पर इसका प्रिंट आउट हमारे पास नहीं था। हमने कंडक्टर को लैपटॉप में टिकट दिखा दिया। पर उसने कहा, नियम के मुताबिक प्रिंट जरूरी है। तो रास्ते में एक जगह बस रुकी तो कंडक्टर साहब मुझे एक साइबर कैफे में ले गए। वहां पेन ड्राईव से दो रुपये देकर टिकट का प्रिंट निकलवाया। कहने लगे रास्ते में कहीं चेकिंग हो गई तो मैं और आप परेशानी में फंस सकते हैं। हमने उनकी नियमबद्धता को धन्यवाद किया।
वेरावल से सोमनाथ एक्सप्रेस शाम को 6.45 बजे यानी सही समय पर चल पड़ी है। यह सोमनाथ से बनकर चलती है। यह रोज चलने वाली ट्रेन है। सवा आठ बजे ट्रेन जूनागढ़ जंक्शन पहुंची। रात पौने नौ बजे जतलेसर जंक्शन गुजर गया। इसके बाद ट्रेन की पैंट्री कार का खाना खाकर हमलोग सो गए। रात में सोते हुए राजकोट गुजर गया। इस यात्रा में तीसरी बार हम राजकोट से गुजर रहे हैं। 

अहमदाबाद यानी गुजरात की राजधानी। भीड़ भाड़ वाला अति व्यस्त कारोबारी शहर। वेरावल से हमारी ट्रेन सोमनाथ एक्सप्रेस ( 19120) अहमदाबाद जंक्शन सुबह 4 बजे ही पहुंच गई। मुख्य रेलवे स्टेशन अहमदाबाद जंक्शन को यहां लोग कालूपुरा भी कहते हैं, जैसे लखनऊ के मुख्य स्टेशन को चारबाग कहा जाता है। वैसे अहमदाबाद शहर के अंदर साबरमती जंक्शन और मनिनगर जैसे रेलवे स्टेशन भी हैं। जहां आप उतर कर शहर में जा सकते हैं।
कांकरिया लेक - अहमदाबाद शहर की औद्योगिक प्रगति दिखाता चरखा। 

पूरी यात्रा में पहली बार यहां रेलवे के स्टाफ के खराब व्यवहार से पाला पड़ा। प्लेटफार्म नंबर एक पर टिकट जांच करने वाले टीटीई से हमारी बकझक हो गई। खैर थोड़ी देर इंतजार के बाद सुबह के छह बजे हमलोग स्टेशन से बाहर होटल के लिए निकले। हमारा होटल डिंपल इंटरनेशनल स्टेशन, पंचकुआं दरवाजा पर रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर ही था। हालांकि यहां जाने पर हमें होटल का कमरा पसंद नहीं आया। उन्होंने हमें तीसरी मंजिल का कमरा दिया जो खुली छत होने के कारण काफी गर्म हो जा रहा था। तो हमने गरमी से निजात के एसी रूम लेना तय किया। अब तक के ऑनलाइन बुकिंग में यह पहली बार हुआ है जब हमें कोई कमरा पसंद न आया हो। चेकइन के बाद हमलोग घूमने निकल गए।

और हमें बदलना पड़ा होटल - पर दिन भर घूमने के बाद हमने शाम को नए होटल में शिफ्ट किया। हालांकि हमने हर शहर में होटलों की आनलाइन एडवांस बुकिंग की थी। पर अहमदाबाद का होटल पसंद नहीं आने पर खुद घूमकर स्टेशन के पास होटल ढूंढा। स्टेशन के सामने कपासिया रोड पर होटल मनीला मात्र  936 रुपये में एसी डिलक्स कमरा मिल गया। कार्ड पेमेंट की सुविधा के साथ अच्छा होटल है। वैसे कालूपूरा रेलवे स्टेशन के सामने रीलीफ रोड पर सबसे ज्यादा हर बजट के होटल हैं।
अहमदाबाद शहर के 12 दरवाजे  - अहमदाबाद शहर के रेलवे स्टेशन का कोड एडीआई (ADI) है। इतिहास में यह शहर कर्णावती के नाम से भी जाना जाता था। पर शहर को अहमदाबाद नाम मिला मुस्लिम शासक सुल्तान अहमदशाह से। सन 1411 में अहमदशाह ने शहर को जीतने के बाद यहां अपनी राजधानी बनाई। उसके बाद यहां कई भवन बने जो इस्लामिक वास्तुकला का सुंदर नमूना हैं। यहां आप सिदी सैयद जाली, जुल्फे मीनार, सरखेज रोजा जैसी इस्लामिक इमारतें देखी जा सकती हैं। 1487 मे अहमदशाह के पोते महमूद बेगडा ने शहर की सुरक्षा के लिए 10 किलोमीटर की परिधि में दीवार बनवाई। 

तब शहर में कुल 12 दरवाजों का निर्माण भी कराया गया था। पर अब शहर इन दरवाजों से काफी बाहर तक फैल चुका है। 1864 में अहमदाबाद रेल लिंक पर आ गया। तब यहां से मुंबई के लिए रेलवे लाइन बिछाई गई। 1970 तक यह गुजरात की राजधानी भी हुआ करता था। आबादी की बात करें तो 50 लाख से ज्यादा लोगों वाला शहर देश के बड़े और व्यस्त व्यापारिक शहरों में शामिल है। मई की दोपहरी में शहर का तापमान 42 डिग्री को छू रहा है। 


आटो रिक्शा से अहमदाबाद गांधीनगर -  दिन भर हमने अहमदाबाद गांधी नगर घूमने के लिए आटो रिक्शा बुक किया। आटो वाले बाबर ( 9510515591) ने सुबह 10 बजे से शाम सात बजे तक हमें पूरे दिल से अहमदाबाद व गांधीनगर घूमाने के बाद वापस होटल लाकर छोड़ दिया। वह भी वाजिब दाम 550 रुपये में।
हमारा पहला पड़ाव था साबरमती आश्रमउसके बाद गांधीनगर हाईवे पर वैष्णो मंदिरमोटेरा में आसाराम बापू का आश्रमगांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर। वैष्णो मंदिर को जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर के तर्ज पर ही बनाया गया है। आगे हम अहमदाबाद के कुछ लोकप्रिय स्थलों की विस्तार से चर्चा करेंगे। 
-   विद्युत प्रकाश मौर्य  - Email - vidyutp@gmail.com
HOTEL MANILA - Nr. ICICI Bank, Kapasia Bazar, Opp. Railway Station, Ahmedabad, Gujarat 380002
  ( AHMEDABAD, HOTEL MANILA, AUTO, GANDHINAGAR ) 
अहमदाबाद में साबरमती नदी पर पुल. 


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