Tuesday, June 18, 2013

जय सोमनाथ - स्वयं चंद्रमा ने बनवाया था मंदिर ((01))


गुजरात के अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर यानी द्वादश ज्योतिर्लिंग में पहला शिवलिंगम। अदभुत मनोरम वातावरण। मानो सागर की लहरें दिन रात शिव का नमन कर रही हों। गुजरात के शहर सोमनाथ में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है सागर की लहरों के किनारे इसका निर्माण स्वयं चंद्रमा ने कराया था। सोमनाथ को सोमेश्वर भी कहते हैं यानी सोम (चंद्र) के नाथ ( ईश्वर)। इतिहास में सोमनाथ मंदिर कई बार बना और कई बार टूटा। आजकल जो भव्य सोमनाथ मंदिर है इसे देश आजाद होने के तुरंत बाद सरदार वल्लभभाई पटेल और अन्य नेताओं ने जन सहयोग से बनवाया।


देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को मंदिर में सोमनाथ की पुनः प्राण प्रतिष्ठा की। ये मंदिर सिर्फ आस्था केंद्र नहीं बल्कि हमारे राष्ट्र की अस्मिता का भी प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर देश के नए बने मंदिरों के बीच वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूनाभी है। मंदिर की इमारत सात मंजिला है। मंदिर का मुख्य गुंबद 155 फीट ऊंचा है।

मंदिर खुलने का समय - मंदिर सुबह छह बजे से रात्रि 9.30 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। सुबह सात बजे दोपहर 12 बारह बजे और शाम बजे मंदिर में आरती होती है। अगर आपका सोमवार के दिन ही सोमनाथ के दर्शन का संयोग बने तो कहना ही क्या। हमारे साथ कुछ ऐसा ही हुआ। हम जिस दिन पहुंचे संयोग से सोमवार था। 

सोमनाथ मंदिर की कथा - सोमनाथ की कथा का वर्णन स्कंद पुराण में आता है। कहा जाता है कि चंद्रमा की कुल 27 पत्नियां थीं। लेकिन वे 26 पत्नियों से ज्यादा यानी सर्वाधिक प्रेम अपनी रुपवती पत्नी रोहिणी पर बरसाते थे। नाराज बाकी पत्नियों ने पिता दक्ष प्रजापति से शिकायत की। चंद्रमा के नहीं मानने पर दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को क्षय होने का शाप दे दिया।
अब इस शाप से मुक्ति के लिए चंद्रमा ने मृत्युंजय भगवान शिव की लंबी आराधना की। तब शिव ने प्रसन्न होकर चंद्रमा से कहा कि शाप से पूरी तरह मुक्ति संभव नहीं है लेकिन शुक्ल पक्ष में तुम्हारी एक कला रोज बढ़ जाता करेगी। वहीं कृष्ण पक्ष में रोज एक काया का क्षय होता रहेगा। 


तो मंदिर के बारे में कहा जाता है सोमनाथ मंदिर के मूल निर्माता स्वयं चंद्रमा ही हैं। मंदिर के तट पर हिलोरें लेती सागर की लहरें मानो 24 घंटे शिव का जलाभिषेक कर रही होती हैं। मंदिर परिसर में बैठने पर हमेशा सागर की लहरों का दिव्य संगीत सुनाई देता रहता है। इस संगीत से दूर होने की इच्छा नहीं होती। 

हर रोज लाइट एंड साउंड शो – सोमनाथ मंदिर के परिसर में रोज शाम 7.45 बजे एक घंटे का लाइट एंड साउंड शो होता है। इस शो को देखना एक आनंददायक और ज्ञानवर्धक अनुभूति है। इस शो में सागर कथावाचक के रुप में सोमनाथ मंदिर के बार-बार बनने और विध्वंस होने की दास्तान बड़े ही रोचक अंदाज में सुनाता है।  अगर आप सोमनाथ पहुंचे हैं तो लाइट एंड साउंड शो जरूर देखें। लाइट एंड साउंड शो के लिए टिकट लेना पड़ता है।आप समय से पहले पहुंच कर टिकट लेकर अपना स्थान सुनिश्चित कर लें। 

कैसे पहुंचे - सोमनाथ का मंदिर गुजरात के सोमनाथ नामक शहर में समंदर के किनारे स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन सोमनाथ है। पर छह किलोमीटर पहले वेरावल नामक रेलवे स्टेशन है, जहां तक काफी ट्रेनें जाती हैं। धीरे धीरे सोमनाथ विकसित हो रहा है पर वेरावल बड़ा बाजार और रेलवे का जंक्शन है। सोमनाथ के लिए गुजरात के अहमदाबाद से सीधी ट्रेनें हैं। द्वारका से भी सोमनाथ के लिए सीधी ट्रेन है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 


द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥
एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।

कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वरा ॥




देश में कहां कहां हैं 12 ज्योतिर्लिंग 

देश के 12 ज्योतिर्लिंग में से दो गुजरात प्रदेश में पड़ते हैं, जबकि तीन पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में पड़ते हैं। 

1. सोमनाथ - सोमनाथ पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है।


2. श्री मल्लिकार्जुन स्वामी ( आंध्र प्रदेश)  - यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है।

3. महाकालेश्वर ( मध्य प्रदेश ) - यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली उज्जैन नगरी में स्थित है।

4. ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश )-  ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर स्थित है।

5. केदारनाथ (उत्तराखंड )- केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में स्थित है। बाबा केदारनाथ का मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।
सोमनाथ - सागर करता है महादेव का नमन। 

6. भीमाशंकर (महाराष्ट्र) - भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में मंचर के पास जंगलों में स्थित है।

7. काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश) - विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के काशी (वाराणसी) में गंगा तट पर स्थित है।

 8. त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र) - यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के  उदगम के पास महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है।

9. वैद्यनाथ (झारखंड) - श्री वैद्यनाथ शिवलिंग झारखण्ड प्रांत में देवघर शहर में स्थित है। निकटम बड़ा रेलवे स्टेशन जैसीडीह है।

10. नागेश्वर (गुजरात) - यह ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारका नगरी के बाहरी इलाके में स्थित है।

11. रामेश्वरम (तमिलनाडु)  - यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामनाथपुरम नामक स्थान में स्थित है। यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है।

12. घृष्णेश्वर मंदिर (महाराष्ट्र) - घृष्णेश्वर महादेव का मंदिर महाराष्ट्र औरंगाबाद शहर के पास एलोरा की गुफाओं के पास स्थित है।

श्रीसोमनाथ मंदिर, प्रभाष क्षेत्र में स्थित राम लक्ष्मण जानकी की मोहक मूर्ति। 


- श्रीरुद्राष्टकम -  

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं,  विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ 1॥

निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालं, गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ॥ 2॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा, लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा ॥ 3॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं
 मुण्डमालं, प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ 4॥

प्रचंड प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखंड अजं भानुकोटि प्रकाशम् ।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपति भावगम्यम् ॥ 5॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सज्जनानन्द दाता पुरारी ।
चिदानन्द संदोह मोहा पहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ 6॥

न यावत् उमानाथ पादारविन्दं, भजतीहं लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत् सुखं शान्ति सन्तापनाशं, प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ 7॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां, नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ 8॥

रुद्राष्टक मिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये ।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शंभु प्रसीदति ॥


-  प्रस्तुति - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
(SOMNATH, GUJRAT, SHIVA, FIRST JYOTIRLINGAM AMONG TWELVE, LILAWATI BHAWAN )

1 comment:

  1. बहुत गहरी जानकारी पोस्ट की आपने सर,
    https://www.facebook.com/buddhadarshan/

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