Tuesday, July 9, 2013

ये है मुंबई नगरिया की तू देख बबुआ....

मुंबई दर्शन का सफर शुरू हुआ प्रिंस ऑफ वेल्स म्युजियम से। इस संग्रहालय में पुरातत्व, पेंटिंग और सिक्कों का बेहतरीन कलेक्शन है। अनादि की लंबे समय से गेटवे ऑफ इंडिया देखने की इच्छा पूरी हुई।


गेटवे ऑफ इंडिया  - गेटवे ऑफ इंडिया  दक्षिण मुंबई में ओपोलो बंदर इलाके में समुद्र के किनारे स्थित वह ऐतिहासिक इमारत है जिससे मुंबई की पहचान है। कुल 26 मीटर ऊंचे इस स्मारक का निर्माण 4 दिसंबर 1924 को पूरा हुआ। इसकी आधारशिला 31 मार्च 1913 को रखी गई थी। यह इण्डो-सरसेनिक रिवाईवल आर्किटेक्चर का सुंदर नमूना है।

गेटवे इसलिए कि यह अरब सागर से आने वाले जहाजों के लिए भारत का द्वार कहलाता है। इसमें कुल 4 मीनारें हैं और दीवारों पर आकर्षक पच्चीकारी का काम है। 1947 में जब भारत में ब्रिटिश राज खत्म हुआ तो ब्रिटेन का आखिरी जहाज यहीं से इंग्लैंड के लिए रवाना हुआ। यहां दिन भर किसी भी वक्त घंटो बैठना और समुद्र को निहारना भला लगता है। आप दूरबीन किराये पर लेकर आते जाते जहाजों को देख सकते हैं। सैकड़ो लोगों के लिए यह रोजाना का मेलजोल का लोकप्रिय स्थल है।


मुंबई - समंदर में बोटिंग का लुत्फ। 
गेटवे ऑफ इंडिया से होटल ताज की नई और पुरानी आइकोनिक इमारत भी दिखाई देती है। सुबह से शाम तक गेटवे ऑफ इंडिया पर हमेशा भीड़ लगी रहती है। बस वाले मंत्रालय, मुंबई हाईकोर्ट और मुंबई के फोर्ट इलाके की ऐतिहासिक इमारते दिखाते हैं। मैं 2008 में मुंबई पर आतंकी हमले के बाद मैं मुंबई पहली बार पहुंचा था।

मुंबई शहर का वास्तविक सौंदर्य, फोर्ट, कोलाबा, मरीन ड्राइव, वर्ली आदि इलाके में ही है। हालांकि मुंबई का विस्तार काफी हो चुका है लेकिन मुंबई का मतलब तो मालाबार हिल ही है। यहां पुरानी महंगी कोठियों की फेहरिस्त में अब मुकेश अंबानी की एंटेलिया भी शुमार हो गई है।


मरीन ड्राइव पर स्थित तारपोरवाला एक्वेरियम ( मछलीघर) बंद था। नवीकरण का काम चल रहा था। हमलोगों ने मरीन ड्राइव पर समंदर में स्पीड बोट पर सफर का एक बार फिर मजा लिया। कहीं से कंप्लिमेंटरी टिकट मिल गया था।  समंदर में बूंदा बांदी हो रही थी। कमला नेहरू हैंगिंग गार्डन का जूता घर मुंबई का पुराना आकर्षण है। अनादि को खूब मजा आया जूता घर में ऊपर तक जाकर। हालांकि इसमें 12 साल ऊपर के लोगों को अंदर जाने की मनाही है लेकिन लोग नहीं मानते। हाजी अली की दरगाह, महालक्ष्मी मंदिर के बाद हम पहुंचे वर्ली के नेहरू सेंटर। 

Mumbai- Discovery of India building.
डिस्कवरी ऑफ इंडिया बिल्डिंग- 
नेहरू सेंटर को डिस्कवरी ऑफ इंडिया भी कहते हैं।
यह मुंबई की आइकोनिक इमारतों में शुमार है। भवन दूर से ही देखने में काफी सुंदर लगता है। इसमें अक्सर प्रदर्शनियां लगी रहती हैं। इस 14 मंजिला इमारत का निर्माण 1972 में आरंभ हुआ। 6 एकड़ में बने इस परिसर की नींव तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने रखी थी। ये देश पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु की याद में निर्मित है। अब यह मुंबई का बड़ा हैप्निंग सेंटर है। सालों भर यहां कई तरह की गतिविधियां चलती रहती हैं। इस भवन में 1000 लोगों का आडिटोरियम, थियेटर, आर्ट गैलरी सब कुछ है। 

नेहरु सेंटर के सामने ही स्थित है मुंबई का ताराघर। इसमें आप समय समय पर अलग अलग शो देखकर अपना अंतरिक्ष ज्ञान बढ़ा सकते हैं। पर इसके लिए आपको बस के पैकेज टूर से नहीं आना होगा। अलग से समय निकालना होगा।

हमारी बस ने वर्ली बांद्रा सी लिंक की सड़क को पार किया। समंदर से होकर गुजरती सड़क। यानी ये सी लिंक मुंबई का नया आकर्षण है। इसके बारे में गाइड लोगों को बताते हैं। पर सी लिंक पर फोटो खींचने की मनाही है। 

तो अब हम पहुंच गए हैं बांद्रा। वही बांद्रा जिसे फिल्म डॉन में अमिताभ बच्चन ने गाने में बताया था- कोई बंदर नहीं है यहां फिर भी नाम बांद्रा। उस गाने को याद करें - ये है मुंबई नगरिया की तू देख बबुआ.... अरे यहां बंदर नहीं बहुत सारे फिल्मी सितारे रहते हैं। बांद्रा में बस के गाइड ने आमिर खान, सलमान खान, शाहरुख खान, लता मंगेश्कर, अमिताभ बच्चन आदि के घर दिखाए। यह सब देखकर लोग रोमांचित हो रहे थे। इन सबके बाद हमारा आखिरी पड़ाव था जुहू की चौपाटी।
जुहू चौपाटी पर हवा मिठाई का मजा...

पर चौपाटी पहुंच कर हमें काफी निराशा हुई। यहां मुंबई की बेइंतहा भीड़ शाम को समुद्र तट पर उमड़ती है। बाहर से आए लोगों के देखने लायक यहां भीड़ के सिवा कुछ भी नहीं। खाने पीने की चीजें बिकती हैं पांच गुने दाम पर। पांच पानी पूरी 30 रुपये में। पानीपूरी तो कुछ खास पसंद नहीं आया। पर यहां हमने हवा मिठाई जरूर खाई। इस हवा मिठाई के साथ अपने बचपन को याद किया।

और अनादि बोल पड़े ये सब कुछ झूठ था पापा - तमाम फिल्मी सितारों के बंगले देखने के बाद अनादि जब वापस होटल में लौटे तो बड़े गंभीर मुद्रा में आ गए। मेरे पास आए और मुझसे कहा, मुझे ये सब झूठ लग रहा है। हमने पूछा क्यों..अनादि ने मासूमियत से अपना तर्क दिया। इतने सारे फिल्मी सितारे जिन्हे हम टीवी और फिल्मों में रोज देखते रहते हैं भला सारे के सारे एक ही मुहल्ले में कैसे रह सकते हैं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य 
( MUMBAI, GATEWAY OF INDIA, JUHU CHAUPATI )