Saturday, June 15, 2013

द्वारका में जग्गू तांगेवाला, सोमनाथ की ओर

द्वारका में एक बार फिर ऊंट की सवारी 
सुबह से लेकर शाम तक हमने द्वारका शहर का तमाम हिस्सा छान मारा। समंदर का किनारा, चौपाटी और कई मंदिर। अब हमारा समय द्वारकाधीश को अलविदा कहने का हो रहा था। शाम को तीन बत्ती चौक पर लस्सी पीने के बाद हमने यमुना भोजनालाय से ट्रेन के लिए खाना पैक कराया। कई जगह रेलवे पेंट्री के घटिया खाने से हम सावधान थे। यमुना भोजनालय से ही हमने एक आदमी के लिए पैक किया गया भोजन ट्रेन में हम दो लोगों के खाने के लिए प्रयाप्त था। 

तीन बत्ती चौक से द्वारका रेलवे स्टेशन जाने के लिए आटो रिक्शा वाले 40 रुपये मांग रहे हैं। हमें एक तांगे वाला दिखाई दे गया। हमने उससे बात की। तांगे वाला भी 40 में जाने को तैयार हो गया। जब आटो और तांगे का विकल्प हो तो मैं हमेशा तांगे को चुनता हूं। भाई उनकी भी रोजी रोटी तो चलनी चाहिए। इससे पहले हमने मैसूर में तांगे से सफर किया था। द्वारका के इस तांगेवाले का नाम जग्गू है।



रास्ते में जग्गू तांगे वाले ने हमें द्वारका के बारे में बहुत सी जानकारियां दी।वे पिछले 25 सालों से यहां तांगा चला रहे हैं। जग्गू बताते हैं कि कभी द्वारका शहर में खूब तांगे चलते थे, पर इस समय द्वारका में सिर्फ चार तांगे ही चलते हैं। वे बताते हैं कि जग्गू तांगेवाले को पूरा द्वारका जानता है। किसी से भी मेरा नाम पूछ लेना। 

उनसे बातें करते हुए हमलोग रेलवे स्टेशन पहुंच गए हैं। द्वारका रेलवे स्टेशन शहर से थोड़ा बाहर है। द्वारका रेलवे स्टेशन ज्यादा बड़ा नहीं है। कुछ गिनती की रेलगाड़ियां ही यहां से गुजरती हैं। स्टेशन का परिसर साफ सुथरा है। 
द्वारका से सोमनाथ रेलगाड़ी से - द्वारका से सोमनाथ के लिए 19252 सोमनाथ एक्सप्रेस रात 8.40 बजे नई ट्रेन चली है। ये सुबह-सुबह पांच बजे से पहले ही सोमनाथ पहुंचा देती है। हमने इसमें पहले से ही आरक्षण करा रखा था। 



जग्गू तांगेवाले ने बताया कि इस ट्रेन के चल जाने से निजी टूरिस्ट बसों का कारोबार मंदा पड गया है। हालांकि ट्रेन राजकोट, जूनागढ़ होकर यानी लंबे रास्ते से सोमनाथ जाती है। लेकिन सैलानियों का सफर ट्रेन में सोते हुए गुजर जाता है। इसलिए सफर का पता नहीं चलता।

ट्रेन में जाने वालों में हमें बहुत से वही परिवार मिले जो दो दिन से हमें द्वारका में अलग-अलग जगहों पर घूमते हुए मिल रहे थे। ट्रेन नीयत समय पर प्लेटफार्म पर लगी। हमलोग खा पीकर ट्रेन में सो गए। वातानूकूलित क्लास में सफर का एक घाटा है कि रात में आने वाले स्टेशनों का ठीक से पता भी नहीं चलता। वैसे ओखा सोमनाथ एक्सप्रेस (19252 ) का मार्ग – ओखा, द्वारका ( 20.28 पांच मिनट ठहराव ) – जामनगर, हापा- राजकोट जंक्शन- जतलेशर जंक्शन- जूनागढ़- वेरावल- सोमनाथ ( आखिरी स्टेशन)। 

जब हमारी सुबह नींद खुली तो वेरावल स्टेशन आ चुका था। वास्तव में वेरावल ही सोमनाथ का पुराना रेलवे स्टेशन था। पर अब इससे छह किलोमीटर आगे सोमनाथ नामक नया रेलवे स्टेशन बन गया है। हमारी ट्रेन थोड़ी देर बाद सोमनाथ पहुंच गई। यह आखिरी रेलवे स्टेशन है। कुछ ही ट्रेनें यहां तक आती हैं। स्टेशन का भवन नया बना हुआ है।
सोमनाथ रेलवे स्टेशन पर सुबह सुबह। 

ट्रेन के ज्यादातर यात्री मीठी नींद में सो रहे थे। जब हम ट्रेन से बाहर निकले तो अभी सूरज भगवान भी उगने की तैयारी कर रहे थे। तो थोड़ी हमने स्टेशन पर ही गुजारा। यहीं हाथ मुंह धोकर ब्रश आदि कर लिया। फिर स्टेशन से बाहर निकलकर हमने सोमनाथ मंदिर के बगल में स्थित अपने होटल अवध तक जाने के लिए आटो रिक्शा लिया। स्टेशन से मंदिर दो किलोमीटर है। आटोवाले रिजर्व 40 रुपये में जाते हैं या फिर 10 रुपये प्रति सवारी। ये सोमवार की सुबह है। हम सबने कहा, जय सोमनाथ।
-    -विद्युत प्रकाश मौर्य   vidyutp@gmail.com
( (GUJRAT, DWARKA, SOMNATH EXP. , RAIL ) 

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