Sunday, July 28, 2013

नासिक में गोदावरी तीरे लगता है कुंभ

मुक्तिधाम मंदिर के दर्शन के बाद हमलोग अब गोदावरी नदी के तट पर पहुंच गए हैं। हमारे जीप के चालक महोदय ने कह दिया है गोदावरी तट और उसके आसपास के मंदिरों को जीप से नहीं घुमाएंगे आपको स्थानीय स्तर पर आटोरिक्शा बुक करना होगा। पहले आप लोग गोदावरी के दर्शन कर लें उसके बाद आटो से आसपास के मंदिरों के दर्शन कर लेना। उसके बाद हमलोग त्रयंबकेश्वर की ओर चलेंगे। तो हमलोग चल पड़े गोदावरी नदी के तट पर।


नासिक शहर के बीचों बीच बहती है गोदावरी नदी। यहां पर गोदावरी को गौतम गंगा भी कहते हैं। महाराष्ट्र में इस नदी का सम्मान गंगा के सदृश ही है। नासिक में इसी गोदावरी नदी के तट पर ही हर 12 साल बाद विशाल कुंभ का मेला लगता है। पर कुंभ मेला न हो तो भी गोदावरी नदी का तट सालों भर श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। नदी में स्नान करने के बाद लोग आसपास के मंदिरों में पूजा करते हैं। 



नासिक के अलावा कुंभ उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर, प्रयाग में संगम पर और हरिद्वार में गंगा तट पर लगता है। नासिक में गोदावरी के तट पर खूबसूरत पक्के घाट बने हुए हैं। यह काफी कुछ हरिद्वार के हर की पौड़ी की तरह नजर आता है। इनमें रामकुंड घाट प्रमुख है। इस घाट के आसपास ही कई मंदिर हैं। कई जगह पूजा का विधि-विधान लिखा हुआ है। यहां भी पंडे सक्रिय हैं। पर वे आपके साथ ठगी नहीं करते। 

हर शाम को मां गोदावरी की आरती - रामघाट पर ही सिंहस्थ के शाही स्नान का मुख्य घाट है। इस घाट पर रोज शाम को 7.30 बजे गोदावरी मां की महाआरती होती है। 

गोदावरी नदी के घाट पर कई मंदिर बने हैं। इन मंदिरों में प्रचीन गोदावरी मंदिर और महाकुंभ के मुख्य मंदिर आदि प्रमुख हैं। 

गोदावरी के मनोरम तट पर सालों पर भर लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। वहीं कुंभ के समय तो गोदावरी तट पर श्रद्धालुओं का महासमुद्र नजर आता है। हमने भी गोदावरी नदी में संक्षिप्त स्नान कर लिया है। मां गोदावरी के साथ अच्छा समय गुजारने के बाद हमलोग आगे के मंदिरों के दर्शन के लिए चल पड़े हैं। क्योंकि कम समय में हमें यहां आसपास में कई मंदिरों के दर्शन करने हैं। इसी बीच एक ऐतिहासिक घटना भी हमारा इंतजार कर रही है। 

महादेव का कपालेश्वर मंदिर - गोदावरी के तट के ठीक ऊपर पंचवटी क्षेत्र में शिव कपालेश्वर मंदिर है। यह देश का शायद एकमात्र शिव का ऐसा मंदिर है जहां पर मंदिर के बाहर शिव के वाहन नंदी बैल की कोई प्रतिमा नहीं स्थापित की गई है। यहां पर महादेव शिव अपने वाहन के बिना ही विराजते हैं। ऐसी जानकारी स्थानीय लोग श्रद्धालुओं को देते हैं। 


पंचवटी जहां से हुआ सीता का हरण  - कभी नासिक का पूरा इलाका घने जंगल का हुआ करता था। तभी यहां अयोध्या के राजा राम, लक्ष्मण और सीता वनवास के काल में रहे। नासिक का यह इलाका पंचवटी कहलाता है। पर अब पंचवटी शहर के बिल्कुल मध्य में आ चुका है। पंचवटी में सीता मैया का मंदिर भी है।



इस मंदिर को लोग सीता गुफा कहते हैं। हालांकि गुफा बहुत पुरानी नहीं प्रतीत होती है। इस गुफा के अंदर मां सीता का मंदिर है। यहां दर्शन के लिए काफी भीड़ लगी है। सीता गुफा के बाहर एक बड़ा वट वृक्ष है। कहा जाता है यहीं से रावण ने सीता का हरण किया था। यहां सीता मां की पर्णकुटी भी बनी है। हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पर्णकुटी और पंचवटी मंदिर को देखने के लिए आते हैं। यहां दिन भर मेले जैसा माहल बना रहता है। 
-vidyutp@gmail.com ( NASIK, GODAVARI, RIVER, MAHAKHUMBHA, MAHARASTRA  ) 

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