Saturday, May 18, 2013

पोरबंदर का कीर्ति मंदिर - जहां मोहन का जन्म हुआ


गुजरात का पोरबंदर यानी बापू का शहर। दो अक्टूबर 1869 को यहीं मोहन दास करमचंदर गांधी का जन्म हुआ जिसे दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है। बापू की जन्मस्थली को कीर्ति मंदिर के नाम से जाना जाता है। कीर्ति मंदिर का महत्व देश के तमाम देवी देवताओं के मंदिरों की ही तरह है। अब यहां हर रोज देश के कोने कोने से लोग पहुंचते हैं। 

बापू का सम्मान करने वालों के लिए यह स्थल तो सचमुच मंदिर ही है। वह कमरा जहां बापू का जन्म हुआ उसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं। कीर्ति मंदिर तीन मंजिला है। इस घर को बापू के पुरखों ने खरीदा था बाद में उसे अपनी सुविधा के अनुसार और बड़ा बनवाया। कीर्ति मंदिर में आप उस कमरे को देख सकते हैं जहां पुतली बाई ने मोहन दास को जन्म दिया था। कीर्ति मंदिर देखने आने वाले लोग यहां कई घंटे गुजारते हैं। कीर्ति मंदिर में बापू के जीवन से जुड़ी दीर्घा का निर्माण भी किया गया है। यहां पर बापू का पूरा जीवन चित्रों में देखा जा सकता है।  

कीर्ति मंदिर - यहीं हुआ था बापू का जन्म। 

कीर्ति मंदिर के तीन मंजिल में 20 से ज्यादा कमरे हैं। घर की संरचना आंगन वाली है। आंगन के चारों तरफ कमरे बने हैं। ऊपर की मंजिलहै। जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। इनमें कुछ सीढियां लकड़ी की हैं। तीसरी मंजिल पर नन्हे मोहन का अध्ययन कक्ष है। घर के हर कमरे को लोगों के दर्शन के लिए खुला रखा गया है। सभी कमरे में ठंडी ठंडी हवा आती है। दुनिया भर के गांधी प्रेमियों के लिए कीर्ति मंदिर किसी तीर्थ की तरह है। यह प्रेरणा का स्थल है।

बापू के जन्म स्थल को भव्य रूप देने की शुरुआत उनके जीवन काल में ही शुरू हो गई थी। बापू के पुश्तैनी घर को उनके परदादा हरजीवन रैदास गांधी ने खरीदा था। इस हवेली नुमा घर में बापू के पिता करमचंद गांधी, उनके चाचा तुलसीदास और दादा उत्तम चंद की हिस्सेदारी थी। 1947 में प्रसिद्ध उद्योगपति नानजीभाई कालीदास मेहता ने बापू की जन्मस्थली को कीर्ति मंदिर के तौर पर स्मृति स्थल बनाना तय किया। बापू की इसमें सहमति थी। आसपास के घरों को क्रय कर लिया गया। 1950 में यह स्मृति स्थल बनकर तैयार हो गया। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इसका उदघाटन 27 मई 1950 को किया। मुख्य गुबंद की ऊंचाई 79 फीट है। बापू 79 साल जीवित रहे इसलिए इस भवन की ऊंचाई इतनी रखी गई थी। इसके वास्तु में छह प्रमुख धर्मों के प्रतीक चिन्हों को समाहित किया गया है, जिससे से सर्वधर्म समभाव का प्रतीक नजर आता है। हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और इस्लाम के प्रतीक इसमे समाहित हैं। 

अब कीर्ति मंदिर के पास के हिस्से को भव्य रूप देकर यहां एक बड़ी फोटो गैलरी बना दी गई है जहां बापू का पूरा जीवन परिचय तस्वीरों में देखा जा सकता है। कीर्ति मंदिर पोरबंदर में एमजी रोड पर शहर के बीचों बीच है।


पोरबंदर राज घराने के दीवान थे बापू के पिता - बापू के पिता का नाम वैसे तो करमचंद गांधी था पर लोग उन्हें प्यारा से काबा गांधी कहते थे। उनके पिता का नाम उत्तम चंद गांधी था। काबा गांधी पहले पोरबंदर राजघराने के दीवान थे। बाद में राजकोट के दीवान बने। दीवान मतलब प्रधानमंत्री। जाहिर है बापू खाते पीते घर से आते थे। करमचंद गांधी ने चार शादियां की। दो पत्नियां जल्दी मर गईं. उनकी चौथी शादी पुतली बाई से हुई। पुतली बाई ने चार संतानों को जन्म दिया। सबसे बड़े लक्ष्मी दास, दूसरे करसन दास और तीसरे मोहन दास। एक बेटी भी हुई रायलता बेन। मोहन दास इनमें सबसे छोटे थे।


अपने स्कूली दिनों मोहनदास। 
बचपन में हुई शादी से खुश थे बापू - 1869 में जन्में बापू का मई 1883 में 13 साल 6 माह की उम्र में शादी कर दी गई। कस्तूरबा उनसे कुछ महीने  बड़ी थीं। बालपन में तो बापू शादी से काफी खुश थे। नए कपड़े पहनने को मिलेंगे और खाना पीना होगा। पर बाद में बापू बाल विवाह के बड़े विरोधी हो गए। 1885 में जब मोहनदास 16 साल के थे तब पिता करमचंद गांधी स्वर्ग सिधार गए। कीर्ति मंदिर वह जगह है जहां बापू का जन्म हुआ और उनका बालपन यहां गुजरा। 


कहां ठहरें - पोरबंदर रेलवे स्टेशन से कीर्ति मंदिर दो किलोमीटर दूर है। अगर पोरबंदर जा रहे हैं तो वहां एमजी रोड पर होटल नटराज में ठहर सकते हैं। इसके बगल में मून पैलेस भी किफायती होटल है।

कैसे पहुंचे - पोरबंदर गुजरात का एक छोटा सा समुद्र तटीय शहर है। पोरबंदर आने के लिए दिल्ली और अहमदाबाद से सीधी रेलगाड़ियां उपलब्ध हैं। कई शहरों से विमान सेवा भी है। पोरबंदर रेलवे स्टेशन से कीर्ति मंदिर की दूरी दो किलोमीटर के आसपास है। बापू का घर शहर के मुख्य बाजार में ही स्थित है। अगर आप रेलवे स्टेशन की तरफ से आ रहे हैं। तो मुख्य बाजार के चौक पर दाहिनी तरफ मुड़े, कीर्ति मंदिर नजर आ जाएगा।
बापू के घर कीर्ति मंदिर में पहली मंजिल पर अनादि। ( मई 2013)


क्या देखें - पोरबंदर में बापू के घर कीर्ति मंदिर के अलावा कस्तूरबा का घर, सुदामा जी का मंदिर, चौपाटी, समुद्र तट, कथावाचक रमेश भाई ओझा का आश्रम ( संदीपनी आश्रम ) देखा जा सकता है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

( ( BAPU, KIRTI MANDIR, PORBANDAR, BIRTH PLACE )