Sunday, May 19, 2013

पोरबंदर का कीर्ति मंदिर - जहां मोहन का जन्म हुआ


थोड़ी देर होटल में विश्राम के बाद हमलोग चल पड़े बापू की जन्मस्थली देखने के लिए। होटल से कीर्ति मंदिर ज्यादा दूर नहीं है। हमलोग टहलते हुए ही पहुंच गए। कीर्ति मंदिर मुख्य बाजार में मानेक चौक के पास स्थित है। गुजरात का पोरबंदर यानी बापू का शहर। दो अक्टूबर 1869 को यहीं मोहन दास करमचंदर गांधी का जन्म हुआ जिसे दुनिया महात्मा गांधी के नाम से जानती है। बापू की जन्मस्थली को कीर्ति मंदिर के नाम से जाना जाता है।

कीर्ति मंदिर का महत्व देश के तमाम देवी देवताओं के मंदिरों की ही तरह है। अब यहां हर रोज देश के कोने कोने से लोग पहुंचते हैं।  बापू का सम्मान करने वालों के लिए यह स्थल तो सचमुच मंदिर ही है। वह कमरा जहां बापू का जन्म हुआ उसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं। कीर्ति मंदिर तीन मंजिला है। इस घर को बापू के पुरखों ने खरीदा था बाद में उसे अपनी सुविधा के अनुसार और बड़ा बनवाया।

कीर्ति मंदिर में उस कमरे को देखा जा सकता है जहां पर उनकी मां ने अपने शिशु को जन्म दिया। तब किसे पता रहा होगा कि यह शिशु बड़ा होकर पूरी दुनिया को सत्याग्रह का अस्त्र प्रदान करेगा। एक ऐसा अस्त्र जिससे बिना खून खराबे के भी क्रांति हो सकती है। ऐसा अस्त्र जिसका दुनिया के तमाम देशों ने लोहा माना हो। 
कीर्ति मंदिर - यहीं हुआ था बापू का जन्म। 

कीर्ति मंदिर में आप उस कमरे को देख सकते हैं जहां पुतली बाई ने मोहन दास को जन्म दिया था। उस जमाने में लोग प्रसव के लिए अस्पताल में नहीं जाते थे। बल्कि घर में ही कुशल दाई की मदद से यह कार्य संपादित किया जाता था। कीर्ति मंदिर देखने आने वाले लोग यहां कई घंटे गुजारते हैं। कीर्ति मंदिर में बापू के जीवन से जुड़ी दीर्घा का निर्माण भी किया गया है। यहां पर बापू का पूरा जीवन चित्रों में देखा जा सकता है।  

कीर्ति मंदिर के तीन मंजिल में 20 से ज्यादा कमरे हैं। घर की संरचना आंगन वाली है। आंगन के चारों तरफ कमरे बने हैं। ऊपर की मंजिलहै। जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। इनमें कुछ सीढियां लकड़ी की हैं। तीसरी मंजिल पर नन्हे मोहन का अध्ययन कक्ष है। घर के हर कमरे को लोगों के दर्शन के लिए खुला रखा गया है। सभी कमरे में ठंडी ठंडी हवा आती है।दुनिया भर के गांधी प्रेमियों के लिए कीर्ति मंदिर किसी तीर्थ की तरह है। यह प्रेरणा का स्थल है।
बापू के जन्म स्थल को भव्य रूप देने की शुरुआत उनके जीवन काल में ही शुरू हो गई थी। बापू के पुश्तैनी घर को उनके परदादा हरजीवन रैदास गांधी ने खरीदा था। इस हवेलीनुमा घर में बापू के पिता करमचंद गांधी, उनके चाचा तुलसीदास और दादा उत्तम चंद की हिस्सेदारी थी। 

1947 में कीर्ति मंदिर की योजना बनी 
1947 में प्रसिद्ध उद्योगपति नानजीभाई कालीदास मेहता ने बापू की जन्मस्थली को कीर्ति मंदिर के तौर पर स्मृति स्थल बनाना तय किया। बापू की भी इसमें सहमति ले ली गई थी। इसके लिए आसपास के घरों को भी क्रय कर लिया गया। इस बीच जनवरी 1948 में बापू की दिल्ली में हत्या हो गई। लगभग तीन साल में सन 1950 में यह स्मृति स्थल बनकर तैयार हो गया। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इसका उदघाटन 27 मई 1950 को किया। मुख्य गुबंद की ऊंचाई 79 फीट है। बापू 79 साल जीवित रहे इसलिए इस भवन की ऊंचाई इतनी रखी गई थी।



कीर्ति मंदिर के वास्तु में छह प्रमुख धर्मों के प्रतीक चिन्हों को समाहित किया गया है, जिससे से सर्वधर्म समभाव का प्रतीक नजर आता है। हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और इस्लाम के प्रतीक इसमे समाहित हैं। 

विशाल फोटो गैलरी देखें - अब कीर्ति मंदिर के पास के हिस्से को भव्य रूप देकर यहां एक बड़ी फोटो गैलरी बना दी गई है। इस फोटो गैलरी में बापू का पूरा जीवन परिचय तस्वीरों में देखा जा सकता है। कीर्ति मंदिर पोरबंदर में एमजी रोड पर शहर के बीचों बीच है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

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