Sunday, June 30, 2013

साबरमती तीरे- अहमदाबाद - महमूद बेगड़ा ने बनवाए थे 12 दरवाजे


दीव से बस का सफर करके शाम को हमलोग वेरावल रेलवे स्टेशन पहुंच गए। दीव से वेरावल वाली बस में हमने ऑनलाइन टिकट बुक किया था। पर इसका प्रिंट आउट हमारे पास नहीं था। हमने कंडक्टर को लैपटॉप में टिकट दिखा दिया। पर उसने कहा, नियम के मुताबिक प्रिंट जरूरी है। तो रास्ते में एक जगह बस रुकी तो कंडक्टर साहब मुझे एक साइबर कैफे में ले गए। वहां पेन ड्राईव से दो रुपये देकर टिकट का प्रिंट निकलवाया। कहने लगे रास्ते में कहीं चेकिंग हो गई तो मैं और आप परेशानी में फंस सकते हैं। हमने उनकी नियमबद्धता को धन्यवाद किया।
वेरावल से सोमनाथ एक्सप्रेस शाम को 6.45 बजे यानी सही समय पर चल पड़ी है। यह सोमनाथ से बनकर चलती है। यह रोज चलने वाली ट्रेन है। सवा आठ बजे ट्रेन जूनागढ़ जंक्शन पहुंची। रात पौने नौ बजे जतलेसर जंक्शन गुजर गया। इसके बाद ट्रेन की पैंट्री कार का खाना खाकर हमलोग सो गए। रात में सोते हुए राजकोट गुजर गया। इस यात्रा में तीसरी बार हम राजकोट से गुजर रहे हैं। 

अहमदाबाद यानी गुजरात की राजधानी। भीड़ भाड़ वाला अति व्यस्त कारोबारी शहर। वेरावल से हमारी ट्रेन सोमनाथ एक्सप्रेस ( 19120) अहमदाबाद जंक्शन सुबह 4 बजे ही पहुंच गई। मुख्य रेलवे स्टेशन अहमदाबाद जंक्शन को यहां लोग कालूपुरा भी कहते हैं, जैसे लखनऊ के मुख्य स्टेशन को चारबाग कहा जाता है। वैसे अहमदाबाद शहर के अंदर साबरमती जंक्शन और मनिनगर जैसे रेलवे स्टेशन भी हैं। जहां आप उतर कर शहर में जा सकते हैं।
कांकरिया लेक - अहमदाबाद शहर की औद्योगिक प्रगति दिखाता चरखा। 

पूरी यात्रा में पहली बार यहां रेलवे के स्टाफ के खराब व्यवहार से पाला पड़ा। प्लेटफार्म नंबर एक पर टिकट जांच करने वाले टीटीई से हमारी बकझक हो गई। खैर थोड़ी देर इंतजार के बाद सुबह के छह बजे हमलोग स्टेशन से बाहर होटल के लिए निकले। हमारा होटल डिंपल इंटरनेशनल स्टेशन, पंचकुआं दरवाजा पर रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर ही था। हालांकि यहां जाने पर हमें होटल का कमरा पसंद नहीं आया। उन्होंने हमें तीसरी मंजिल का कमरा दिया जो खुली छत होने के कारण काफी गर्म हो जा रहा था। तो हमने गरमी से निजात के एसी रूम लेना तय किया। अब तक के ऑनलाइन बुकिंग में यह पहली बार हुआ है जब हमें कोई कमरा पसंद न आया हो। चेकइन के बाद हमलोग घूमने निकल गए।

और हमें बदलना पड़ा होटल - पर दिन भर घूमने के बाद हमने शाम को नए होटल में शिफ्ट किया। हालांकि हमने हर शहर में होटलों की आनलाइन एडवांस बुकिंग की थी। पर अहमदाबाद का होटल पसंद नहीं आने पर खुद घूमकर स्टेशन के पास होटल ढूंढा। स्टेशन के सामने कपासिया रोड पर होटल मनीला मात्र  936 रुपये में एसी डिलक्स कमरा मिल गया। कार्ड पेमेंट की सुविधा के साथ अच्छा होटल है। वैसे कालूपूरा रेलवे स्टेशन के सामने रीलीफ रोड पर सबसे ज्यादा हर बजट के होटल हैं।
अहमदाबाद शहर के 12 दरवाजे  - अहमदाबाद शहर के रेलवे स्टेशन का कोड एडीआई (ADI) है। इतिहास में यह शहर कर्णावती के नाम से भी जाना जाता था। पर शहर को अहमदाबाद नाम मिला मुस्लिम शासक सुल्तान अहमदशाह से। सन 1411 में अहमदशाह ने शहर को जीतने के बाद यहां अपनी राजधानी बनाई। उसके बाद यहां कई भवन बने जो इस्लामिक वास्तुकला का सुंदर नमूना हैं। यहां आप सिदी सैयद जाली, जुल्फे मीनार, सरखेज रोजा जैसी इस्लामिक इमारतें देखी जा सकती हैं। 1487 मे अहमदशाह के पोते महमूद बेगडा ने शहर की सुरक्षा के लिए 10 किलोमीटर की परिधि में दीवार बनवाई। 

तब शहर में कुल 12 दरवाजों का निर्माण भी कराया गया था। पर अब शहर इन दरवाजों से काफी बाहर तक फैल चुका है। 1864 में अहमदाबाद रेल लिंक पर आ गया। तब यहां से मुंबई के लिए रेलवे लाइन बिछाई गई। 1970 तक यह गुजरात की राजधानी भी हुआ करता था। आबादी की बात करें तो 50 लाख से ज्यादा लोगों वाला शहर देश के बड़े और व्यस्त व्यापारिक शहरों में शामिल है। मई की दोपहरी में शहर का तापमान 42 डिग्री को छू रहा है। 


आटो रिक्शा से अहमदाबाद गांधीनगर -  दिन भर हमने अहमदाबाद गांधी नगर घूमने के लिए आटो रिक्शा बुक किया। आटो वाले बाबर ( 9510515591) ने सुबह 10 बजे से शाम सात बजे तक हमें पूरे दिल से अहमदाबाद व गांधीनगर घूमाने के बाद वापस होटल लाकर छोड़ दिया। वह भी वाजिब दाम 550 रुपये में।
हमारा पहला पड़ाव था साबरमती आश्रमउसके बाद गांधीनगर हाईवे पर वैष्णो मंदिरमोटेरा में आसाराम बापू का आश्रमगांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर। वैष्णो मंदिर को जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर के तर्ज पर ही बनाया गया है। आगे हम अहमदाबाद के कुछ लोकप्रिय स्थलों की विस्तार से चर्चा करेंगे। 
-   विद्युत प्रकाश मौर्य  - Email - vidyutp@gmail.com
HOTEL MANILA - Nr. ICICI Bank, Kapasia Bazar, Opp. Railway Station, Ahmedabad, Gujarat 380002
  ( AHMEDABAD, HOTEL MANILA, AUTO, GANDHINAGAR ) 
अहमदाबाद में साबरमती नदी पर पुल. 


Saturday, June 29, 2013

दीव की रुमानी सुबह और घोघला बीच पर मस्ती

ये कोई चाय की प्याली नहीं बल्कि डस्टबिन है...
होटल सम्राट में सुबह पांच बजे नींद खुल गई। विशाल कमरे में आती सुबह के सूरज की रोशनी ने हमें और सोने नहीं दिया। वैसे भी सुबह हो गई है तो घूमना लाजमी है। तो हमने और अनादि ने तय किया घोघला बीच जाने का। यह बीच दीव के प्रवेश द्वार पर ही है। तो हमलोग निकल पड़े। जान के लिए कोई वाहन नहीं मिल रहा है तो छकड़ा ही सही। छकडे वाले ने हमें घोघला बीच के बगल में उतार  दिया।
सुबह सुबह छकड़े की सवारी। 
घोघला बीच पर सुबह सुबह टूरिस्ट ज्यादा नहीं हैं। पर यहां पर कई तरह के मनोरंजन के साधन मौजूद हैं। लोग गुब्बारे में हवा में उड़ने वाले गेम में हिस्सा ले रहे हैं। पर हमारी नजर तो स्पीड बोट की ओर थी। रफ्तार का भी अपना रोमांच होता है न। स्पीड बोट वाले से थोड़ा मोल भाव किया। मंदी के कारण वह 400 रुपये वाली राइड 200 रुपये में देने को तैयार हो गया। 

फिर क्या था हमलोग भी लाइफ जैकेट पहनकर तैयार हो गए। यह टू सीटर स्पीड बोट है। हम दोनों यात्रियों वाली सीट पर जमकर बैठ गए और ड्राइविंग सीट पर बैठ गए नाविक महोदय। और बोट चल पड़ी है समंदर की लहरों के बीच में। इसकी स्पीड बढ़ती गई और हमारा रोमांच बढ़ता गया। इस रफ्तार में थोड़ा डर भी लगता है। 

पर समंदर के बीच जाकर हमारा डर दूर हो गया। पर यह सब आनंद बहुत लंबे समय का नहीं था। जब समय हो गया तो स्पीड बोट किनारे आकर लग गई। पर यह रफ्तार का आनंद जेहन में बस गया। पर हमारे पास अभी समय है। तो अभी और समंदर के साथ वक्त गुजारना है। तो अब क्या करें। तो समंदर में नहाने का मजा लिया जाए। हमने और अनादि ने काफी देर तक समंदर नहाने का मजा लिया। मैंने तो मड बाथ का भी आनंद उठाया।  

 
नहाने से जी भर गया तो हमने देखा घोघला बीच पर बच्चों के लिए पार्क बना हुआ है। इस पार्क में किस्म किस्म के झूले लगे हैं। यह सब कुछ फ्री है। अनादि अलग अलग झूले पर काफी देर तक झूलते रहे। मैं भी उनका साथ देता रहा। मानो हमारा बचपन लौट आया हो। इस बीच होटल से माधवी का फोन आया। हमने कहा, रुम सर्विस में नास्ता मंगा लो हमें आने में थोड़ा वक्त लग जाएगा। 

दिन ढलने के साथ घोघला बीच पर रौनक बढ़ने लगी है। लोग आने लगे हैं। कई लोग आसमान में उड़ने का मजा लेने में जुट गए हैं। अलग अलग एडवेंचर टूर वालों के दफ्तर भी खुलने लगे हैं। पर हमारी मौज मस्ती का कोटा पूरा हो रहा है। तो हमें अब वापस होटल की ओर लौटना चाहिए। 

हमने दीव के प्रवेश द्वार पर मुरमुरा का पैकेट खरीदा। यह हमारा सुबह का स्वास्थ्य वर्धक नास्ता हो गया। एक बार फिर वापसी के लिए छकड़ा ही मिल गया। दीव में दो द्वीपों के बीच में समंदर पर एक छोटा सा पुल भी आता है। रास्ते में हमें सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नजर आया। साफ सुथरे स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की कोई लाइन नहीं है। होटल पहुंचने के बाद एक बार फिर हमलोग स्विमिंग पुल में कूद पड़े। अब दीव छोड़ने का समय हो चला है। वेरावल जाने वाली बस में हमारा आरक्षण हो रखा है। तो चलें बस स्टैंड की ओर।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( DIU, GHOGLA BEACH, SPEED BOAT RIDE, ADVENTURE TOURISM ) 

Friday, June 28, 2013

दीव - दोपहर में मैंगो शेक और समंदर के संगीत के संग डिनर

दीव के फोर्ट पर होटल डीपी में लंच। 
दीव में प्रवेश करते ही हमें भूख लगी थी, तो दोपहर के खाने के लिए हमलोग एक गार्डेन नुमा होटल डीपी में पहुंच गए। इनकी गुजराती थाली काफी अच्छी थी। खाकर मजा आ गया। 70 रुपये की लिमिटेड थाली। लेकिन खाना सुस्वादु और कई तरह की सब्जियों और छाछ के साथ।  दीव खाने पीने के लिए जाना जाता है। गुजरात में पूर्ण शराबबंदी लागू है। 

तो गुजरात के शराब पीने के शौकीन लोग दीव आना पसंद करते हैं। यहां शराब सस्ती भी है और अच्छी भी मिलती है। हालांकि दीव की सड़कों पर रात को शराब पीकर हरकत करते हुए लोग आपको नजर नहीं आएंगे। लिहाजा दीव परिवार के साथ घूमने वालों के लिए सुरक्षित है। शहर की कानून व्यवस्था चुस्त है। दीव पहुंचने पर हमने सबसे पहले मैंगो शेक का स्वाद लिया। गुजरात के केसर आम का मैंगो शेक।

मैंगो शेक का मजा - दोपहर के भोजन के बाद हमने मैंगो शेक का मजा लिया। फोर्ट रोड पर शेक बनाने वाले अपने बनारस के भाई निकले। वे बताते हैं कि हर साल छह महीने दीव में आकर दुकान लगाते हैं। बाकी के छह माह गांव में गुजारते हैं।  हम जिस होटल सम्राट में ठहरे थे उनका भी अपना रेस्टोरेंट अच्छा है।  लेकिन दीव का सबसे लोकप्रिय रेस्टोरेंट है अपना होटल। यह आवासीय होटल आलीशान का साथी होटल है।
दीव के होटल अपना में डिनर। 
अपना का रेस्टोरेंट मरीन ड्राइव पर है। यहां समंदर की लहरों के साथ खाने का आनंद दोगुना हो जाता है। हमें बैठने की जगह भी समंदर के तट पर छतरी के नीचे मिली। सुस्वादु गुजराती थाली और उसके साथ जगमगाते दीव का नजारा। पार्श्व में सुनाई देता समंदर की लहरों का संगीत। इससे खाने का स्वाद और बढ़ जाता है।

माधवी और वंश के लिए ये शाम यादगार रही। आसपास के टेबल पर गुजराती, मराठी, पंजाबी परिवार दीव की शाम का आनंद उठा रहे थे। यहां पर हमारा परिचय एक गुजराती भाई से हुआ। वे अपने परिवार के साथ दीव घूमने आए हैं। उनकी आनंद में पापड़ बनाने की फैक्ट्री है। बताते हैं कि वे पापड़ का एक्सपोर्ट करते हैं। 

इसी तरह हमारे सम्राट होटल में स्विमंग पुल में एक गुजराती एनआरआई दंपत्ति मिले। वे हर साल लंदन से एक महीने के लिए अपने देश आते हैं। बताते हैं 15 दिन तो अपने गांव में रहता हूं। बाकी 15 दिन इसी सम्राट होटल में। उनकी उम्र 60 के पार है पर वे हर रोज स्विमिंग पुल में घंटो तैराकी करते हैं। मुझे तैरना नहीं आता। पर उन्होने कहा अगर आप हफ्ते भर हमारे साथ रहें तो तैरना सीखा दूंगा। 

दीव में हमारा प्रवास सिर्फ दो दिन का रहा। होटल सम्राट को छोड़ने की इच्छा नहीं हो रही थी। खास कर इसके स्विमंग पुल के कारण। हमने दो दिन में चार बार स्विमिंग पुल में स्नान किया। हालांकि यहां कई दिन रहने का मौका मिले तो ज्यादा मजा आता। कोई बात नहीं फिर कभी सही। मौका मिला तो आएंगे इस हसीन राज्य दीव में।  


-    - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com    
( (DIU, APNA HOTEL, MANGO SHAKE )

Thursday, June 27, 2013

आईएनएस खुखरी – जरा याद करो कुर्बानी

सुंदर दीव की सुरम्य दर्शनीय स्थलों में एक है चक्रतीर्थ बीच जहां बना है आईएनएस खुखरी (खुकरी) मेमोरियल। यहां यादें हैं एक बड़ी शहादत की। जिन भारतीय  नौ-सैनिकों ने राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, उनके स्म‍रण में टीले पर भारतीय नौ-सेना  के युद्ध-पोत (FRIGATE) आईएनएस खुखरी का स्मारक बनाया गया है I टीला एवं इसके आसपास के क्षेत्र को बहुत ही खूबसूरत तरीके से विकसित कर इसे प्रकाशमान किया गया है।

पाकिस्तान से युद्ध के दौरान 9 दिसंबर 1971 भारत के लिए बड़े सदमे का दिन था। पाकिस्तान के पीएस हैंगर और भारत के आईएनएस खुखरी के बीच दीव समुद्र तट से 40 नाटिकल मील दूर पर मुकाबला हुआ। पाकिस्तानी सबमरीन की ओर से तीन तारपीडो दागे गए। इसे हमारा आईएनएस खुखरी झेल नहीं पाया। उस समय खुखरी में भारत के 18 अफसर और 176 नौसैनिक को अपनी जान गंवानी पड़ी। 

कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला की शहादत - भारतीय नौ सेना के कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला, उस समय खुखरी के कमांडिंग आफिसर थे। इस हमले के बाद खुखरी जहाज अरब सागर में डूब गया। और इस तरह सभी 18 अफसर और 176 सैनिकों ने अरब सागर में जल समाधि ले ली। वह रात पौने नौ बजे का समय था। खुखरी पर मौजूद सभी नाविक और अधिकारी रोज की तरह रेडियो का समाचार सुनने के लिए जुटे थे। जैसे रेडियो पर पहला वाक्य सुना गया – ये आकाशवाणी है अब आप... से समाचार सुनिए, तभी पहला धमाका हुआ।
कुछ खुशकिस्मत फौजी लोग थे जो खुखरी से बचकर निकलने में कामयाब रहे। पर कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला ने जहाज नहीं छोड़ा। वे चाहते तो अपनी जान बचा सकते थे। पर शायद उन्होंने सोचा कि बचकर गया तो देश को क्या जवाब दूंगा कि मैं अपने खुखरी को बचा नहीं पाया। कुछ लोग कहते हैं कि कैप्टन मुल्ला ने खुखरी पर आखिरी वक्त में आत्महत्या कर ली थी। कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला को बाद में मरणोपरांत महावीर चक्र दिया गया। खुखरी से बचे हुए जवानों में से एक ने बाद में एक पुस्तक भी लिखी।

निश्चय ही भारतीय नौ सैनिकों के लिए 1971 का वर्ष दुखद रहा, भले ही हमें पाकिस्तान से युद्ध में विजयश्री मिली लेकिन इस साल युध्द में खुखरी पर सवार 18 अधिकारियों और 176 नाविकों यानी 194 बहादुर फौजियों को देश ने खो दिया।

आईएनएस खुखरी मेमोरियल - 15 दिसंबर 1999 को उन बहादुर सैनिकों की याद में दीव के चक्रतीर्थ बीच  पर आईएनएस खुखरी का मेमोरियल बनाया गया। यहां पर खुखरी का एक माडल भी बनाया गया है।
हमारी मुलाकात रामअवध प्रजापति से होती है, वे 1965 से 1985 तक नौ सेना में रहे। वे बताते हैं कि 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय आईएनएस दीपक पर कराची रीजन में तैनात थे। इसी दौरान हमने रेडियो पर आईएनएस खुखरी के तारपीडो की दुखद खबर सुनी।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि आईएनएस खुखरी धोखे का शिकार हुआ। हमारे सोनार सिस्टम ने पाकिस्तानी तारपीडो को देख लिया था पर सूचना पहुंचाने का सिस्टम काम नहीं कर सका, और देश के बहुत सारे जवानों को शहादत देनी पड़ी। बहरहाल ये बहुत ही मार्मिक कहानी है। बॉलीवुड चाहे तो कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और उनके साथियों की शहादत पर शानदार फिल्म बना सकता है।
हमले में नष्ट एकमात्र युद्धपोत-  आईएनएस खुखरी एक ब्रिटिश टाईप 14 क्लास का युद्धपोत था। इसका निर्माण जे सेमुअल ह्वाइट ने किया था। यह 1955 का निर्मित था और 16 जुलाई 1958 को भारतीय नौ सेना में कमिशन हुआ था। इसका पेनेट नंबर एफ 149 था। इसकी लंबाई 300 फीट थी और 27.8 नाटिकल मील (51 किलोमीटर प्रति घंटे ) की अधिकतम गति से समंदर में दौड़ने में सक्षम था। भारतीय नौ सेना के इतिहास में यह एकमात्र जहाज है जो तारपीडो हमले में नष्ट हुआ। 
कृपाण कुठार और खुखरी - खुखरी के साथ नौ सेना के पास आईएनएस कृपाण और आईएनएस कुठार तीन युद्धपोत थे जिन्हें सिस्टर शिप कहा जाता था। आईएनएस खुखरी के हादसे में 61 नौ सैनिक और छह अधिकारी अपनी जान बचा पाए थे। खुखरी से बचने के बाद इन लोगों को संयोग से एक नाव मिल गई थी। 14 घंटे खुले समंदर में गुजारने के बाद उनसे संपर्क हुआ और वे लोग बचाए जा सके थे। 

कैसे पहुंचे - चक्रतीर्थ बीच दीव शहर से चार किलोमीटर की दूरी पर हैIयह बीच स्थानीय पर्यटकों के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है। सैलानियों के लिए यह आनन्दायक विश्राम स्थल है I इस बीच के नजदीक ही एक टीला है, जिसे सूर्यास्त दर्शन स्थल (सन सेट प्वाइंट) भी कहा जाता है।

यहां हुआ था जालंधर का वध - इस स्थल से एक रोचक पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है I ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से असुरराज जालंधर का वध किया थाI बीच के सामने समुद्र में एक छोटा-सा टीला है, जिसे भांस्लोग के नाम से जाना जाता है I कहा जाता है कि वहां पत्थर पर भगवान श्रीकृष्ण के पदचिन्ह हैं Iजब निम्न ज्वार हो तभी इस स्थान पर पहुंचा जा सकता है।
-         विद्युत प्रकाश मौर्य
-         (INS KHUKRI, INDIAN NAVY, DIU, INDO PAK WAR 1971, TORPEDO )

Wednesday, June 26, 2013

बुलाते हैं दीव के रुमानी समुद्र तट

दीव का नगवा बीच। 
चर्च के बाद हमें हमारे आटो वाले लेकर आ पहुंचे हैं नगवा बीच पर। वैसे तो देश में कई राज्यों में समुद्र तट हैं जो सैलानियों की पसंद हैं लेकिन दीव के समुद्र तट की अपनी रुमानियत है। दीव का सबसे लोकप्रिय समुद्र तट है नगवा बीच। दीव के बस स्टैंड से सात किलोमीटर आगे नगवा बीच पर सालों पर शाम को रौनक रहती है। बहुत भीड़ भाड़ नहीं है लेकिन नगवा बीच का सौंदर्य ऐसा है जो यहां आपको घंटो रोकता है। यहां आप लहरों से अठखेलियां कर सकते हैं। नहाने का मजा ले सकते हैं। तट पर नहाने के बाद फ्रेश वाटर बाथरुम भी बने हैं। जो लोग यहीं रहना चाहते हैं तो नगवा बीच पर कुछ होटल भी हैं। 




शाम को सैलानियों से रौनक - नगवा बीच पर वाटर स्कूटर, स्पीड बोट आदि का भी मजा लिया जा सकता है। अगर आप फोर्ट रोड के होटलों में ठहरें हैं तो नगवा बीच जाने और आने का इंतजाम करके जाएं। आप आरक्षित आटो या किराए की बाइक लेकर जा सकते हैं। जालंधर बीच और चक्रतीर्थ बीच दीव के दूसरे समुद्र तट हैं। यहां नहाने योग्य सुविधा नहीं है। पर घूमने और समंदर के साथ मौन संवाद करने के लिए ये समुद्र तट काफी अच्छे हैं।

प्रवेश द्वार पर है घोघला बीच -  घोघला बीच दीव के प्रवेश द्वार पर ही स्थित है। बस स्टैंड के पास समंदर पर बना पुल दीव और घोघला को जोड़ता है। घोघला बीच पर भी होटल हैं और लंबे समुद्र तट पर सुबह या शाम गुजारने के लिए पर्याप्त मौके भी हैं। यहां वाटर स्कूटर या गुब्बारे की सैर का मजा लिया जा सकता है। घोघला बीच पर नगवा बीच की तरह भीड़ भाड़ नहीं होती।
दीव का घोघला बीच। 
हालांकि दीव के समुद्र के पानी में बालू की मात्रा ज्यादा है लेकिन दीव के तट की अपनी खूबसूरती है। कई सैलानियों को ये गोवा से भी ज्यादा अच्छा लगता है। यहां के समुद्र तट साफ सुथरे और पारिवारिक माहौल वाले हैं। दीव घूमने के लिए सुरक्षित जगह है, क्योंकि यहां अपराध शून्य के करीब है। दीव के सुंदर तट एक बार आने वाले सैलानियों को बार बार बुलाते हैं।

-    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य    
(DIU, SEA, NAGWA BEACH, JALANDHAR BEACH, GHOGHLA BEACH  )

Tuesday, June 25, 2013

दीव का सत्रहवीं सदी का निर्मल माता चर्च

दीव का किला देखे के बाद हमलोग आ पहुंचे एक पुराने चर्च को देखने। दीव के आस्था के स्थलों में प्रमुख है निर्मल माता चर्च। यह चर्च 400 साल से अधिक पुराना है जो देश के प्रमुख पुराने चर्च में से एक है। यह एक पुर्तगाली चर्च है। इसे निष्कलंक या निर्मल माता चर्च के अलावा सेंट पाल चर्च के नाम से भी जाना जाता है। इस चर्च का निर्माण 1601 में आरंभ हुआ था। 

करीब 9 साल बाद 1610 में इसका निर्माण पूरा हुआ। इस चर्च के शिल्प को स्थापत्य कला के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके आगे के हिस्से में अनूठी कलाकृतियों को सज्जित किया गया है। एक बारगी बाहर से देखने में लोगों की नजरें इसके सौंदर्य पर रूक जाती हैं। इसके निर्माण में भारतीय शिल्प कला का भी सुंदर मेल दिखाई देता है।

चर्च के आंतरिक सज्जा में गर्भ गृह, कमान और गुबंद आदि का सौंदर्य भी देखकर अचरज होता है। आतंरिक सज्जा में पुल्पिट या व्यासपीठ में भारतीय स्थापत्य कला की झलक दिखाई देती है। इसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई संस्कृति की झलक दिखाई दे जाती है। आंतरिक सज्जा में काष्ठ शिल्प का अदभुत काम दिखाई देता है। यह चर्च उस समय बना था जब कोई कंप्यूटर नहीं आया था, तकनीक इतनी विकसित नहीं थी। पर इसका शिल्प देखकर आधुनिक वास्तुकार भी दांतो तले अंगुलियां दबा लेते हैं। चर्च के लकड़ी के दरवाजों पर सुंदर काम दिखाई देता है। चर्च की इमारत सफेद रंग की है।

इसके कमान और गुंबद के निर्माण में इस बात का ख्याल रखा गया है कि इमारत को आंधी और भूकंप से बचाया जा सके। दीव के सेंट पॉल चर्च के अंदर सेंट मेरी की मूर्ति स्थापित है। यह एक बड़े आकार की बर्मा टीक ( सागवान) की लकड़ी से बनी है। डिजाइन की लिहाज से दीव का सेंट पॉल चर्च बॉम एन्ड जीसस बेसिलिका गोवा की तर्ज बना हुआ भी लगता है। दीव में रहने वाले कुछ सौ इसाई समुदाय के बीच ये सबसे बड़ा चर्च है।




 कैसे पहुंचे - यह सुंदर चर्च दीव में दीव के किले के पास स्थित है। जब आप चर्च में पहुंचते हैं तो अदभुत शांति का एहसास होता है। यहां पर मोबाइल फोन बंद रखने के निर्देश हैं। चर्च में नियमित और साप्ताहिक प्रार्थना होती है। दीव का भ्रमण कराने वाले आटो रिक्शा वाले आपको दीव के निर्मल माता चर्च लेकर जाते हैं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com
( DIU, NIRMAL MATA CHURCH ) 

Monday, June 24, 2013

समंदर से घिरा दीव का किला


दीव भ्रमण में हमारा पहला पड़ाव है दीव का किला। किला शाम को 5 बजे बंद हो जाता है इसलिए आटो वाले पहले हमें किले पर ही लेकर आए। समंदर का नजारा तो देर शाम भी किया जा सकता है। दीव शहर में आकर्षण का मुख्य केंद्र यहां का किला है। दीव की मुख्य शहर को ही फोर्ट रोड कहते हैं। मुख्य बाजार वाली सड़क यानी मरीन ड्राइवर पर चलते जाएं आप किले के मुख्य द्वार तक पहुंच जाएंगे। दीव का किला करीब 57 हजार वर्ग मीटर में फैला है। इस किले को एशिया के पुर्तगालियों के किले में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

दीव का किला तीन दिशाओं में समुद्र से घिरा है। जबकि चौथी दिशा में एक छोटी सी नहर इसकी सुरक्षा करती है। इसी दिशा में किले का प्रवेश द्वार है। इस किले का निर्माण गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने पुर्तगालियों से संधि के तहत मु़गल आक्रमण से बचाव के लिए 1535 में करवाया था। बाद में ये किला पुर्तगालियों के कब्जे में आ गया। 1546 में वायसराय डी जीओ ने इसका पुनर्निर्माण कराया। प्रवेश द्वार के पास है सेंट जार्ज बुर्ज। इस पर कई तोपों की तैनात रहती थीं।

उस दौर में किले की सभी बुर्जों पर तैनात की गई कई तोपों आज भी देखा जा सकता है। इन सभी बुर्जों का नाम ईसाई संतों के नाम पर किया गया है। इन सब तोपों का मुहं समंदर की ओर है। हालांकि बदलते वक्त के साथ धीरे-धीरे इन तोपों का क्षय होता जा रहा है।

किले के अंदर बड़े शस्त्रागार भी बने थे। इसके अलावा संकट काल में भागने के लिए कई सुरंगे भी बनाई गई थीं। दीव के किले में प्रवेश के लिए कोई टिकट नहीं है। अगर आप दीव के किले में पहुंचे तो किले में सबसे ऊंचाई पर बने लाइट हाउस में जरूर जाएं। लाइट हाउस में जाने के लिए दो रुपये का टिकट लेना पड़ता है। इस लाइट हाउस की छत से बहुत दूर का अरब सागर का दिलकश नजारा दिखाई देता है।



राजा रानी जल कुंड - सन 1650 में बने संत लूसिया बुर्ज को किले के पूर्वी छोर पर देखा जा सकता है। संत लूसिया बुर्ज और मुख्य द्वार के बीच राजा रानी जल कुंड बना है। इस कुंड में बरसाती जल संग्रह करने का बेहतरीन इंतजाम किया गया था। दीव के किले में ही आजकल दीव की जेल बना दी गई है। हालांकि इसमें कैदी कम ही रहते हैं। दीव के इस किले में अमिताभ बच्चन के फिल्म तूफान की शूटिंग हुई है। दीव के इस किले को घूमने के लिए तीन घंटे का वक्त चाहिए। किले के अंदर राज्यपाल का निवास भी बना है।


 दीव 1961 तक पुर्तगाल के कब्जे में था। इसलिए किले में पुर्तगालियों से जुड़ी स्मृतियां हैं। पुर्तगाली चर्च के अलावा यहां युद्ध के हथियारों की स्मृतियां हैं। किले के अंदर ही दीव की जेल भी है। दीव में अपराध बहुत कम है इसलिए जेल में कैदी दो चार ही रहते हैं। किले को देखकर लगता है कि इसकी सुरक्षा को अभेद्द बनाने के लिए खूब पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

किले की सुरक्षा अभेद्द -किले को देखकर लगता है कि इसकी सुरक्षा को अभेद्द बनाने के लिए खूब पुख्ता इंतजाम किए गए थे। किले के अंदर भागने के लिए कई सुरंगों का भी निर्माण किया गया है। ये किला पुर्तगालियों का हैलेकिन पुर्तगालियों से पहले भी दीव का इतिहास है।  किले के अंदर संत लुसिया बुर्ज और टावर हाउस है। यहां समंदर का नजारा अदभुत दिखाई देता है। किले में प्रवेश का कोई टिकट नहीं हैलेकिन किले में प्रवेश शाम को पांच बजे के बाद बंद हो जाता है।
दीव किले का लाइट हाउस। इस पर जाने के लिए 2 रुपये का टिकट लगता है। -

समंदर के बीच पानी कोठा - दीव के किले से समुद्र का नजारा देखते ही बनता है। किले के सामने समुद्र के अंदर की दिशा वाले हिस्से में किले जैसी एक और छोटी सी इमारत है। इसे पानीकोठा कहते हैं। सर क्रीक के मुहाने पर बने होने के नाते इसे दूर से ही देखा जा सकता है। स्थानीय लोग पानीकोठा को कालापानी जेल बताते हैं। किले से कुछ दूर ही फेयरी जेट्टी है। जहां से बोट में बैठ कर आप पानी कोठे के आसपास सैर के लिए जा सकते हैं। दीव का टूरिज्म विभाग इसके लिए बोट का संचालन करता है।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
 ( DIU FORT, SEA, PANI KOTHA ) 

Sunday, June 23, 2013

धरती पर जन्नत सा नजर आाता है दीव


दीव पहुंचने के बाद हमने दीव के स्थानीय स्थलों के भ्रमण के लिए एक आटो रिक्शा बुक किया। आधे दिन में दीव के सारे प्रमुख स्थल देखे जा सकते हैं। वैसे यहां पर स्कूटी भी किराए पर उपलब्ध है। हमने एक गैराज वाले बात की। स्कूटी 250 रुपये में दिन भर के लिए। पूरे दीव में कहीं पार्किंग की समस्या नहीं है। मतलब कहीं भी स्कूटी खड़ी कर दें और घूमते रहें। नो पेड पार्किंग। गैराज वाले भाई ने कहा कि स्कूटी यहां चोरी नहीं होगी। अगर चोरी हो भी गई तो उसे ढूंढ निकालना मेरी जिम्मेवारी होगी आपकी नहीं।

दीव धरती पर जन्नत सा नजर आता है। गोवा से अलग होने के बाद दमन दीव केंद्र शासित राज्य हैं। हालांकि दमन और दीव के बीच 700 किलोमीटर की दूरी है। पर दीव गुजरात के ज्यादा करीब है। छुट्टियां बीताने के लिए सेहत लाभ के लिए दीव सिर्फ गुजरातियों को ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के दूसरे देशों के लोगों को आकर्षित करता है।

पूरा दीव आप 25 किलोमीटर में घूम सकते हैं। पर दीव के बस स्टैंड से फोर्ट रोड पर आगे बढ़ने पर दीव का मुख्य बाजार है। यहीं रहने व खाने के लिए प्रमुख होटल हैं। फोर्ट रोड के एक तरफ मद्धम-मद्धम हिलोरें लेता समंदर है तो दूसरी तरफ दीव का बाजार। आप इतिहास की गाथाओं के साथ कुदरत का मधुर संगीत भी सुन सकते हैं दीव में। दीव 52 हजार की आबादी वाला एक छोटा सा द्वीप है ।


केंद्र शासित प्रदेश -  30 मई, 1987 को गोवा को राज्यों का दर्जा दिए जाने के बाद दमन और दीव अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। दीव जिले में साक्षरता दर वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 83.36% है। दीव में 12वीं के बाद कोई स्कूल नहीं है। दीव के छात्रों 12 वीं कक्षा के बाद उच्चतर अभ्यास के लिए 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुजरात के जूनागढ़ जिले में ऊना में आर्ट्स और कॉमर्स कॉलेज में जाना पड़ता है । 

दीव की सड़कें शानदार हैं। पूरे दीव में समंदर के किनारे हर जगह सड़क पर बैठने के लिए सुंदर बेंच बनाए गए हैं। बच्चों के लिए जगह जगह झूले लगाए गए हैं। जहां थक जाएं बेंच पर बैठ जाएं। इच्छा हो तो झूले पर झूलने लगें। यहां की साफ सफाई इतनी बेहतर है कि देखकर ऐसा नहीं लगता कि हम भारत के ही किसी शहर में हैं। 




 फोर्ट रोड पर आगे जाकर दीव का प्रसिद्ध किला है। दीव 1961 तक पुर्तगाल के कब्जे में था। इसलिए यहां से पुर्तगालियों से जुड़ी हुई कई स्मृतियां हैं। दीव किले के पास ही दीव का प्रसिद्ध निर्मल माता चर्च है। इसके अलावा दीव में समर हाउस पर बैठकर आप समंदर का नजारा कर सकते हैं।


आईएनएस खुखरी की स्मृति में एक माडल दीव में बनाया गया है। इसके पास ही गंगेश्वर महादेव का मंदिर है। ये दीव का एकमात्र हिंदू मंदिर है, जहां सैलानी जाते हैं। समंदर के किनारे यह छोटा सा शिव मंदिर है। हालांकि ये मंदिर बहुत पुराना प्रतीत नहीं होता है। पर इस मंदिर में सागर की लहरें लगातार शिव लिंग को स्पर्श करती रहती हैं। 

सालों भर सैर करें दीव का - आप दीव घूमने का कार्यक्रम सालों भर बना सकते हैं। यहां मई के महीने में भी तापमान 32 -33 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं जाता है। इसलिए यहां आने के लिए हर मौसम अच्छा है। हां हर शनिवार और रविवार को यहां के होटल महंगे हो जाते हैं। महंगे ऐसे वैसे नहीं सीधे कमरों का किराया दोगुना हो जाता है। दीव में शराब पीने की छूट है इसलिए गुजरात के लोग साप्ताहांत में दीव का रुख करते हैं। अगर आप गुजरात से बाहर से आ रहे हैं तो सोमवार से शुक्रवार के बीच दीव का रुख करें तो आपको होटलों का किराया सस्ता पड़ेगा। 
-    ---- विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
  ( DREAM STATE DIU )