Thursday, May 23, 2013

पोरबंदर का मानेक चौक और पुराने बाजार की खुशबू



कीर्ति मंदिर और कस्तूरबा गांधी ( बा ) का घर देखने के बाद हमलोग पोरबंदर की सड़क पर आ गए और थोड़ी देर बाजार का मुआयना किया। कीर्ति मंदिर के पास मानेक चौक है। यह पोरबंदर का परंपरागत बाजार है। शाम को मानेक चौक पर चहल पहल है। चौक पर कुछ इमारतें काफी प्राचीन नजर आ रही हैं। एक विशाल भवन है। उसके नीचे होकर सड़क गुजर रही है जो कीर्ति मंदिर की तरफ जाती है। 


इस गेट के नीचे दुकानें भी बनी हुई हैं। इस विशाल गेट के मेहराबों में लकड़ी का काम दिखाई देता है। थोड़ी सी बात पोरंबदर शहर के बारे में। पोरबंदर अब गुजरात राज्य का एक जिला है। यह जिला मुख्यालय शहर है। इसे सुदामापुरी नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि महाभारत काल में कृष्ण के मित्र सुदामा का यहीं घर हुआ करता था। यह भी कहा जाता है कि संदीपनी ऋषि का आश्रम भी यहीं पर था जहां कृष्ण और सुदामा साथ पढ़ाई करते थे। यह एक अति प्राचीन समुद्र तटीय शहर है। यह ब्रिटिश भारत में पोरबंदर एक प्रिंसले एस्टेट हुआ करता था।    
 
    महाभारत काल में पोरबंदर का नाम अस्मावतीपुरम हुआ करता था। दसवीं सदी में इसका नाम पौरावेलाकुल भी मिलता है। सोलहवीं सदी में पोरबंदर पर जेठवा राजपूतों का शासन था। पोरबंदर में आपके पास समय हो तो हुजुर महल और दरबारगढ़ महल देख सकते हैं। यह जेठवा शासकों द्वारा निर्मित है।  


  पोरबंदर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भी है। साल 1991 के बाद से यहां लगातार भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीत रहे हैं। आजकल यहां से विट्टठल भाई रदाडिया सांसद हैं। पोरबंदर लोकसभा के अंतर्गत कुल छह विधान सभा क्षेत्र आते हैं। मानेक चौक दूर से देखने में किसी चौपाल सरीखा नजर आ रहा है। बाजार में ग्रामीण उपयोग में आने वाले सामान ज्यादा बिक रहे हैं। जैसे दूध ढोने वाले बर्तन। एक तरफ फूलों का बाजार भी सजा हुआ है। 
   
   आबादी की बात करें तो पोरबंदर शहर में हिंदू मुस्लिम मिश्रित आबादी है। शहर में कई पुरानी मसजिदें भी हैं। पोरबंदर की आबादी छह लाख के आसपास है। उद्योग धंधे के नाम पर यहां कुछ खास नहीं है। पर पोरबंदर में दर्शनीय स्थल कई हैं। बापू और बा की जन्मस्थली के अलावा यहां पर आप सुदामा जी का मंदिर, पोरबंदर का सुंदर समुद्र तट के अलावा और भी कई चीजें देख सकते हैं। पोरबंदर शहर में एक नेहरू तारामंडल भी बनवाया गया है। यहां पर गुजराती और हिंदी में शो चलते रहते हैं। पोरबंदर के पास वन्य जीव अभ्यारण्य भी है। यहां पर भेड़िये और चीते पाए जाते हैं। 

   सबसे अच्छी बात पोरबंदर पहुंच कर मुझे यह लगी कि यहां के बाजार में प्राचीनता की खुशबू बची हुई है। मुख्य सड़क पर भले ही आधुनिक होटल और बाजार बन गए हैं पर पुराने शहर के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तो पोरबंदर की सड़कों पर विचरण करना बड़ा भला लगता है। तो अब हमलोग आगे पोरबंदर का समुद्र तट देखने और चलेंगे पर इससे पहले चलेंगे सुदामा जी के मंदिर में। 
- - विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( (PORBANDAR, SUDAMAPURI, JETHWA RAJPUT, ESTATE ) 


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