Monday, May 20, 2013

जानिए बापू के बचपन की कुछ अनछुई बातें

मोहनदास करमचंद गांधी यानी बापू की जन्मस्थली कीर्ति मंदिर पहुंचने के बाद बापू के बारे में वे तमाम बातें भी जानने को मिलती हैं जो उनके व्यक्तित्व के अनछुए पहलू हैं। बापू के बचपन का नाम रखा गया था मोहन दास। मतलब उनका पहला नाम था मोहन। पर उन्हें बचपन में लोग प्यार से मोनिया नाम से बुलाया करते थे। मोनिया बचपन वह सारी शैतानियां करता था जो आम बच्चे करते हैं। अब देखिए वह जगह जहां बालक मोहन बैठकर पढ़ाई किया करता था। 

काबा गांधी थे दीवान - अब थोड़ी सी बातें बापू के पिता के बारे में भी। बापू के पिता का नाम वैसे तो करमचंद गांधी था। पर लोग उन्हें प्यार से काबा गांधी कह कर बुलाया करते थे। उनके पिता यानी बापू के दादाजी का नाम उत्तम चंद गांधी था। काबा गांधी पहले पोरबंदर राजघराने के दीवान थे। बाद में राजकोट के भी दीवान बने। दीवान का मतलब होता है प्रधानमंत्री। तो यह बड़ा पद था। 
बापू के घर अंदर सीढ़ियों पर। 
खाते पीते घर से आते थे बापू  - जाहिर है बापू खाते पीते घर से आते थे। उनके पिता करमचंद गांधी ने कुल चार शादियां की। उनकी दो पत्नियां जल्दी ही मर गईं थीं। उनकी चौथी शादी पुतली बाई से हुई थी। पुतली बाई ने कुल चार संतानों को जन्म दिया। सबसे बड़े लक्ष्मी दास, दूसरे करसन दास और तीसरे मोहन दास। एक बेटी भी हुई रायलता बेन। मोहन दास इनमें सबसे छोटे थे। 


अपने स्कूली दिनों मोहनदास। 
कीर्ति मंदिर की पिक्चर गैलरी को देखते हुए बापू के बचपन के बारे में काफी सारी नई बातें जानने को मिलती हैं। उनका स्कूली जीवन। उनकी पढ़ाई लिखाई। उनके भाइयों से रिश्ते। वैसे तो बापू के बारे में किताबों में सब कुछ पढ़ा जा सकता है। पर उनके जन्म स्थली पर आकर इतिहास से रूबरू होने का जो मौका मिलता है उसकी अनुभूति कुछ अलग ही है। 

दुनिया भर से लोग आते हैं पोरबंदर में। कीर्ति मंदिर के गेस्ट बुक में हर रोज अलग अलग तरह के अनुभ दर्ज कराते हैं। लोग कई तरह की प्रेरणा लेकर जाते हैं लोग यहां से। यह सचमुच में कीर्ति मंदिर है।  

बचपन में हुई शादी से खुश थे बापू - 1869 में जन्में बापू का मई 1883 में 13 साल 6 माह की उम्र में शादी कर दी गई। कस्तूरबा उनसे कुछ महीने  बड़ी थीं। बालपन में तो बापू शादी से काफी खुश थे। वे तब शादी का असली मतलब नहीं जानते थे। उनकी तो खुशी का ये कारण था कि शादी होगी नए नए कपड़े पहनने को मिलेंगे। बहुत सारे लोग आएंगे। जलसा होगा। खाना पीना होगा।

बाद में बाल विवाह के विरोधी हुए - पर बाद में जब बापू ने शादी का मतलब जाना तो वे बाल विवाह के बड़े विरोधी हो गए। 1885 में जब मोहनदास 16 साल के थे तब पिता करमचंद गांधी स्वर्ग सिधार गए। कीर्ति मंदिर वह जगह है जहां बापू का जन्म हुआ और उनका बालपन यहां गुजरा। 


कहां ठहरें - पोरबंदर रेलवे स्टेशन से कीर्ति मंदिर दो किलोमीटर दूर है। अगर पोरबंदर जा रहे हैं तो वहां एमजी रोड पर होटल नटराज में ठहर सकते हैं। इसके बगल में मून पैलेस भी किफायती होटल है।

कैसे पहुंचे - पोरबंदर गुजरात का एक छोटा सा समुद्र तटीय शहर है। पोरबंदर आने के लिए दिल्ली और अहमदाबाद से सीधी रेलगाड़ियां उपलब्ध हैं। कई शहरों से विमान सेवा भी है। पोरबंदर रेलवे स्टेशन से कीर्ति मंदिर की दूरी दो किलोमीटर के आसपास है। बापू का घर शहर के मुख्य बाजार में ही स्थित है। अगर आप रेलवे स्टेशन की तरफ से आ रहे हैं। तो मुख्य बाजार के चौक पर दाहिनी तरफ मुड़ेकीर्ति मंदिर नजर आ जाएगा।
बापू के घर कीर्ति मंदिर में पहली मंजिल पर अनादि। ( मई 2013)
पोरबंदर में और  क्या-क्या  देखें - पोरबंदर में बापू के घर कीर्ति मंदिर के अलावा कस्तूरबा का घरसुदामा जी का मंदिरचौपाटीसमुद्र तटकथावाचक रमेश भाई ओझा का आश्रम ( संदीपनी आश्रम ) देखा जा सकता है। पर चलिए पहले चलते हैं अब बा के घर। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( ( BAPU, KIRTI MANDIR, PORBANDAR, BIRTH PLACE ) 

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