Wednesday, May 22, 2013

अक्षर ज्ञान से दूर पर बा विदूषी महिला थीं


बापू की पत्नी बा भले ही अक्षर ज्ञान के लिहाज से ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थीं। पर वे बौद्धिक स्तर पर महान विदूषी महिला थीं। बापू के जीवन में उनका बहुत बड़ा प्रभाव था। बापू को महान बनने में उनका बहुत बड़ा त्याग भी था। उन्होंने न सिर्फ कदम कदम पर बापू का साथ दिया। बल्कि कई बार बापू के तानाशाही आदेशों को स्वीकार भी किया। 

काठिवाड़ में उस जमाने में लड़कियों को कोई पढ़ता ही नहीं था इसलिए बा भी पढ़ी लिखी बिल्कुल नहीं थीं। पर शादी के बाद बापू ने अलग अलग समय में बा को पढ़ाने की कोशिश की। तब बा गुजरात में लिखना पढ़ना सीख गई थीं। पर बापू बा के विद्वता और मानसिक स्तर की बहुत तारीफ करते हैं। वे लिखते हैं कि अगर मौका मिला होता तो बा पढ़ने के बाद उच्च कोटि की विदूषी महिलाओं में गिनी जातीं।

शादी के बाद बा और बापू के बीच अक्सर  विवाद होते थे। बापू के एक अपनी बात मनवाने वाले पति के तौर पर व्यवहार करते पर धीरे-धीरे बा समझ गईं कि बापू किस मिट्टी के बने हैं। इसके बाद बा ने खुद को सामंजित किया और बापू के सामाजिक जीवन में उनकी बहुत बड़ी सहयोगी बनकर उभरीं। अपने आखिरी दिनों तक वे बापू के सुख दुख का ख्याल रखने में लगी रहीं। इससे बापू को अपने सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने में काफी सुविधा हुई।

बा पर कुछ पुस्तकें – हिंदी और गुजराती में कुछ किताबें कस्तूरबा गांधी पर केंद्रित लिखी गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख है वनमाला पारिख और सुशीला नय्यर की हमारी बा। यह गुजराती के अलावा हिंदी में भी उपलब्ध है। दोनों ने बा के साथ लंबा वक्त गुजारा थाइसलिए ये पुस्तकें संस्मरणात्मक शैली में हैं और काफी विश्वसनीय भी हैं। 

नवजीवन प्रकाशन मंदिर की इस पुस्तक में बा के बारे में प्रमाणिक जानकारियां हैं। पहली बार 1945 में प्रकाशित इस पुस्तक को खुद बापू ने भी देखा था और उसकी प्रस्तावना भी लिखी है। मूल रूप से यह पुस्तक वनमाला पारिख का प्रयास है। इस पुस्तक में गांधी जी सचिव रहे प्यारे लाल की बहन सुशीला नय्यर ने भी सहयोग किया है। पुस्तक में बा का लिखा एक दुर्लभ पत्र भी है जिसमें बा ने खुद को गांधी जी की सहधर्मिणी होने पर गर्व किया है। बा लिखती हैं – मुझे जैसा पति मिला है वैसा तो दुनिया में किसी स्त्री को नहीं मिला होगा। मेरे पति के कारण ही मैं सारे जगत में पूजी जाती हूं।

दूसरी पुस्तक बा और बापू को मुकुल भाई कलार्थी ने लिखा है। यह पुस्तक बा और बापू के बारे में संस्मरण के तौर पर है। यह भी नवजीवन प्रकाशन मंदिर से प्रकाशित है। पहली बार प्रकाशन 1962 में हुआ। इसकी प्रस्तावना मगन भाई देसाई ने लिखी है। कुल 175 पृष्ठों की पुस्तक में बा और बापू पर 120 संस्मरण हैं। पुस्तक पढ़ने पर बा और बापू के जीवन के बड़े ही सरल तरीके से चित्रात्मक स्वरूप में दृष्टिपात किया जा सकता है।

गिरिराज किशोर पुस्तक की बा -  कस्तूरबा गांधी पर तीसरी पुस्तक का नाम है- बा। पहला गिरिमिटिया लिखकर चर्चित हुए गिरिराज किशोर की यह नई पुस्तक आई है – बा। यह पुस्तक भी उपन्यास शैली में लिखी गई है। मतलब इसमें कल्पनाशीलता का भी सहारा लिया गया है। 

गिरिराज किशोर ने पुस्तक लिखने से पहले बा के जीवन पर गहन शोध किया है। ठीक उसी तरह जैसे पहल गिरमिटिया लिखने से पहले किया था।  दरअसल गिरिराज किशोर राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 'बाउपन्यास के रूप में कस्तूरबा गांधी को लेकर आए हैं। इसमें गांधी जैसे व्यक्तित्व की पत्नी के रूप में एक स्त्री का स्वयं अपने और साथ ही देश की आजादी के आंदोलन से जुदा दोहरा संघर्ष देखने को मिलता है।  पुस्तक 600 रुपये की है। हार्ड बांड में संस्करण में प्रकाशित है। इसका अंग्रेजी संस्करण भी आ चुका है। इसका हिंदी से अंगरेजी अनुवाद मनीषा चौधरी ने किया है। मुझे एक अंग्रेजी लेखिका की पुस्तक भी बा पर मुझे देखने को मिली पर उसकी जानकारियां ज्यादा भरोसेमंद नहीं हैं।
- विद्युत प्रकाश मौर्य  - vidyutp@gmail.com 
( KASTURBA GANDHI, KAPADIA, BA HOUSE, PORBANDAR )
पोरबंदर में बा के घर की दीवारें। 


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