Saturday, April 27, 2013

देश की समृद्ध विरासत देखें –नेशनल म्यूजियम में

नई दिल्ली के जनपथ पर स्थित नेशनल म्यूजियम में भारत का दमकता हुआ इतिहास देखा जा सकता है। आप पूरा देश नहीं घूम सकते तो इस संग्रहालय के नायाब संग्रह को जरूर देखने पहुंचे। देश की अनमोल विरात को देखना एक सिनेमा के टिकट से भी सस्ता  है। अगर आप पूरे संग्रहालय को विस्तार से देखना चाहते हैं तो पांच से छह घंटे लग सकते हैं।

दिल्ली के जनपथ पर स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय देश के इतिहास और संस्कृति के समझने के लिए बेहतरीन जगह है। तीन मंजिल वाले इस संग्रहालय को पूरी तरह देखने की बात करें तो दिन भर का समय लग जाता है।

दो लाख से ज्यादा संग्रह - नेशनल म्यूजियम की शुरुआत 15 अगस्त 1949 को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में हुई थी। यहां की कलाकृतियों को सबसे पहले बर्लिंगटन हाउस लंदन में प्रदर्शित किया गया था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने वर्तमान स्थल पर विशाल संग्रहालय बनाए जाने की आधारशिला 12 मई 1955 को रखी। पांच साल बाद जनपथ पर 18 सितंबर 1960 को यह संग्रहालय जन समान्य के लिए खोला गया। आज की तारीख में इस संग्रहालय में कुल दो लाख से ज्यादा संग्रह हैं।


पांच हजार साल का इतिहास - यहां पर देश के पांच हजार साल के इतिहास को देख और समझ सकते हैं। संग्रहालय परिसर में प्रवेश करते ही आपका साक्षात्कार देश की समृद्ध विरासत से होता है। संग्रहालय भवन के मुख्य द्वार के सामने सम्राट अशोक के गिरनार अभिलेख की प्रतिकृति देखी जा सकती है। इस अभिलेख में सम्राट अशोक ने बिना किसी भेदभाव के प्रजा के कल्याण की बात कही है। 

यहां पर सम्राट अशोक की राजाज्ञाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। आइए अब टिकट लेकर अंदर की ओर चलते हैं। आप चाहें तो गाइडेड टूर का भी लाभ उठा सकते हैं। 


सिंधु घाटी सभ्यता का संग्रह - संग्रहालय का भवन तीन मंजिला है। प्रवेश करने वाले दर्शक आधार तल से घूमना आरंभ करते हैं। तमाम प्राचीन मूर्तियों से होकर गुजरते हुए सबसे पहले आप हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की वीथिका में पहुंचते हैं। यहां पर हड़प्पा, मोहनजोदाड़ो के अलावा हडप्पा कालीन दूसरे नगरों की खुदाई से प्राप्त वस्तुओं का संग्रह है। खासतौर पर मिट्टी के बने आभूषण और अन्य उपयोग की जाने वाली वस्तुएं। यहां लोथल, कालीबंगा, धौलावीरा जैसे हड़प्पाकालीन नगरों की भी जानकारी देखी जा सकती है। आपको पता है यहां पर सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी कुल 3800 कलाकृतियों का संग्रह है। 
दूसरी सदी में गांधार से प्राप्त बुद्ध की प्रतिमा 


बौद्ध कला वीथिका – नेशनल म्यूजिम का प्रमुख आकर्षण बौद्ध कला वीथिका है। यहां पर पिपिहरवा जिला सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश से प्राप्त पांचवी और चौथी शताब्दी ईस्वी पूर्व के संग्रह को प्रदर्शित किया गया है। वैसे पूरे संग्रहालय में आप अनेक बुद्ध मूर्तियां देख सकते हैं तो अलग अलग स्थलों से प्राप्त की गई हैं। दुनिया के अलग अलग देशों से प्राप्त बुद्ध मूर्तियों को भी यहां पर प्रदर्शित किया गया है।

17 हजार चित्रों में विरासत - बौद्ध कला वीथिका से आगे बढ़ने के बाद आपको प्राचीन काल से लेकर मुगलकाल तक का इतिहास मूर्तियों में नजर आएगा। संग्रहालय में पेटिंग, आभूषणों का भी विशाल संग्रह है। चित्रकला की बात करें तो यहां पर 17 हजार से ज्यादा चित्रों का संग्रह है। इसमें मुगल, दकक्न, पहाड़ी, राजस्थानी शैली के चित्र हैं।




लिपियों का इतिहास, सिक्कों का संग्रह - यहां पर आप भारतीय लिपियों के इतिहास को भी देख और समझ सकते हैं। पहली और दूसरी मंजिल पर आप अलग अलग समय से वस्त्रों का संग्रह, अलग अलग राजाओं द्वारा चलाए गए सिक्कों का संग्रह देख सकते हैं। संग्रहालय में नौसेना के इतिहास की भी एक गैलरी है, यह हमारी नौ सेना के बारे में जानने के लिए बेहतरीन जगह हो सकती है। 

खुलने का समय – यह संग्रहालय सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। हर सोमवार और राष्ट्रीय छुट्टियों के दिन यह बंद रहता है। प्रवेश टिकट 20 रुपये का है।
तंजौर पेंटिंग का एक नमून देखिए..

दर्शकों को सुविधाएं -  अगर आपको आडियो गाइड की सेवा चाहिए तो वह शुल्क देकर उपलब्ध है। वैसे आप संग्रहालय की तमाम दीर्घाओं को बिना गाइड के भी देख सकते हैं। अगर आपके पास बड़ा बैग है तो क्लाक रूम की सुविधा भी यहां पर उपलब्ध है। संग्रहालय परिसर में पेयजल, शौचालय आदि का इंतजाम है। यहां एक कैंटीन भी है, जहां आपको भोजन और नास्ता मिल सकता है।
मौर्य काल में भी हुआ करती थी नौ सेना। 

कैसे पहुंचे-  नेशनल म्यूजियम दिल्ली के कनॉट प्लेस से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दिल्ली पर्यटन की हो हो बस सेवा भी यहां पर रुकती है। यहां पहुंचने के लिए निकटतम मेट्रो स्टेशन केंद्रीय सचिवालय या जनपथ हो सकता है। डीटीसी की तमाम बसे नेशनल म्यूजियम से होकर गुजरती हैं। 
 
: विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com

( DELHI, NATIONAL MUSEUM, JANPATH )

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