Friday, March 8, 2013

आखिर क्यों खाते हो इतनी मिर्ची


आखिर हम मिर्ची क्यों खाते हैं। हमारे भोजन में मिर्ची खाना कितना जरूरी है। जर्मनी के माइकेल को भारत से बहुत लगाव है। वे 23 साल से भारत आ रहे हैं। पर वे दिल्ली में ज्यादा मिर्ची वाले खाने से बहुत परेशान हैं। कहते हैं मिर्ची खाने के स्वाद को बिगाड़ देती है। तेज मिर्ची वाला खाना खाकर पेट खराब हो जाता है। वे कहते हैं हिंदुस्तान में मिर्ची को पुर्तगाली लेकर आए थे 15वीं सदी में। उससे पहले तो देश में सिर्फ काली मिर्च की खेती होती थी।
 दिल्ली के कनाट प्लेस में खादी भंडार में मसाले खरीदते हुए मेरी मुलाकात माइकल से होती है।  माइकल बताते हैं कि वे पूर्वोत्तर को छोड़कर देश का कोना-कोना घूम चुके हैं। उन्हें दक्षिण भारत का खाना खूब पसंद आता है। खास तौर पर कर्नाटक का समुद्र तटीय इलाका खूब पसंद आया। वहां वे महीनों कमरे किराए पर लेकर रहे। हिमाचल प्रदेश के ठंडा वातावरण भी खूब पसंद आया। माइकेल ने सस्ते ढाबों और अच्छे होटलों में भी खूब स्वाद लिया है। लेकिन वे दिल्ली के होटल रेस्टोरेंट और ढाबों के खाने से बहुत परेशान है। खाने में इतने मसाले होते हैं कि आप रोज नहीं खा सकते। लिहाजा वे दिल्ली में होते हैं तो अक्सर खुद बनाने का उपक्रम करते हैं। वे कहते हैं दिल्ली में बीच के लोगों के लिए खाने के विकल्प कम हैं।

अमीरों के लिए महंगे रेस्टोरेंट हैं।गरीबों के लिए फुटपाथ पर स्ट्रीट फूड है पर बीच के लोगों के लिए अच्छे विकल्प मौजूद नहीं हैं। उनका कहना है कि थोड़े पैसे में अच्छा खा लेना अब महंगा हो गया है।

माइकेल बहुत अच्छी हिंदी बोलते हैं। पूछा कैसे सीखी इतनी अच्छी हिंदी। वे कहते हैं लोगों से बातें करते करते। हिंदी में बातें करके वे हिंदी प्रदेशों में काम चला लेते हैं। वे जर्मनी में जंगलों में काम करते हैं। वहां से जब थोड़ी कमाई हो जाती है, तब वे योजना बनाते हैं और भारत घूमने आ जाते हैं।
पिछले 23 साल से हर साल आम आदमी की तरह भारत में घूमने का नशा छाया है। हर जगह जहां जाते हैं देशी चीजों की तलाश में रहते हैं। खास तौर पर खाने पीने की रेसिपी। वे बड़ी रोचक बातें बताते हैं। अपनी एक यात्रा के बारे में बताते हैं कि जब कर्नाटक में रह रहा था तो पत्थर की ओखली में खुद चटनी बनाकर खाया करता था।
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( RED CHILLI, SPICES OF INDIA, DELHI )