Monday, March 18, 2013

हरिद्वार की तीन देवियां - मनसा देवी माया देवी और चंडी देवी


हरिद्वार में श्रद्धालुओं के आस्था के तीन बड़े स्थल हैं। वह हैं मनसा देवी मंदिर, माया देवी मंदिर और चंडी देवी मंदिर। माया देवी का मंदिर हर की पौड़ी पर बिड़ला घाट के पास ही स्थित है।
मनसा देवी मंदिर तक पैदल रास्ते से भी पहुंचा जा सकता है। हरिद्वार के अपर रोड से मनसा देवी मार्ग से होकर पैदल यहां तक पहुंचा जा सकता है। पर हरिद्वार आने वाले सैलानी रोमांचक अनुभव के लिए रोपवे से मनसा देवी तक जाना पसंद करते हैं। रोपवे की ट्राली से हरिद्वार शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण हर की पैड़ी में गंगा स्नान करने के बाद मनसा देवी मंदिर में दर्शन के लिए जाना पसंद करते हैं। वैसे अगर आप मनसा देवी मंदिर रोपवे से जाना चाहते हैं तो रेलवे स्टेशन से हरकी पैड़ी की तरफ थोड़ी दूर चलने पर रोपवे का स्टेशन आ जाता है। यहां से टिकट लेकर मंदिर की ओर प्रस्थान कर सकते हैं।

मनसा देवी शक्ति की देवी दुर्गा का रूप हैं। कहा जाता है कि वे मन की इच्छा पूरी करती हैं। देश में मनसा देवी नाम से दो मंदिर हैं। एक चंडीगढ़ के पास मनी माजरा में और दूसरा हरिद्वार में। हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर गंगा नदी के बगल में छोटी सी पहाड़ी पर स्थित है।  

कहा जाता है कि माता मनसा नागों के राजा नागराज वासुकी की बहन हैं। यह भी मान्यता है कि मां मनसा शक्ति का ही एक रूप है , जो कश्यप ऋषि की पुत्री थी, जो उनके मन से अवतरित हुई थीं इसलिए वे मनसा कहलाने लगीं। मनसा देवी के बारे में यह भी माना जाता है कि मनसा देवी और चण्डी देवी दोनों पार्वती के दो रूप है जो एक दूसरे के करीब रहते है। ऐसा भी माना जाता है कि भगवान शंकर की मन से उभरी एक शक्ति है। मनसा शब्द का प्रचलित मतलब इच्छा है। हरिद्वार के अलावा अपने देश में बंगाल और त्रिपुरा में मनसा देवी के पूजा करने की परंपरा है।

मनसा देवी के इस मंदिर में मां मनसा की दो मूर्तियां है। एक मूर्ति आठ भुजाओं वाली व अन्य मूर्ति के तीन सिर और पांच भुजाएं हैं। मंदिर में आने वाले माता को चुनरी चढ़ाते हैं। प्रसाद के रूप में नारियल चढ़ाने की भी परंपरा है।  

बांधते है मन्नत का धागा - भक्त अपनी इच्छा पूरी करने के लिए मंदिर प्रांगण में स्थित पेड की शाखा पर एक पवित्र धागा बांधते है। जब भक्तो की इच्छा पुरी हो जाती है तो भक्त गण दुबारा आकर उसी धागे को शाखा से खोल देते है।
चंडी देवी मंदिर - मनसा देवी के दर्शन के बाद चंडीदेवी मंदिर जाने के लिए आपको नीचे उतरने पर शेयरिंग में आटो रिक्शा मिल जाएगा। हर की पौड़ी से चंडी देवी मंदिर की दूरी लगभग 4 किलोमीटर है। 


यह मंदिर हिमालय की सबसे दक्षिणी पर्वत श्रृंखला, शिवालिक पहाड़ियों के पूर्वी शिखर पर नील पर्वत के ऊपर स्थित है। हरिद्वार का चंडी देवी मंदिर 1929 में कश्मीर के राजा सुच्चत सिंह द्वारा बनाया गया था।

रोपवे से करें सफर मनसा देवी और चंडी देवी मंदिरों तक पहुंचने के लिए रोप-वे का संचालन किया जाता है। आप चाहें तो दोनों ही मंदिरों के लिए रोपवे का टिकट एक साथ ही खरीद सकते हैं। मनसा देवी और चंडी देवी दोनों ही मंदिरों के लिए रोपवे का संचालन दामोदर रोपवे कंपनी करती है। इसलिए आप दोनों ही मंदिरों के लिए चाहें तो रोपवे मार्ग का संयुक्त टिकट खरीद सकते हैं।

-        विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( MANSA DEVI TEMPLE, HARIDWAR, CHANDI DEVI TEMPLE, ROPEWAY ) 

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