Friday, July 18, 2014

सद्भावना रेल यात्रा के आधार शिविर में ((2))

( पहियों पर जिंदगी-2)

सद्भावना यात्रा का आधार शिविर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास रेलवे स्टेडियम में 28 सितंबर से आयोजित किया गया था। मैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय में स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद एमए में नामांकन ले चुका था। अभी राजाराम मोहन राय छात्रावास में नए कमरे का आवंटन नहीं हुआ था।

तब हाजीपुर के अंदरकिला मुहल्ले में तब मेरा परिवार रहता था। इसी दौरान सद्भवना रेल यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रण मिला। तुरंत फुरंत में हमारी यूनिट से कोई साथी जाने को तैयार नहीं हुआ। अनुज तड़ित प्रकाश के साथ हमने जाने का फैसला किया। दिल्ली जाने वाली किसी ट्रेन में तुरंत आरक्षण मिलना मुश्किल था। हाजीपुर जंक्शन से 26 सितंबर की सुबह बिना आरक्षण के ही हमलोग आम्रपाली एक्सप्रेस में सवार हुए।


बिना आरक्षण दिल्ली का सफर -  साधारण डिब्बे की भीड़ को देखकर उसमें बैठना जान जोखिम में डालने जैसा था। हमलोग एक स्लीपर कोच में घुस गए। रास्ते में टीटीई ने तुरंत उतर जाने को कहा। हमने आग्रह किया कि हम भारतीय रेलवे की ओर से संचालित सद्भावना रेल यात्रा में हिस्सा लेने जा रहे हैं। पर टीटीई महोदय पर कोई असर नहीं पड़ा। हमें सीवान स्टेशन पर ट्रेन से बड़े बेआबरु होकर उतर जाना पड़ा। हमलोग प्लेटफार्म की बेंच पर बैठ गए। निरीह और लाचार से। अब हमें दिल्ली तक पहुंचना मुश्किल लगने लगा। तभी एक व्यक्ति ने हमारी समस्या सुनकर सलाह दी। उन्होंने कहा, थोड़ी देर में साबरमती एक्सप्रेस आएगी। उसमें भीड़ नहीं होगी आप उसमें कानपुर तक आराम से जा सकते हैं। 

नई दिल्ली में सुब्बराव जी का पता। 
सचमुच साबरमती एक्सप्रेस आई तो इसमें भीड़ कम थी। हमें आसानी से जगह मिल गई। इस ट्रेन ने कानपुर जंक्शन तक तो आसानी से पहुंचा दिया। आगे कानपुर से दिल्ली का सफर भी मुश्किलों भरा ही रहा। जिस ट्रेन में दिल्ली के लिए बैठे उसमें भी काफी भीड़ थी। लेकिन नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंचते ही लगा मानो हमने आसमान फतह कर लिया हो। तब तक मैं दिल्ली दो बार आ चुका था। अनुज पहली बार आए थे। दिल्ली में जब पुराने साथियों से मुलाकात होने लगी तो सफर मुश्किलें भूल गए हम। 

सद्भावना यात्रा का आधार शिविर करनैल सिंह रेलवे स्टेडियम में बसंत रोड पर था। बिल्कुल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बगल में ही। शिविर में पहुंचते शुरू हो गया देश भर से आए साथियों से मिलने जुलने का सिलसिला। कुछ नए तो कुछ पुराने। एक अक्टूबर तक 20 राज्यों से 170 युवा साथी तैयारी शिविर में पहुंच चुके थे। शिविर में सुब्बराव जी से पहले दिन मुलाकात नहीं हो सकी। पता चला कि वे थोड़े अस्वस्थ हैं और उनका उपचार रेलवे अस्पताल में चल रहा है। हमलोग उनसे मिलने पास के ही रेलवे अस्पताल में गए। कुछ दिनों बाद वे ठीक होकर शिविर में आ गए।         
----विद्युत प्रकाश मौर्य


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