Thursday, March 28, 2013

कई नामों से जाने जाते हैं ये शहर

एक शहर के नए पुराने दो नाम को लेकर काफी लोग भ्रम में रहते हैं। कई बार एक शहर में कई प्रमुख रेलवे स्टेशन के कारण भी भ्रम की स्थिति बनती है। तो आइए बात करते हैं कुछ ऐसे ही शहरों की।

हैदराबाद और सिकंदराबाद यानी टिवन सिटी। दोनों रेलवे स्टेशन के बीच की दूरी 10 किलोमीटर है। वैसे हैदराबाद के लोग हैदराबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन के नामपल्ली नाम से बुलाते हैं तो सिकंदराबाद का कोई और नाम नहीं है। वैसे हैदराबाद में एक और रेलवे स्टेशन है काचीगुडा जहां कई लंबी दूरी की ट्रेनें रुकती हैं।

केरल में पुराने ऐतिहासिक कालीकट शहर का नया नाम है कोझिकोड। इसी तरह कोचीन का नाम है कोच्चि। लेकिन एरनाकुलम और कोच्चि करीब करीब एक ही शहर हैं। यहां रेलवे स्टेशन का नाम एरनाकुलम साउथ और एरनाकुलम नार्थ है। कोचीन नाम का कोई रेलवे स्टेशन नहीं है। इसी तरह त्रिवेंद्रम का नया नाम थिरुवनंतपुरम है। साथ कोचिवेली रेलवे स्टेशन भी इसी शहर का हिस्सा है। इसी तरह कन्याकुमारी और नगरकोइल आसपास के शहर हैं।

तमिलनाडु के लोकप्रिय पर्यटन स्थल उटी का एक और नाम उदघमंडलम भी है। मद्रास का नया नाम चेन्नई हो गया है। पर तमाम लोग अभी भी मद्रास ही बोलते हैं। कई रेलगाड़ियां चेन्नई के इगमोर स्टेशन से खुलती हैं।

गुजरात में अहमदाबाद और गांधीनगर आसपास के शहर हैं। दोनों शहरों के बीच में 40 किलोमीटर की दूरी है जो लगातार बन रही कालोनियों के कारण खत्म हो चुकी है। इसी तरह गुजरात के लोकप्रिय शहर बड़ौदा का नया नाम वडोदरा है।

बंबई का नाम मुंबई हो गया। जैसे दिल्ली में कनाट प्लेस का नया नाम राजीव चौक है लेकिन काफी लोग उसे संक्षेप में अभी भी सीपी बोलते हैं। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली बिल्कुल मिले हुए शहर हैं। पंजाब में वाघा बार्डर और अटारी एक ही बात है।

गोवा में मडगांव ओर मरगाओ एक ही शहर के नाम हैं। राजधानी दिल्ली से आपको ट्रेन पकड़ी हो तो नई दिल्ली, दिल्ली, सराय रोहिल्ला, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार जैसे चार टर्मिनल हैं जहां से अलग अलग दिशाओं की ट्रेन खुलती है। यूपी की राजधानी लखनऊ। यहां का रेलवे स्टेशन है लखनऊ जंक्शन पर यहां लोक इसे चार बाग कहते हैं। किसी जमाने में लखनऊ जंक्शन के पास खूबसूरत चारबाग हुआ करता था। अब उसकी स्मृति मात्र है। 

बिहार की राजधानी पटना में पटना जंक्शन, राजेंद्रनगर, दानापुर, पटना साहिब जैसे स्टेशन हैं तो अब आने वाले दिनों में पाटलिपुत्र नामक नया रेलवे स्टेशन बन रहा है जो उत्तर बिहार के लिए बनने वाले रेल पुल से जुड़ेगा। उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सोनपुर रेलवे स्टेशन और हाजीपुर के बीच महज छह किलोमीटर का ही अंतर है। अंत में वरुणा और असी नदियों के बीच बसे शहर वाराणसी का नाम तो लेना ही चाहिए जिसे काशी नाम से भी जाना जाता है।
आंध्र प्रदेश के शहर विशाखापत्तनम को अंग्रेजी में वाइजेग बोलते हैं। वहीं यहां वाल्टेयर नामक रेलवे स्टेशन और इसी नाम से रेलवे का एक डिविजन भी है।

-    ---विद्युत प्रकाश मौर्य

Tuesday, March 26, 2013

ताजगी का प्रतीक है पुदीना

छोटे-छोटे हरे हरे पत्ते में गुण बहुत हैं। लोग पुदीना की चटनी बना कर खाते हैं। पुदीना के गुणों के कारण इसके स्वाद वाली कैंडी और च्यूंगम कंपनियां बनाने लगी हैं। पिपरमिंट जैसा शीतलन प्रभाव के कारण इसे कैंडी और सांसों ताजगी के लिए बड़ा अच्छा माना जाता है। कई लोग ताजी पुदीने की पत्ती को चबाते हैं तो कई लोग पुदीने की स्वाद वाली चाय पीना पसंद करते हैं। पुदीना पाचन को आसान बनाते है साथ ही जाड़े की ठंड के कारण होने वाली रक्त की संकुलता से भी निजात दिलाता है। अधिकांश टूथपेस्ट कंपनियां पुदीने के इस गुण का इस्तेमाल करती हैं वहीं इसके अपने विज्ञापनों में भी प्रमुखता से बताती हैं।

पुदीना का बायोलाजिकल नाम मेन्था पिपेरिटा है। पर इसकी लगभग 25 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसकी प्रजातियां यूरोप और एशिया में स्वदेशी हैं। पुदीने का इतिहास बड़ा पुराना है। सदियों से लोग इसका सेवन करते रहे हैं।
लोकश्रुति - एक यूनानी कथा के अनुसार मेंथे नामक एक परी इतनी सुंदर थी कि पाताल लोक का मालिक हैदस उसपर आकर्षित हो गया। हैदस ने मेंथे के साथ अवैध संबंध बना लिए। जब हैदस की पत्नी को इस रिश्ते के बारे में पता चला तो इसने शाप देकर मेंथे को एक छोटे से पौधे के रुप में परिवर्तित कर दिया ताकि लोग उसे पैरों से कुचल सकें। जब हैदस को इसके बारे में पता चला तो उसके जादू को तो वह खत्म नहीं कर सका पर उसने मेंथे को अनूठी खूशबु प्रदान कर दी। अब जब मेंथे को पैरों से कुचला जाता है तो उसकी खूशबु हवा में फैल जाती है।
पुदीने के इस्तेमाल सदियों से सब्जी को स्वादिष्ट बनाने पर और रसोई घर में मसाले के प्रमुख घटक के रुप में किया जा रहा है। जापान के लोग इसके तेल का इस्तेमाल मेंथेनाल बनाने में करते रहे हैं। हीपोक्रेटिस ने इसके बारे में लिखा है कि लोग इसका इस्तेमाल दांतो की सफाई के लिए करते हैं।
पुदीने के कई इस्तेमाल
प्रचीन काल से ही पुदीने के इस्तेमाल मसाले और दवा दोनों के रुप में होता रहा है। दुनिया भर में इससे चाय, शीतल पेय, जेली, सीरप, आइसक्रीम, मुरब्बा और मेमने के व्यंजनों में किया जाता है। रसोई घर में चाट मसाला, हरे पुदीने की चटनी और थाई करी में इसका इस्तेमाल होता रहा है।
पुदीना बहुत सी सब्जियों जैसे नए आलू, टमाटर, गाजर और मटर के साथ आसानी से मिल जाता है। इसकी कटी पत्तियां सलादों को ताजगी प्रदान करती हैं। भारत में ताजे पुदीने की चटनी बिरयानी के साथ परोसी जाती है तो अरब वासी पुदीने की चाय का आनंद लेते हैं।
पुदीना के औषधीय गुण
पुदीना पीड़ानाशक, उद्दीपक और भूख बढ़ाने वाला माना जाता है। पिपरमिंट के निर्माण में मेंथाल का सर्वाधिक प्रयोग होता है। पुदीने का नियमित इस्तेमाल जुकाम, फ्लू और बुखार में फायदेमंद है। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि शिशुएं के लिए हानिकारक हो सकता है। पुदीने के पिपरमिंट का इस्तेमाल च्यूंगम बनाने में होता है जो ताजगी प्रदान करता है।
--- माधवी रंजना
(MENTHA, PUDINA, MINT )