Tuesday, October 8, 2013

पीएम के तौर पर सादगी भरा जीवन था नेहरू का

इसी कमरे में नेहरु जी ने आखिरी सांस ली थी।
आठ फरवरी 1916 को वसंत पंचमी के दिन पंडित जवाहर लाल नेहरु का विवाह कमला कौल ( शादी के बाद में नेहरु बनीं)  के साथ हुआ था। तो आइए चलते हैं तीन मूर्ति भवन जहां पंडित नेहरु ने आखिरी वक्त गुजारा। उनका बेडरूम अध्ययन कक्ष और बैठक देखकर प्रतीत होता है कि वे पीएम के रूप में सादगी भरा जीवन जीते थे। 

तीन मूर्ति भवन के पहली मंजिल पर एक कमरा दिखाई देता है। इसमें एक लकड़ी का सिंगल बेड पड़ा है। 27 मई 1964 इसी कमरे में दिल का दौरा पड़ा और भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू नहीं रहे।  इससे पहले 1963 में उन्हें पहली बार दिल का हल्का दौरा पड़ा था। फिर जनवरी 1964 में उन्हें और कमजोर कर देने वाला दौरा पड़ा। पर 27 मई को तीसरा दौरा पडा जिसमें वे नहीं बच सके।
पंडित नेहरू का अध्ययन कक्ष 
पंडित जवाहरलाल नेहरू 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। आजादी के पहले गठित अंतरिम सरकार और आजादी के बाद 1947 में भारत के प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 को उनके निधन तक वे इस पद पर बने रहे। पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 में इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद के आनंद भवन में उनका बचपन गुजरा तो तीनमूर्ति भवन में आखिरी दिन। ये दो भवन उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
तीन मूर्ति भवन की दो मंजिला इमारत लंबे समय तक देश की सत्ता का केंद्र रही। यहां एक दर्शक के तौर पर पहली मंजिल पर आप नेहरू जी का अध्ययन कक्ष देख सकते हैं। लकड़ी की एक बड़ी समान्य सी टेबल। कमरे में चारों तरफ अलमारियों में किताबें। यहां नेहरू जी देर रात तक अध्ययन करते या फिर किताबें पढ़ते रहते। प्रधानमंत्री रहते हुए भी पढ़ना उनका प्रिय शगल था।
तीन मूर्ति भवन में प्रधानमंत्री का मुलाकात कक्ष 

तीन मूर्ति भवन के इस प्रधानमंत्री निवास का एक और कमरा है उनकी बैठक। ये कमरा आकार में अपेक्षाकृत बड़ा है। इसमें सोफा और पीछे कुछ लंबी लंबी बेंच लगी है। इस कमरे की सजावट भी एक दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के  प्रधानमंत्री निवास के हिसाब से देखें तो सादगी भरी है।


तीन मूर्ति भवन का गोलचक्कर, यहां लगी हैं तीन फौजियों की मूर्तियां..
अटल जी ने दी थी शानदार श्रद्धांजलि- नेहरु के निधन के बाद  भाजपा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जो श्रद्धांजलि नेहरू को दीउसे भी अपने आप में एक यादगार भाषण कहा जा सकता है। वाजपेयी ने कहा, "एक सपना अधूरा रह गयाएक गीत मौन हो गया और एक लौ बुझ गई. दुनिया भर को भूख और भय से मुक्त कराने का सपनागुलाब की खुशबू और गीता के ज्ञान से भरा गीत,और रास्ता दिखाने वाली लौ कुछ भी नहीं रहा। वाजपेयी ने एक बार फिर कहा था- नेहरू से बड़ा डेमोक्रेट मैंने देखा नहीं।
वसंत के मौसम में अगर तीन मूर्ति भवन जाएं तो आपको यहां किस्म किस्म के फूल खिले मिलेंगे। इन फूलों को देखकर आप आनंदित हो उठेंगे। कभी इसी उद्यान से पंडित नेहरू अपने कोट में लगाने के लिए फूल चुना करते थे। तो आइए बात करते हैं फूलों की...
जिंदगी है बहार फूलों की...दास्तां बेशुमार फूलों की...
तुम क्या आए तसव्वुर में..आई खुशबू हजार फूलों की।
- विद्युत प्रकाश मौर्य