Tuesday, February 26, 2013

लाइट रेल - शाहदरा से सहारनपुर तक का सफर

शाहदरा से सहारनपुर के बीच नैरोगेज नेटवर्क पर कुल 32 रेलवे स्टेशन और हाल्ट हुआ करते थे। इसमें पहला स्टेशन शाहदरा दिल्ली से 6 किलोमीटर आगे यमुना नदी के पार ब्राडगेज रेलवे का पहला स्टेशन है। ब्राडगेज लाइन से बगल में बायीं तरफ नैरो गेज की लाइन मिलती थी। पर ब्राडगेज की पटरी और नैरोगेज की पटरी के बीच ऊंचाई में काफी अंतर था। नैरो गेज लाइन शाहदरा के रामनगर मुहल्ले से लगती थी। शाहदरा बीसवीं सदी के शुरुआत में भी जब लाइट रेलवे आरंभ हुई दिल्ली से अलग एक स्वतंत्र कस्बा था, जहां भरा पूरा बाजार और मंडी हुआ करती थी।

शाहदरा सहरानपुर लाइट रेलवे के स्टेशन
1दिल्ली शाहदरा ( कोड – डीएसए) – पुरानी दिल्ली से छह किलोमीटर दूर दिल्ली का रेलवे स्टेशन है। यह एसएसएलआर का एकमात्र स्टेशन था जो दिल्ली में पड़ता था। इसके बाद यह रेल मार्ग उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाता है।

 2. बेहटा हाजीपुर (12 किमी)- उत्तर प्रदेश में पड़ने वाला गाजियाबाद जिले का छोटा सा ठहराव है।
3. नोली ( 15 किमी) – इस शहर का नाम लोनी है पर स्टेशन का नाम नोली। अब यह गाजियाबाद जिले की एक तहसील है और दिल्ली एनसीआर में आने वाला शहर है।
4.  नूरस्ताबाद (18 किमी) 5. गोतरा (22 किमी)
6. फक्रपुर हाल्ट  (25 किमी ) 7. खेकड़ा ( 28 किमी)
8. अहेरा (35 किमी ) 9 . बागपत रोड (38 किमी) – यहां से बागपत शहर की दूरी 5 किलोमीटर है। यह रेलवे स्टेशन अग्रवाल मंडी में है।
10 . सुजरा (44 किमी पर ) 11. अलावलपुर इद्रीसपुर (48 किमी)
12.  बड़का हाल्ट (51 किमी ) 13 बड़ौत ( 54 किमी पर )- बड़ौत इस मार्ग का प्रमुख रेलवे स्टेशन और बड़ा शहर भी है।
14 बावली हाल्ट (59 किमी) 15 . कासिमपुर खेड़ी ( 63 किमी)
16 भूडपुर (67 किमी) 17.  असरा हाल्ट (71 किमी)
18. एलम हाल्ट (73 किमी)  19. कांधला (79 किमी पर )
20. खन्द्रावली हाल्ट (86 किमी) 21. गुजरां बलवा (89 किमी)

22. शामली (93 किमी पर ) – नैरोगेज रेल मार्ग का सबसे बड़ा ठहराव था। जिला मुख्यालय होने के साथ पुराना औद्योगिक शहर है। यहां स्टीम इंजन के लिए पानी लेने का भी इंतजाम था।

23. सिलावार (100 किमी) 24. हींड (104 किमी )
25. हाहर फतेहपुर ( 108 किमी) 26. थानाभवन (113 किमी)
27. ननौता (129 किमी) 28. सोना अर्जुनपुर (132 )
29. रामपुर मनिहारन (136 किमी)  30. भानुकाला हाल्ट (141 किमी) 31. मानानी (146 किमी) 32. सहारनपुर ( स्टेशन कोड – एसआरई )  

शाहदरा सहारनपुर नैरो गेज - 1973 में ब्राडगेज में बदला 

साल 1970 में जब शाहदरा सहारनपुर नैरो गेज लाइन बंद हो गई तो इसके भविष्य को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही थीं। खास तौर पर इस रेलमार्ग पर कार्यरत स्टाफ के बेरोजगार हो जाने का मुद्दा और लाखों क्षेत्रवासियों के परेशानी का मुद्दा। रेलमार्ग के बंद होने के बाद संसद में सवाल पूछे गए। 1970 मे जनसंघ के सांसद बेनी शंकर बर्मा ने लोकसभा में ये मुद्दा उठाया। सहारनपुर के उद्योगों से जुड़े ट्रेड यूनियन नेताओं ने शाहदरा सहारनपुर लाइन का राष्ट्रीयकरण कर इसे  जल्द चालू करने की मांग की। अगर राष्ट्रीयकरण न हो तो इसे एक सहकारी समिति बनाकर रेल लाइन चलाने का भी विचार आया। इसके साथ ही कर्मचारियों का बकाया भत्ता नहीं देने के लिए कंपनी पर उचित कार्रवाई करने की भी मांग की गई।
स्व . रामचंद्र विकल ( सांसद, पांचवी लोकसभा, बागपत) 
पर बागपत से कांग्रेस पार्टी के सांसद रामचंद्र विकल की ओर से इस लाइन को बड़ी लाइन में बदलवाने के लिए काफी मजबूती से वकालत की गई। उनकी कोशिशें रंग भी लाईं। 1971 के आरंभ में हुए पांचवी लोकसभा चुनाव में बंद पड़ा शाहदरा सहारनपुर लाइट रेलवे बड़ा मुद्दा बन गया था। बागपत से कांग्रेस उम्मीवार क्षेत्र के लोकप्रिय गुर्जर समाज के नेता रामचंद्र विकल ने चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र के लोगों को वादा किया कि वे एसएसएलआर को बड़ी लाइन में बदलवा देंगे। वे चुनाव जीते और जीतने के बाद इंदिरा सरकार में इस रेलमार्ग के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

बागपत, बड़ौत, शामली क्षेत्र के राजनीतिक महत्व के कारण ही तब इस रेल लाइन को ब्राडगेज में बदले जाने पर तेजी से अमल हुआ। विवेक देवराय लिखते हैं - अगर बागपत संसदीय क्षेत्र सन 1970 में इतना अहम नहीं होता तो शायद ही उस वक्त इस लाइन को बड़ी लाइन में बदलने का काम शुरू होता। वास्तव में यह कोई रेलवे का वाणिज्यिक निर्णय नहीं था।


बीस फरवरी 1973 को तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा ने वर्ष 1973-74 का रेल बजट पेश किया था। उनके भाषण में लाइट रेलवे के लिए अलग से एक पूरा हिस्सा रखा था। पर इस पर अमल नहीं हो सका। इससे पहले 1972 में पेश अंतरिम रेल बजट में भी लाइट रेलवे पर काफी बात की गई थी। बजट भाषण में कहा गया कि मार्टिन एंड कंपनी की 1970 में बंद हुई तीन रेलवे नेटवर्क  36 लाख रुपये के घाटे में थीं जिनमें शाहदरा सहारनपुर नेटवर्क भी एक था। वास्तव में इन लाइनों का बंद होना इनकी नियती बन चुका था। आगे के दौर में सड़क परिवहन के विकास ने लाइट रेलवे को खत्म कर दिया। 

नैरोगेज के एलिवेशन पर ही ब्राडगेज
जब इस लाइन को ब्राडगेज में बदला गया तो दिल्ली से सहारनपुर के मार्ग में सारे रेलवे स्टेशन वही रहे जो नैरो गेज के समय में भी थे। ट्रैक का एलिवेशन भी वही रहा। बस सहारनपुर के पास टपरी में एलिवेशन में थोड़ा बदलाव किया गया। नैरोगेज की लाइन टपरी से नहीं गुजरती थी। पर ब्राडगेज को टपरी जंक्शन से जोड़ा गया। 1973 में जब इस मार्ग को बड़ी लाइन में बदला गया तो खेकड़ा रेलवे स्टेशन के नए भवन का उदघाटन करने के लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहां आईं थीं। तब ललित नारायण मिश्रा केंद्र में रेल मंत्री हुआ करते थे।

ब्राडगेज बनने के बाद इस खंड का प्रबंधन अब उत्तर रेलवे के अंतर्गत है। इसे दिल्ली-शामली-सहारनपुर सेक्शन के नाम से जाना जाता है। इस मार्ग पर पैसेंजर, डीएमयू, एक्सप्रेस और मालगाड़ियों का संचालन होता है। इस मार्ग की ज्यादातर रेलगाड़ियों हमेशा यात्रियों से भरी रहती हैं।

शाहदरा सहारनपुर लाइट रेल - खास बातें –

कुल लंबाई – 165 किलोमीटर , आरंभ – 07 मई 1907

बंदी – 1 सितंबर 1970,    ब्राडगेज – 1973

ट्रैक – 762 मिलीमीटर,  दैनिक यात्री - 12,000 

संदर्भ -
9 .Book - Lok Sabha Debates, Volume 46, Issues 16-20, Contributor-India. Parliament. Lok Sabha. Secretariat, Publisher, Lok Sabha Secretariat, 1970
10. BOOK- Indian Railways: The Weaving of a National Tapestry, By Bibek Debroy, Sanjay Chadha, Vidya Krishnamurthi


13. Indian Railways Budget Speech 1971-72 (Interim) by k Hanumanthappa  -  23 MAR 1971

14. The Economic Weekly - Feb 1965 - Annual Number. 

- विद्युत प्रकाश मौर्य

 (SHAHDARA SAHARNPUR LIGHT RAILWAY, MARTIN RAIL, NARROW GAUGE, SSLR-4 )