Sunday, February 24, 2013

शाहदरा -सहारनपुर - रोजाना 12 हजार लोग करते थे सफर

साल 1970 में बंदी से पूर्व शाहदरा सहारनपुर लाइट रेलवे के मार्ग पर हर रोज 12 हजार लोग यात्रा कर रहे थे। ये अलग बात है कि तब ये रेल नेटवर्क घाटे में आ चुका था। साल 1911 तक यह रेल नेटवर्क 1 लाख 37 हजार मील का सफर तय कर चुका था। इसी तरह 1912 में इस नेटवर्क पर 9 लाख 94 हजार 100 लोग सफर तक चुके थे। वहीं 1912 में कुल 1 लाख छह हजार टन माल का परिवहन किया जा चुका था। साल 1913 में एसएसएलआर नेटवर्क हर साल 10 लाख यात्रियों को ढो रहा था। वहीं एक लाख टन से ज्यादा माल की सालाना ढुलाई हो रही थी। इस रेल नेटवर्क पर रेलवे को मुख्य कमाई माल ढुलाई से हो रही थी। जो हर साल बढ़ रहा था। 

इस मार्ग पर पैसेंजर ट्रेनें और मालगाड़ियां दोनों ही संचालित की जाती थीं।मालगाड़ियों से मुख्य रुप से गन्ने और चीनी का परिवहन किया जाता था।एसएसएलआर नेटवर्क का संचालन कार्यालय मुख्य रूप से सहारनपुर शहर में स्थित था। मार्टिन एंड बर्न का मुख्यालय कोलकाता में था। इसका एक आपरेशन दफ्तर दिल्ली के जनपथ मार्ग पर प्यारे लाल भवन में भी था। तब सहारनपुर में इंडियन टूबैको कंपनी हुआ करती थी। 1930 के दशक में मार्टिन एंड कंपनी छोटे से शहर सहारनपुर में लोगों को रोजगार देने वाली बड़ी कंपनी थी। 
हंसले द्वारा 1907 में निर्मित कलेक्टर टैंक लोकोमोटिव। 

एसएसएलआर का लोकोमोटिव और रोलिंग स्टॉक
एसएसएलआर के पहले आठ लोकोमोटिव 2-6-2 माडल के स्टीम लोकोमोटिव थे, जो 1907 में हंसले से मंगाए गए थे।  इसके बाद 2-6-4 श्रेणी के शाडा क्लास के लोकोमोटिव मंगाए गए। ये भी हंसले द्वारा निर्मित थे। वहीं इस क्लास के दो लोकोमोटिव का निर्माण 1945-46 में सहारनपुर में ही किया गया। इसके निर्माण के लिए स्पेयर और फ्रेम आदि हंसले से ही मंगाए गए थे।

शाहदरा सहारनपुर मार्ग पर दो लोकोमोटिव मार्टिन के दूसरे नेटवर्क से भी मंगाए गए। इसी क्रम में 0-8-0 श्रेणी का टैंक इंजन को बंगाल के बशीरहाट लाइट रेलवे से 1941 में मंगाया गया था। पर यह साल 1948 में संचालन से बाहर हो गया।  साल 1962-63 में जब बख्तियारपुर-बिहार लाइट रेलवे का संचालन बंद हुआ तो वहां से 0-6-2 श्रेणी के हंसले निर्मित एक लोकोमोटिव को यहां लाया गया। साल 1967 में एसएसएलआर ने कालका शिमला नेटवर्क से सेकेंड हैंड इंजन केसी 524 को भी खरीदा। अपने 63 साल के सेवाकाल में एसएसएलआर के पास इस तरह कुल 22 स्टीम लोकोमोटिव थे। इसके अलावा इस नेटवर्क के पास तीन रेल कार भी थे।

शामली महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन – दिल्ली से 100 किलोमीटर आगे शामली इस मार्ग का प्रमुख रेलवे स्टेशन था। शामली में अपर दोआब शुगर मिल होने कारण का इसका सामरिक महत्व था। शहादरा और सहारनपुर के बीच यह बड़ा रेलवे स्टेशन हुआ करता था। यहां पैसेंजर ट्रेनों का बड़ा ठहराव होता था। यहां पर कोच और लोकोमोटिव के लिए रखरखाव का केंद्र भी बनाया गया था। 

एसएसएलआर बंदी की ओर  - साठ के दशक के आखिरी दिनों में एसएसएलआर को संचालन में काफी घाटा होने लगा था। इसलिए कंपनी ने भारत सरकार को रेलवे लाइन बंद करने के लिए नोटिस दिया। शाहदरा साहरनपुर लाइट रेलवे ने 01 सितंबर 1970 को अपना आखिरी सफर किया। इसी साल मार्टिन की दो और रेलवे लाइनों का संचालन घाटे के कारण बंद हुआ। बंगाल में हावड़ा आम्टा और हावड़ा शियालखल्ला लाइनें भी इसी साल बंद हुईं। बंद होने का मुख्य कारण मार्टिन एंड कंपनी को इन लाइनों से लगातार घाटा होना था।

मार्टिन प्रबंधन ने घोषणा की कि साल दर साल घाटा होने के कारण कंपनियों को तालाबंदी पर मजबूर होना पड़ा। इस दौरान इन इलाकों में सड़क परिवहन की ओर से जबरदस्त प्रतिस्पर्धा मिल रही थी। इन रेलमार्ग के रोलिंग स्टॉकपटरियां और अन्य परिसंपत्तियों का भी उचित रखरखाव नहीं हो पा रहा था। उनकी हालत बहुत बुरी थी और उनके रखरखाव के लिए उचित काफी खर्च की आवश्यकता थी। इन लाइट रेलवे पर यात्री सुविधाओं का स्तर भी भारतीय रेल की तुलना में काफी कमजोर था। 

- विद्युत प्रकाश मौर्य

 (SHAHDARA SAHARNPUR LIGHT RAILWAY, MARTIN RAIL, NARROW GAUGE, SSLR-2) 

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