Tuesday, January 29, 2013

वास्तुकला का बेजोड़ नमूना- हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मसजिद



चारमीनार के पास ही स्थित है हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मसजिद। शहर की सबसे बड़ी इबातगाह। चार मीनार के मुंडेर से भी इस मसजिद का विहंगम दृश्य नजर आता है। मक्का मसजिद सिर्फ हैदराबाद ही नहीं बल्कि देश की सबसे पुरानी और बड़ी मसजिदों में से एक गिनी जाती है। यह पुराने हैदराबाद क्षेत्र में स्थित है। मक्का मसजिद हैदराबाद शहर के विरासत स्थलों में से एक है। 





इस मसजिद का निर्माण 1617 में शुरू हुआ। इसके मीनारों की ऊंचाई 23 मीटर तक है। इसमें 20 हजार लोगों के एक साथ बैठकर नमाज पढ़ने की क्षमता है। हैदराबाद के नवाब मोहम्मद कुली कुतुबशाह ने इस मसजिद का निर्माण सत्रहवीं सदी के अंत में शुरू कराया था। इसका निर्माण 1617 में शुरू हुआ पर यह 1684 में जाकर पूरा हुआ। यानी 77 सालों तक इसका निर्माण कार्य जारी रहा। बीच में कुतुबकुली शाह के निधन के बाद कुछ सालों तक निर्माण बाधित भी रहा।

तो यूं पड़ा नाम मक्का मसजिद -  कहा जाता है कि इसका मुख्य मेहराब मक्का से लाए गए पत्थरों से बना था इसलिए इसका नाम मक्का मसजिद पड़ गया। वहीं कुछ लोग कहते हैं कि इस मसजिद के निर्माण में नींव के लिए मिट्टी मक्का से लाई गई थी। कहते हैं कि हैदराबाद के निजाम ने इस मसजिद के निर्माण में खुद भी कार सेवा की थी। मतलब की खुद भी निर्माण में श्रमदान किया था। 

एक ही विशाल स्लैब का इस्तेमाल -  इस मसजिद के विशाल स्तंभ और मेहराब ग्रेनाइट के एक ही स्लैब पर बनाए गए हैं। इस विशाल आकार के पत्थर को यहां तक लाने में ही पांच साल लग गए थे। इसके निर्माण में कुल 8000 राज मिस्त्री और मजदूर लगाए गए थे। पत्थर की बनी यह मस्जिद अपने स्थापत्य और वास्तुकला में बेजोड़ है। इसके पास ही असफजाही में हैदराबाद के नवाबों की कब्र देखी जा सकती है। 

2007 का वह मनहूस दिन - 18 मई 2007 का वह मनहूस दिन था जब हैदराबाद की इस ऐतिहासिक मसजिद के पास बम धमाका हुआ। यह एक आतंकी हमला था। वजुखाने के पास हुए धमाके मे 16 लोग मारे गए थे। इसके कारण मक्का मसजिद कई साल तक खबरों की सुर्खियों में बना रहा। यह संयोग है कि साल 2007 के मई महीने में मैं हैदराबाद में इनाडु टीवी चैनल में कार्यरत था। तब इस हमले की दिन रात रिपोर्टिंग हो रही थी। 


मक्का मसजिद के आसपास के बाजारों में आप पुराने हैदराबाद शहर की रिवायतों को खूब महसूस कर सकते हैं। बुरके में जाती महिलाएं। उर्दूदां हिंदी मे बातचीत करते लोग। शाम के समय तो इन बाजारों में खूब रौनक रहती है। 

कैसे पहुंचे - मक्का मसजिद पहुंचने के लिए आप हैदराबाद में कहीं से भी चारमीनार इलाके में पहुंच सकते हैं। चार मीनार के बगल में ही मक्का मसजिद का विशाल परिसर स्थित है। सिटी बसें भी इस क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। नगर के किसी भी इलाके से आपको चारमीनार के लिए बसें मिल जाएंगी। आप आटो रिक्शा से भी इस इलाके में पहुंच सकते हैं।

मक्का मसजिद इबादत करने वालों के लिए सुबह 4 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक खुला रहता है। मक्का मसजिद के आसपास हैदराबाद की और भी पुराने विरासत की इमारते हैं। आसपास में आप चौमहला पैलेस, लाद बाजार आदि देख सकते हैं। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( MUCCA MASJID, HYDRABAD, OLD CITY, SOUTH INDIA IN SEVENTEEN DAYS 74 ) 

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