Tuesday, August 11, 2015

महादेव का मोहक मंदिर - नया काशी विश्वनाथ मंदिर , बीएचयू


वाराणसी में दो काशी विश्वनाथ मंदिर हैं। एक पुराना तो दूसरा नया। पुराने काशी विश्वनाथ मंदिर से नौ किलोमीटर आगे काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में नया काशी विश्वनाथ मंदिर बनाया गया है। यह मंदिर बीएचयू परिसर के बीचों बीच स्थित है। 
25 एकड़ का विशाल परिसर - कुल 25 एकड़ परिसर में बना ये मंदिर भव्य है। इसका गुंबद 252 फीट ऊंचा है। इसका गुंबज ऊंचाई के मामले में गोल गुंबज बीजापुर के बाद दूसरे नंबर आता है। मंदिर पूरी तरह संगमरमर पत्थरों से बना है। मंदिर की आंतरिक सज्जा अत्यंत मोहक है। मंदिर दो मंजिलों में निर्मित है। 

35 सालों में हुआ निर्माण-  इस मंदिर का निर्माण कार्य मार्च 1931में आरंभ हुआ। करीब 35 वर्ष बाद 1965 में निर्माण कार्य पूरा हुआ। पर तीन दशक में अनुपम मंदिर बनकर तैयार हो गया। इस मंदिर की पहली मंजिल पर दीवारों पर लगे चित्रमय संसार में भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक देख सकते हैं। यहां देश के प्रमुख संतों का जीवन और उनके कार्यों का परिचय दिया गया है। वास्तव में इस मंदिर की संकल्पना देश की संस्कृति से परिचित कराने की है। 

इस मंदिर के निर्माण में दरभंगा महाराज और बिड़ला परिवार का सबसे बड़ा योगदान रहा है इसलिए कुछ लोग इसे बिड़ला मंदिर के नाम से भी जानते हैं। मंदिर परिसर काफी हरियाली है। इसलिए इसके लॉन में टहलना काफी अच्छा लगता है। मंदिर परिसर में यज्ञशाला भी है। मुख्य द्वार के दोनों तरफ खाने पीने की और पूजन सामग्री की दुकाने हैं। मंदिर के पीछे के क्षेत्र में विशाल बागीचा है। 
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र यहां अक्सर विचरण करते हुए दिखाई दे जाते हैं। इस मंदिर के ठीक सामने बीएचयू की सेंट्रल लाइब्रेरी स्थित है। यह देश की तीसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी में शुमार है।  

पूरी श्रीमदभागवत गीता दीवारों पर - बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर की दीवारों पर पूरी श्रीमदभागवत गीता संगमरमर पट पर उकेरी गई है। इस मंदिर का निर्माण काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रेरणा से हुई है। वाराणसी आने वाले सैलानी और श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं।

महाशिवरात्रि के समय और सावन के महीने में मंदिर में पूजा करने वालों की काफी भीड़ उमड़ती है। तब न सिर्फ विश्वविद्यालय के छात्र बल्कि आसपास के गांव से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस दिन यहां मेले जैसा माहौल होता है।

महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़-  साल के शेष दिनों में मंदिर में ज्यादा भीड़ नहीं होती है। इसलिए यहां पूजा करने और ध्यान करने के लिए श्रद्धालुओं के पास बड़ा ही मनोरम वातावरण मिलता है। हर रोज दर्जनों सैलानियों की बसें इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचती है। इसमें बड़ी संख्य दक्षिण भारत से आए सैलानियों की होती है।

खुलने का समय - नया काशी विश्वनाथ मंदिर सुबह छह बजे से रात्रि नौ बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। मंदिर में प्रवेश पूर्वी द्वार से होता है। मंदिर के पिछले द्वार से भी पदयात्री प्रवेश कर सकते हैं।

कैसे पहुंचे - वाराणसी रेलवे स्टेशन से लंका यानी बीएचयू के मुख्य गेट पर पहुंचिए। इसके लिए सार्वजनिक वाहन मिल जाते हैं। बीएचयू गेट से विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने के बाद करीब डेढ़ किलोमीटर चलने पर विश्वनाथ मंदिर के परिसर में पहुंचा जा सकता है। इसके लिए आटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा आदि उपलब्ध रहते हैं। मंदिर के आसपास पार्किंग के लिए प्रयाप्त स्थल उपलब्ध है। दिन में यहां हमेशा बड़ी संख्या में टूरिस्ट बसों की जमघट दिखाई देती है।
बीएचयू विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद हमलोग चल पड़े संकट मोचन हनुमान मंदिर की ओर।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 
( VARANASI, BHU, KASHI,  VISHWANTH TEMPLE, COLORS OF BANARAS ) 
काहिविवि के विश्वनाथ मंदिर परिसर में ( मई 2009 ) 
देश में कहां कहां हैं 12 ज्योतिर्लिंग
1. सोमनाथ ( गुजरात)
2. श्री मल्लिकार्जुन स्वामी ( करनूल, आंध्र प्रदेश)
3. महाकालेश्वर ( उज्जैन, मध्य प्रदेश )
4. ओंकारेश्वर (खंडवा, मध्य प्रदेश )
5. केदारनाथ (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड )
6. भीमाशंकर (मंचर, पुणे, महाराष्ट्र)
7. काशी विश्वनाथ (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
8. त्र्यंबकेश्वर (नासिक, महाराष्ट्र)
9. वैद्यनाथ (देवघर, झारखंड)
10. नागेश्वर (द्वारका, गुजरात)
11. रामेश्वरम (रामनाथपुरम, तमिलनाडु)
12. घृष्णेश्वर मंदिर (औरंगाबाद, महाराष्ट्र)

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