Wednesday, December 12, 2012

मेट्टुपालियम से ऊटी - वह हरियाला सफर


सालों से दिल में तमन्ना संजोए थे हम कि कभी मेट्टुपालियम से ऊटी तक का सफर नीलगिरी माउंटेन रेल से करेंगे। हमलोग कोयंबटूर से मेट्टुपालियम तक पहुंच चुके थे लोकल ट्रेन का सफर करके। पर सुबह के 10 बज रहे थे। तो ऊटी वाली पैसेंजर ट्रेन तो सुबह में ही चा चुकी थी। तो अब एक दिन मेट्टुपालियम में गुजराने का वक्त नहीं था। तो हमने मेट्टुपालियम नीलगिरी माउंटेन रेलवे के स्टेशन, रॉलिंग स्टॉक, यार्ड आदि का अच्छी तरह मुआयना किया। थोड़ी भूख लगी थी तो हमने यहां पर एनएमआर की कैंटीन में लेमन राइस खाया। महज 12 रुपये में। स्वाद भी काफी अच्छा था। 

अब हमलोग रेलवे स्टेशन से बाहर निकले। एक टैक्सी वाला प्रति सवारी 200 रुपये ऊटी ले चलने की बात कर रहा था। पर हमने सोचा बस से सस्ते में चल पड़ेगें। सो हमलोग पूछते हुए पास के बस स्टैंड में पहुंच गए।
पर यह क्या बस स्टैंड में ऊटी के लिए कोई बस ही नहीं थी। थोड़ी देर इंतजार के बाद बस आई तो पहले से इंतजार कर रहे सवारियों से भर गई। हमें जगह नहीं मिली। हमारे पास लगेज भी है। बस किसी लोकल बस की तरह ठसाठस भर गई। एक बारगी लगा कि हम उटी पहुंच नहीं पाएंगे। 
तब हमने एक मारूति वैन वाले से बात की। वह 250 रुपये प्रति सवारी पर चलने को तैयार हुआ। यह किराया हमें ज्यादा लग रहा है। पहले टैक्सी वाला 200 मांग रहा था। पर अब कोई विकल्प भी नहीं बचा था।
लिहाजा हमने टैक्सी वाले से सौदा कर लिया। उसकी वैन सवारियों से तुरंग भर गई। और हम चल पड़े उटी के राह पर। थोड़ी देर बाद चढ़ाई वाला सफर आरंभ हो गया। रास्ते में नीलगिरी माउंटेन रेलवे के ट्रैक और कुछ पुल नजर आ रहे थे। पर हमें अफसोस था कि हम चल छैंया छैंया वाली ट्रेन में सवारी नहीं कर पा रहे हैं।  

मेट्टुपालियम समुद्र तल 320 मीटर की ऊंचाई पर है। हरे भरे जंगलों के बीच सैर करते हुए हम 2250 मीटर की ऊंचाई पर  ऊटी लगभग दो घंटे के सफर में पहुंच गए। रास्ते वेलिंगटन, कन्नूर आया। ऊटी पहुंचने पर मौसम काफी बदल चुका है। अच्छी ठंड लग रही है अक्तूबर के महीने में। बारिश ने सर्दी और बढ़ा दी है।  

हमारे मारुति वैन वाले बड़े कुशल ड्राईवर हैं। पहाड़ के चक्करघिन्नी वाले रास्ते पर उन्होंने बहुत अच्छा ड्राईव किया। पर ऊटी पहुंच कर हमारे साथ थोड़ा धोखा किया। हमारा होटल विनायगा इन चेरिंग क्रास के पास ही था। हमने उन्हे बता रखा था कि होटल के पास उतार देना। पर वे हमें बस स्टैंड में ले गए। वहां जाने के बाद कहते हैं कि 200 रुपये और दो तो होटल छोड़ देता हूं। इस बीच हमें होटल वाले को फोन करने पर पता चल गया था कि हमारा होटल तो पीछे पड़े चेरिंग क्रास के पास ही था। हमें टैक्सी वाले की इस ठगी पर बड़ा गुस्सा आया। हमने साफ कहा कि अब तुम्हारे साथ नहीं जाएंगे। हरगिज नहीं। थोड़ी पेटपूजा करने के बाद हमने एक आटो रिक्शा किया और 60 रुपये देकर होटल तक पहुंच गए।
- विद्युत प्रकाश मौर्य

( NMR, NILGIRI MOUNTAIN RAIL, OOTY, TAMILNADU)