Tuesday, November 6, 2012

एर्नाकुलम से तिरुवनंतपुरम की ओर


कोचीन केरल का सबसे बड़ा शहर है। यहां से कई आसपास के जगह जाने के लिए रास्ते बनते हैं। केरल के सबसे खूबसूरत लोकेशन में एक मुन्नार जाने के लिए यहां से टैक्सी या बस ली जा सकती है। मुन्नार की दूरी 140 किलोमीटर के आसपास है। वहीं कोचीन से ही लक्षद्वीप जाने के लिए जहाज जाते हैं। लक्षद्वीप यहां से 22 से 30 घंटे का रास्ता है। लक्षद्वीप जाने के लिए एक हफ्ते का समय निकाल कर चलना चाहिए। 

हमारा अगला पड़ाव है तिरुवनंतपुरम या त्रिवेंद्रम जो केरल की राजधानी है। कोचीन से त्रिवेंद्रम तीन से चार घंटे का रास्ता है। कोचीन से त्रिवेंद्रम जाने के दो रास्ते हैं एक कोट्टयम होकर और दूसरा अलेप्पी होकर। अलेप्पी होकर जाने वाला रास्ता समुद्र तट के साथ का ट्रैक है जबकि कोट्टयम का रास्ता थोड़ा अंदर से और लंबा भी है। हमारी ट्रेन कोट्टयम होकर जाने वाली थी। यह रास्ता समुद्र तट से थोड़ा दूर दूर होकर चलता है। 



दिन में स्लीपर क्लास का टिकट-  हमारा कोचीन से त्रिवेंद्रम की ओर जाने का सफर रेल से शुरू हुआ। दिन के सफर के लिए हमने काउंटर से स्लिपर क्लास का टिकट खरीदा और जाकर एक आरक्षित डिब्बे में बैठ गए। यहां से हमारी ट्रेन थी केरला एक्सप्रेस जो 9.45 बजे एर्नाकुलम साउथ (ERS) से खुलती है दोपहर 2.35 बजे त्रिवेंद्रम ( TVC) पहुंचती है। हालांकि ट्रेन दिल्ली से आ रही हैपर भीड़ काफी कम हो गई है। रास्ते में कोट्टयम, चेंगानूर और कोल्लम जैसे स्टेशन आए। रेलगाड़ी में सहयात्री अच्छे मिले हैं। एक छात्र हैं मेरे सामने जो केरल के बारे में बता रहे हैं। दोपहर बाद सही समय पर ट्रेन ने में केरल की राजधानी थिरुवनंतपुरम पहुंचा दिया।  

वैसे कोचीन से त्रिवेंद्रम जाने के लिए बसों का विकल्प भी मौजूद है। सरकारी के अलावा निजी आपरेटर की बसें भी चलती हैं। लेकिन दक्षिण भारत में रेल में अपेक्षाकृत भीड़ कम होती है। सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन में स्लीपर क्लास का टिकट लेकर स्लीपर कोच में भी छोटी दूरी का सफर किया जा सकता है। इसलिए हमारा दक्षिण में इस तरह का सफर हमेशा आरामदायक रहा। 

त्रिवेंद्रम में रहने के लिए सबसे सस्ते और अच्छे होटल्स स्टेशन के बाहर निकलने पर बाईं तरफ थोडी दूर चलने पर सामने जाने वाली सड़क जिसे मंजलीकुलम रोड कहते हैं। वहां मंजलीकुलम में कई मध्यम दर्जे के होटल और लॉज हैं। 
 त्रिवेंद्रम शहर का ऐतिहासिक ईस्ट गेट। 



त्रिवेंद्रम शहर का दिल ईस्ट फोर्ट गेट - त्रिवेंद्रम का ईस्ट फोर्ट गेट शहर के मध्य में स्थित है। इस कलात्मक गेट को 1891 मे त्रिवेंद्रम के राजा ने बनवाया था। यह राजा के किले का पूर्वी प्रवेश द्वार हुआ करता था। पर शहर के विस्तार के साथ ही अब यह त्रिवेंद्रम शहर के बीचों बीच स्थित हो गया है। अब यह शहर की ह्रदय स्थली है। यहां से आपको शहर के हर हिस्से के लिए बसें मिल जाती हैं। यहां पर केएसआरटीसी का अति व्यस्त बस स्टैंड स्थित है। यह गेट पद्मनाभ स्वामी मंदिर के पास स्थित है। 


 त्रिवेंद्रम में हमारा रात्रि विश्राम एक दिन का ही है। हमारे पास घूमने के लिए आज आधा दिन और कल का आधा दिन का समय है। वैसे त्रिवेंद्रम ऐसी जगह है कि यहां दो दिन से ज्यादा रुककर आसपास के दर्शनीय स्थलों का रूख किया जा सकता है। 
- विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com 

( KOCHIN TO TRIVENDRAM BY RAIL, ERS TO TVC, SOUTH INDIA IN SEVENTEEN DAYS ) 

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