Wednesday, October 31, 2012

इतिहास गाथा सुनाता मैटेनचेरी पैलेस


मैटेनचेरी में 15वीं सदी का बना राजा का किला है। कोचीन के इस किले का निर्माण 1503 में हुआ था। 1538 में इसे और मजबूत स्वरूप प्रदान किया गया। इसे मैटनचेरी पैलेस भी कहते हैं। यह किला कभी पुर्तगालियों का हुआ करता था और यह कोचीन के महाराजा और पुर्तगाली के शासक (जिसके नाम पर इस किले का नाम पड़ा) के बीच हुए सहयोगात्मक गठबंधन का प्रतीक है। वास्तव में इस किले का निर्माण पुर्तगालियों ने करवाया और कोचीन के राजा को ये किला उपहार में सौंपा।

बाहर से ये किला किसी घर की तरह ही दिखाई देता है। लेकिन यह अंदर से काफी भव्य है। लकड़ी की छतें और राज परिवार की तस्वीरों और उपयोग की जाने वाली सामग्री का शानदार संकलन है किले में। 

किले का रख-रखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग करता है। इसका प्रवेश टिकट 5 रुपये का है। मैटेनचेरी पैलेस को भारत सरकार ने 1951 में संरक्षित स्मारक घोषित किया। 
कभी नाम पड़ा डच महल - मैटेनचेरी महल को 1555 में पुर्तगालियों ने राजा वीर केरल वर्मा को दोस्ती के नाते सौंपा। बाद में यह महल डच जो पुर्तगालियों के बाद भारत आए थे उन्हें सौंपा गया। 1663 मे मेैटेनचेरी पर डच लोगों का अधिकार हो गया। बाद में यह किला हैदर अली के अधिकार में आया। उसके बाद यह ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गया। डच दौर में यह महल डच महल कहलाने लगा था। महल में लकड़ी के छत और फूलों की सजावट खास तौर पर आकर्षित करती है। महल में 57 शानदार भित्तिचित्र बनाए गए हैं। दीवारों पर पेंटिंग बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। महल के कमरों में यूरोपीय शिल्प कला देखी जा सकती है।


पेंटिंग में रामायण की पूरी कहानी  - किले में मौजूद इन पेंटिंग में रामायण की पूरी कहानी देखी जा सकती है। यहां पांच चित्र कृष्ण लीला के भी हैं। यहां टीपू सुल्तान का एक दुर्लभ रेखाचित्र भी देखा जा सकता है। महल में भित्तिचित्र 17वीं और 18वीं सदी में बनाए गए हैं। किले का कला शिल्प यहां के राजा वीर केरल वर्मा की कलात्मक अभिरूचि दर्शाता है जिनके नाम पर केरल राज्य का नाम पड़ा। 

किले के अंदर राजघराने का एक मंदिर भी - मैटेनचेरी पैलेस के अंदर एक मंदिर भी है। यह राजघराने का मंदिर है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर लिखा गया है कि भक्तजनों से निवेदन है कि वे लूंगी, बनियान, बारमूडा आदि पहन कर मंदिर में प्रवेश ना करें। साथ में यह भी लिखा है कि प्रवेश केवल हिंदू लोगों के लिए ही है। Admission strictly for Hindus only. यह आदेश देवस्थानम अधिकारी की ओर जारी किया गया है।  ऐसा क्यों किसी चर्च में या किसी मसजिद में तो दूसरे धर्म के लोगो ंको प्रवेश करने से नहीं रोका जाता है। फिर हिंदू मंदिरों में ही ऐसा क्यों किया जाते है। इससे देखा जाए तो हमारे धर्म प्रचार का मार्ग अवरुद्ध ही होता है। 
मेटेनचेरि पैलेस के अंदर आराम के पल।
किले के बगल में ही जेविस ( यहूदी) लोगों का चर्च है और आगे जेविस लोगों की मजार भी है।

खुलने का समय - मेैटेनचेरी पैलेस सुबह 9.45 से दोपहर 1.00 बजे तक खुला रहता है। दुबारा यह दोपहर 2.00 बजे से शाम 4.45 बजे तक खुला रहता है। किला हर शुक्रवार को बंद रहता है। किले के अंदर कैमरा, मोबाइल फोन आदि प्रतिबंधित है। 

--- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( KERALA, FORT COCHI, MATTANCHERRY PALACE,SOUTH INDIA IN SEVENTEEN DAYS ) 


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