Thursday, November 8, 2012

शेषनाग की शैय्या पर विराजमान हैं पद्मनाभ स्वामी

पद्मनाभ स्वामी मंदिर दक्षिण भारत में भगवान विष्णु के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण अराधाना स्थल है। केरल आने वाले श्रद्धालु यहां पूजा करने जरूर पहुंचते हैं। मंदिर में 24 घंटे कड़ी सुरक्षा रहती है। भला क्यों। क्योंकि मंदिर के पास अकूत धन संपदा है।

दुनिया का सबसे अमीर मंदिर - अब ये मंदिर दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है। भगवान विष्णु के इस मंदिर के खजाने में एक लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का पता चला है। हालांकि अभी पांच तहखानों की ही संपत्ति का आकलन हुआ है। सारे तहखानो की संपत्ति का आकलन होने पर इसकी कुल संपत्ति में इजाफा हो सकता है। संपत्ति की लिहाज से ये देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे अमीर मंदिर है।

पद्मनाभ स्वामी म्यूजियम। 
केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम या तिरुवनंतपुरम के बिल्कुल केंद्र में स्थित है पद्मनाभ स्वामी मंदिर। मंदिर की संरचना एक किले की तरह है। मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अभेद्द सुरक्षा कवच से होकर गुजरना पड़ता है। त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित पद्मनाभ स्वामी मंदिर में भगवान विष्णु की शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। माना जाता है कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम को ये नाम भगवान विष्णु के अनंत फन वाले नाग के कारण ही मिला है। आपको पद्मनाभ स्वामी के दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश के लिए खास ड्रेस कोड का पालन करना पड़ेगा। 



मुंडु (धोती) पहन कर ही प्रवेश - मंदिर में पुरुष केवल धोती ( मुंडु) पहन कर ही प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर के बाहर बने काउंटर पर अपने सारे समान लॉकर में जमा कराने के साथ ही आप धोती या तो खरीद सकते हैं या फिर किराये पर ले सकते हैं। महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। सलवार कुर्ता और स्कर्ट-टॉपजींस आदि पहनकर प्रवेश वर्जित है।

इस मंदिर की देखभाल त्रावणकोर का राजपरिवार ही करता है। तिरुपति बालाजी मंदिर की तरह पद्मनाभ स्वामी मंदिर का प्रबंधन सरकारी ट्रस्ट नहीं देखता। मंदिर में मिले अकूत खजाने की देखभाल भी त्रावणकोर का राजपरिवार ही कर रहा है। मंदिर में चप्पे-चप्पे पर आपको सुरक्षागार्ड तैनात मिलेंगे लेकिन इन लोगों का ड्रेस कोड भी मुंडु (धोती) ही है।


पद्मनाभ स्वामी मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है।  महाभारत में जिक्र आता है कि बलराम इस मंदिर में आए थे और यहां पूजा की थी। बताया जाता है मंदिर की स्थापना पांच हजार साल पहले कलियुग के पहले दिन हुई थी। लेकिन 1733 में त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा ने इसका पुनर्निमाण कराया था। मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ और केरल शैली का मिला जुला उदाहरण है। मंदिर का स्वर्ण जड़ित गोपुरम सात मंजिल का, 35 मीटर ऊंचा है। कई एकड़ में फैले मंदिर परिसर के गलियारे में पत्थरों पर अद्भुत नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर के बाहर सरोवर है जिसे पद्मनाभ तीर्थ कहते हैं। 

रोशनी में आलोकित पद्मनाभ स्वामी का मंदिर। 
मंदिर में  दर्शन -  मंदिर में दर्शन का समय सुबह साढ़े तीन बजे से दोपहर 12 बजे तक है। दोपहर में पांच घंटे मंदिर बंद हो जाता है। फिर शाम 5 बजे से 7.20 बजे तक ही दर्शन होता है। इसलिए आप समय का ध्यान रखते हुए ही दर्शन के लिए पहुंचे।  
आप पद्मनाभ स्वामी मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट  
http://www.sreepadmanabhaswamytemple.org/ पर जाकर |ऑनलाइन पूजा भी बुक करा सकते हैं। इसके बाद प्रसाद आपके घर कूरियर से आ जाएगा। 

पद्मनाभ स्वामी की प्रार्थना - 
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् ।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।


-vidyutp@gmail.com 
 ( PADAMNABH SWAMI TEMPLE, KERALA, THIRUVANANTPURAM SOUTH INDIA IN SEVENTEEN DAYS - 16) 

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