Sunday, November 11, 2012

तिरुवनंतपुरम – सुहाना मौसम और लाइट हाउस

पद्मनाभ स्वामी के दर्शन के बाद शाम हो गई है। अक्तूबर महीने में हल्की हल्की बारिश से ने ठंड बढ़ा दी है। बारिश का सामना तो दोपहर में त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन पर ही हो गया था। हमलोगों के पास बारिश से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं तो सामने जाला बाजार में एक दुकान ने विंडचिटर खरीदते हैं। यह बारिश और ठंड दोनों से बचाएगा। ज्यादा रात होने से पहले मंजलीकुलम रोड पर अपने होटल में आकर सो जाते हैं। प्रवीण टूरिस्ट होम के ग्राउंड फ्लोर के कमरे में टीवी नहीं है। पर 400 रुपये प्रतिदिन में कमरा बुरा भी नहीं है। रात को अच्छी नींद आई। अगली सुबह हमारा कार्यक्रम कोवलम बीच जाने का है। सुबह अन्नपूर्णा वेज में नास्ता के बाद हमलोग कोवलम की लोकल बस लेते हैं। पद्मनाभ स्वामी मंदिर कोवलम बीच 15 किलोमीटर के करीब है। हमने देखा कि तिरुवनंतपुरम में लोकल बसों में डबल डेकर बसें भी चलती हैं। ऐसी बसें पहले मुंबई में देखी थीं।

कोवलम बीच पर सुबह में कुछ घंटे मौज मस्ती के यादगार रहे। अगर आपके पास समय हो तो यहां शाम भी गुजारें। यहां पर कुछ महिलाएं फ्रूट सलाद बेच रही हैं। एक प्लेट का रेट पूछा तो बोलीं, तुम्हारे लिए 25 उन विदेशियों के लिए 100 रुपये। वैसे ये ठीक बात नहीं है ना। विदेशी सैलानी हमारे मेहमान हैं। कोवलम बीच पर टहलते हुए अब हमारी इच्छा लाइट हाउस देखने जाने की है। लाइट हाउस दूर से दिखाई तो दे रहा है। पर उसे हम करीब से देखना चाहते हैं।
दरअसल इस लाइट हाउस की सीढ़ियां चढ़कर जब आप ऊपर जाते हैं तो यहां से समंदर और तिरुवनंतपुरम शहर का सुंदर नजारा दिखाई देता है। लाइट हाउस में प्रवेश के लिए टिकट है। ऊपर चढ़ने के लिए सीढ़ियों के अलावा लिफ्ट का भी प्रावधान है। व्यस्कों के लिए के टिकट 20 रुपये का है। हालांकि यह लाइट हाउस बहुत पुराना नहीं है। यह 1972 में 30 जून से काम कर रहा है। लाइट हाउस की ऊंचाई 36 मीटर है।

पर हम लाइट हाउस जाने की सोच ही रहे थे कि कोवलम बीच पर हमें कुछ एजेंट टकरा गए तो किसी रिजार्ट का स्क्रैच कार्ड दिखा रहे थे । कहा स्क्रैच करने पर इनाम निकलेगा। हम उनके चक्कर में आ गए। कहा इनाम पाने के लिए आपको हमारे पास के रिजार्ट में चलना होगा। वहां हमारा एक घंटा बर्बाद हुआ उनका रिजार्ट देखने और उनका मेंबरशिप प्लान समझने में। अंत में हमने उनका प्लान नहीं खरीदा। उन्होंने हमें गोवा के अपने एक होटल का 3 रातें मुफ्त में ठहरने का गिफ्ट वाउचर दिया। हालांकि हम उसका आगे इस्तेमाल नहीं कर पाए। अगर हम इस रिजार्ट को देखने और उनके इनाम के चक्कर में नहीं पड़ते तो लाइट हाउस को करीब से जरूर देख पाते। खैर इस बार न सही अगली बार लाइट हाउस को करीब से देखने की कोशिश करेंगे।
दोपहर होने तक हम जल्दी से फिर बस से वापस अपने होटल पहुंचे। वहां से फटाफट पैकिंग कर रेलवे स्टेशन की ओर चले। क्योंकि हमें कन्याकुमारी जाने वाली ट्रेन लेनी थी।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य
 ( LIGHT HOUSE, TIRUVANANTPURAM, KERALA )