Monday, October 1, 2012

यहां भगवान गणेश के लिए आती है डाक (32)


एक पाती गणेश जी के नाम... राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर के किले के अंदर है प्रसिद्ध गणेश जी का मंदिर। वैसे तो आपने देश में कई गणपति के मंदिर देखें होंगे पर यह मंदिर उन सबसे कुछ अलग है। वैसे गणेश जी प्रथम पूज्य देवता तो हैं ही पर शाादी का पहला कार्ड गणेश जी को... जी हां ऐसा ही तो है...
कहते हैं इस इलाके में कहीं भी कोई शादी-विवाह हो सबसे पहला कार्ड रणथंभौर के गणेश जी के नाम भेजा जाता है। यह शायद देश का एकमात्र मंदिर होगा जहां भगवान के नाम डाक आती है। खासकर राजस्थान के कई जिलों को लोग अपने घर में होने वाले हर मांगलिक आयोजन पर पहला कार्ड यहां के गणेश जी के नाम भेजते हैं। यहां मंदिर में मूर्ति के सामने आपको कई कार्ड पड़े हुए दिखाई दे जाएंगे। लोग पते में लिखते हैं- 
श्री गणेश  जी , रणथंभौर का किला
जिला -  सवाई माधोपुर (राजस्थान)।
यहां का डाकिया बड़े सम्मान से इस डाक को मंदिर में पहुंचा देता है। मंदिर के पुजारी जी इन सभी डाक को भगवान गणेश के चरणों में रख देते हैं। मंदिर में हर रोज भगवान के नाम आने वाली सैकड़ों चिट्ठियों को देखा जा सकता है।
इतना ही नहीं अगर किसी के घर में कोई भी मांगलिक कार्य है लोग गणेश जी को बुलाने के लिए यहां रणथंभौर वाले गणेश जी के नाम कार्ड भेजना नहीं भूलते। वैसे तो गणेश जी देश भर में प्रथम पूज्य देवता माने जाते हैं पर किले के गणेश जी के मंदिर की खास महत्ता है।


तेरहवीं सदी के त्रिनेत्र गणपति - कहा जाता है ये मंदिर 1299 ईश्वी में रणथंभौर के राजा हम्मीर ने बनवाया था। युद्ध के दौरान राजा के सपने में गणेश जी आए और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसके बाद राजा की युद्ध में विजय हुई। इस जीत के बाद उन्होंने किले में गणपति के मंदिर का निर्माण कराया। यहां स्थापित गणेश प्रतिमा के तीन नेत्र हैं , इसलिए इन्हें त्रिनेत्र गणपति भी कहते हैं। 
मंदिर परिसर में गणेश जी उनकी पत्नी रिद्धि और सिद्धि के साथ ही बेटे शुभ-लाभ की स्थापना की गई है। गणेश के वहान मुसिकराज भी मंदिर में विराजमान हैं। हर गणेश चतुर्थी के दिन किले के मंदिर में भव्य समारोह मनाया जाता है और विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
मंदिर परिसर में प्रसाद और मिठाई की दुकानें। 

बुधवार गणेश जी का दिन - सालों  हर बुधवार को गणेश मंदिर में ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते हैं क्योंकि बुधवार को गणेश जी का दिन माना जाता है। इस दिन यहां श्रद्धालु भंडारा भी करते हैं। अक्सर मन्नत पूरी होने पर लोग भंडारा करने आते हैं। 
किले के परिसर में स्थित मंदिर के बगल से गुप्त गंगा नामक छोटी सी धारा बहती है। इसके आसपास पक्षियों का बसेरा देखने को मिलता है जो बड़ा ही मनोरम नजारा पेश करते हैं। किले में पहुंचे वाले सैलानी भी गणपति के दर्शन जरूर करते हैं।

खुलने का समय : मंदिर सुबह से शाम तक खुला रहता है। यहां रात को ठहरने का कोई इंतजाम नहीं है। शाम ढलने से पहले मंदिर से लौट आना होता है। मंदिर के पास पांच सात पूजन सामग्री और प्रसाद की दुकानें भी हैं। 

कैसे पहुंचे: सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से किले के मंदिर तक के लिए जीप चलती है। यह दस सवारियां लेकर जाती है। किले के जीप स्टैंड से मंदिर दो किलोमीटर है। यह दूरी आपको पैदल ही तय करनी पड़ती है। किले में प्रवेश के बाद किसी से पूछ कर गणेश जी के इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं। अच्छी खासी चढ़ाई है इसलिए ज्यादा सामान लेकर न जाएं।

कहां ठहरे : सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन के आसपास होटल ,धर्मशाला और रिजार्ट में ठहर सकते हैं। सबसे सस्ता आवास रेलवे स्टेशन के पास बांगड़ धर्मशाला में उपलब्ध है। रेलवे स्टेशन से मंदिर 17 किलोमीटर दूर है। 

-विद्युत प्रकाश मौर्य Email: vidyutp@gmail.com