Sunday, October 21, 2012

पुष्कर- जगतपिता का एक मात्र मंदिर है यहां


अजमेर में सुबह नास्ते बाद हमलोग पुष्कर के लिए चल पड़े। अजमेर से पुष्कर सिर्फ 12 किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों शहरों के बीच एक पहाड़ी है। पुष्कर में हमारी पहली मंजिल थी जगत पिता ब्रह्माजी का मंदिर। मैं पुष्कर दूसरी बार आया हूं। पूरी दुनिया में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर होने के कारण पुष्कर बड़ा ही महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। पुष्कर तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इसलिए यहां पहुंचने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो आप किसी और दुनिया में पहुंच गए हो। 

भगवान शिव के मंदिर हर गांव शहर में होते हैं। भगवान विष्णु के भी मंदिर होते हैं। लेकिन जगत पिता ब्रह्मा का एक मात्र मंदिर है धरती पर। वह है राजस्थान के पुष्कर में। इसलिए पुष्कर को तीर्थ राज भी कहा जाता है। कहा जाता है देवता अमृत का सेवन कर रहे थे। इस दौरान अमृत का एक टुकड़ा पुष्कर में गिरा और यहां बनाया ब्रह्मा जी ने अपना खुद का मंदिर। वर्तमान में जो मंदिर बना है उसका निर्माण 14वीं सदी में हुआ था। मंदिर मुख्य रूप से संगमरमर के पत्थरों से बना हुआ है। कहा जाता है यह उत्तर भारत का एकमात्र मंदिर है जिसे औरंगंजेब ने नष्ट नहीं किया।
ब्रह्माजी की चतुर्मुख प्रतिमा - इस मंदिर में ब्रह्माजी की चतुर्मुख प्रतिमा है। ब्रह्मा जी के चारों मुख चार दिशाओं में देख रहे हैं। इसके दायीं तरफ गायत्री तो बायीं तरफ सावित्री की प्रतिमा स्थापित है। पास में ही सनकादि और नारद जी की भी मूर्तियां हैं। ब्रह्मा जी की मूर्ति की लाट लाल रंग की है। मूर्ति के साथ उनके वाहन हंस की भी आकृति बनी हुई है। इस मंदिर का निर्माण ग्वालियर के महाजन गोकुल प्राक ने करवाया था। एक और खास बात इस मंदिर में विवाहित पुरुषों को गर्भ गृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।




मंदिर की कथा - मंदिर की एक और कथा है। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने जगत भलाई के लिए यज्ञ करना चाहा। इसके लिए जब वो शुभ मूर्हत आया तो उनकी पत्नी मां सरस्वती ने उन्हें इन्तजार करने को कहा। इससे यज्ञ में विलंब होने लगा। क्रोध में आ कर ब्रह्मा जी ने गायत्री नाम की स्त्री से विवाह कर लिया और उन्हें अपने साथ यज्ञ में बैठाया ताकि समय रहते शुभ मूहर्त में यज्ञ का कार्य पूर्ण हो सके।


सरस्वती जी ने जब अपने स्थान पर दूसरी स्त्री को बैठे देखा तो वे क्रोध में आ गईं और ब्रह्मा जी को श्राप देते हुए कहा कि आपकी धरती पर कहीं भी और कभी भी
  पूजा नहीं होगी। जब उनका क्रोध थोड़ा शांत हुआ तो देवी-देवताओं ने मां सरस्वती को विनय की कि ब्रह्मा जी को इतना कठोर दण्ड न दें।  देवी-देवताओं की बात का मान रखते हुए मां सरस्वती ने कहा कि ब्रह्मा जी का केवल एक ही मंदिर होगा जो पुष्कर में स्थित होगा और वो केवल यहीं पर पूजे जाएंगे। 


मंदिर खुलने का समय - पुष्कर का ब्रह्माजी का मंदिर हर रोज सुबह छह बजे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल जाता है। मंदिर रात तो नौ बजे तक खुला रहता है। दोपहर में डेढ़ बजे से तीन बजे तक मंदिर बंद होता है। सर्दी के दिनों में मंदिर सुबह 6.30 बजे खुलता है और रात्रि मे 8.30 बजे ही बंद हो जाता है।

कहां ठहरें -  मंदिर के आसपास रहने के लिए धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस और कई बजट होटल मौजूद हैं। 
ब्रह्माजी के मंदिर से पहले रास्ते में कई और मंदिर भी हैं। इस मंदिर की गली में सुंदर बाजार है।
कार्तिक में लगता है विशाल मेला-  कार्तिक पूर्णिमा के समय मंदिर के पास विशाल मेला लगता है। तब राजस्थान के दूर-दूर के जिलों से श्रद्धालु पुष्कर आते हैं। वैसे तो पुष्कर में सालों भर रौनक रहती पर मेले के समय रौनक और बढ़ जाती है। तब प्रशासन की ओर से भी यहां खास इंतजाम किए जाते हैं। 

 - विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 
 ( PUSHKAR, BARHMA TEMPLE, AJMER, RAJSTHAN )

2 comments:

  1. पुष्कर में पांच प्रमुख मंदिर हैं, अपेक्षाकृत हाल के निर्माण के बाद से पूर्व की इमारतों को 17th सदी के अंत में मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था। घाटों के रूप में जाने वाले कई स्नानागार, झील के चारों ओर और तीर्थयात्रियों ने शरीर और आत्मा दोनों की सफाई के लिए पवित्र जल में डुबकी लगाई।

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