Friday, September 28, 2012

सरसों यानी पीला सोना (29)

( चंबल 29) 
पूरे चंबल इलाके में सरसों की खेती होती है। पीली पीली सरसों यानी पीला सोना। कहते हैं कि चंबल इलाके में देश की बेहतरीन किस्म की सरसों की खेती होती है। इसलिए मुरैना इलाके का सरसों का तेल काफी शुद्ध माना जाता है। सरसों इलाके की नकदी फसल है। पानी की कमी है इसलिए खेतों से कई फसलें उगा पाना मुश्किल है। इसलिए लोग दिल से सरसों की खेती करते हैं। बाकी समयमें गांव के लोगों के पास काम की कमी रहती है। गांव के लोगों के पास सरसों की खेती से नकदी आती है। गांव के लोग इसी नकदी से अपनी बाकी जरूरत की चीजें खरीदते हैं। खाने पीने जरूरत की चीजें पूरी हो गईं तो फिर खरीदते हैं अपने लिए सोना। यानी एक सोना (सरसों ) को बेचकर दूसरा सोना( गोल्ड)

मनोरंजन का साधन टेप रिकॉर्डर -  गांव के लोगों के मनोरंजन का साधन रेडियो और टेप रिकार्डर भी है। लेकिन मजे की बात कि गांव के लोगों को हिंदी फिल्मों के गाने पसंद नहीं आते। सभी गाने गाते हैं अपनी स्थानीय भाषा में। जब भी कोई हिंदी फिल्म का गाना हिट होता है तब उसका राजस्थानी में पैराडी गीत बन जाता है। जैसे ओ मेरी चांदनी चांदनी....की जगह बन गया गीत ओ मेरी जाटणी...जाटणी...


लोग गुनगुनाते हैं राजस्थान के पारंपरिक लोकगीत-मारो रे मंगेतर हरियाणे की अजमेर वाडो रे नवाब जोड़ी रा जवाब नहीं... दूसरा लोकगीत ओ मारो नस नस दूखे पेट....और राजस्थान का सबसे लोकप्रिय लोकगीत पल्लू लटके हो मारो पल्लू लटके...

इनके तमाम लोकगीतों में राजस्थान के शहरों के नाम आते हैं। जैसे कोटा बूंदी बीकानेर सांगनेर आदि। हिंदी फिल्मों को एक और हिट गीत- तू जब जब मुझको पुकारे...मैं चली आउं नदिया किनारे...लेकिन अब यहां के युवक इस गीत को कुछ इस अंदाज में गाते हैं... तू जब जब मुझको पुकारे...मैं चली आउं बोर किनारे....( बोर यानी बोरिंग जहां पानी आता है.. )

-    - विद्युत प्रकाश मौर्य  -vidyutp@gmail.com