Monday, October 22, 2012

मंदिरों का शहर है तीर्थराज पुष्कर

पुष्कर में रंगजी ( भगवान विष्णु ) का मंदिर। 
राजस्थान के छोटे से शहर पुष्कर में आप ब्रह्मा मंदिर के अलावा वराह मंदिरगायत्री मंदिरपाप मोचिनी मंदिरनाग पहाड़आत्मेश्वर मंदिर आदि के भी दर्शन कर सकते हैं। वास्तव में पुष्कर में कई सौ मंदिर हैं। पुष्कर में सावित्री मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए लगभग डेढ़ घंटे की कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ती है। जो लोग चढ़ाई नहीं कर सकते वे नीचे से ही दूरबीन से इस मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। इसके लिए दूरबीन वाले मामूली सा शुल्क लेते हैं। 

गुरुनानक देव जी आए थे पुष्कर - सिख धर्म के पहले गुरु गुरुनानक देव जी भी अपनी उदासी के क्रम में पुष्कर आए थे। उनकी याद में यहां पर गुरुद्वार बना हुआ है। यहां उन्होंने ईश्वर एक है का संदेश दिया था। दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी भी 1706 में पुष्कर आए थे। इसलिए सालों भर सिख श्रद्धालुओं का भी पुष्कर आना जाना लगा रहता है। 

दक्षिण भारतीय रंग जी का मंदिर -  ब्रह्मा मंदिर से पहले पुष्कर में रंग जी का मंदिर पड़ता है। यह दक्षिण भारतीय शैली का मंदिर है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका गोपुरम काफी सुंदर है।


रंगजी के मंदिर को सन 1823 में हैदराबाद के सेठ पूरनमल गनेरीवाल ने बनवाया था। इस मंदिर के निर्माण में द्रविड़मुगल और राजपूताना शैली का मेल दिखाई देता है। पुष्कर मेले के दौरान पुराने रंगजी मंदिर के आगे बड़े बड़े कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुति देते हैं। पुष्कर में एक दिगंबर जैन मंदिर भी है। तो यह तीर्थ नगरी हिंदूसिखजैन सबके लिए पवित्र है। 


राजस्थान की खुशबू -  पुष्कर मिट्टी में खालिश राजस्थान की खुशबू है। चारों तरफ पहाड़ियों से घिरा पुष्कर दुनिया से कुछ अलग सा लगता है। पुष्कर बस स्टैंड से पैदल आगे बढ़ते जाइए। किसी से पूछने की जरूरत नहीं है। बस आ जाएगा ब्रह्मा जी का मंदिर। मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद पुष्कर सरोवर में जाना न भूलें। लोग पुष्कर सरोवर में भी पूजा करके अपने परिवार के लिए उन्नति की कामना करते हैं। यहां पूजा कराने के लिए पंडे सदैव मौजूद रहते हैं।
पुष्कर - बारहवीं सदी के वराह मंदिर की मूर्तियां । 

तो हमलोग भी अब चलेंगे सरोवर की तरफ। पर इससे पहले अनादि को भूख लगी है। वे मिर्च वाली कोई चीज खा नहीं पाते। तो एक दुकानदार से आग्रह कर उनके लिए ब्रेड (पावरोटी) बनवाई है। उन्होंने पेट पूजा कर ली तो हमलोग निश्चिंत हो गए हैं आगे भ्रमण करने के लिए। 

विदेशी सैलानियों का जमावड़ा पुष्कर में सालों भर विदेशी सैलानियों का जमावड़ा लगा रहता है। पहाड़ियों के बीच पुष्कर की बनावट कुछ ऐसी है जो विदेशी सैलानियों को सालों भर आकर्षित करती है। यहां आपको हर रोज दुनिया के कई देशों के लोग मिल जाएंगे। पुष्कर की आबोहवा खास तौर पर विदेशियों को बहुत भाती है। कई विदेशी तो यहां हफ्तों ठिकाना बनाए रहते हैं। इसलिए पुष्कर की दुकानों पर अब दाल बाटी चूरमा ही नहीं बल्कि चाइनीज डिश और मोमोज भी खाने को मिल जाएंगे।

ऊंट की सवारी का मजा लें - जगत पिता के मंदिर के अलावा पुष्कर में कई और मंदिर भी हैं। यहां ऊंट की सवारी का भी आनंद लिया जा सकता है। हर साल सर्दियों की शुरुआत में पुष्कर में मेले का आयोजन होता है। तब पुष्कर में सैलानियों की भीड़ बढ़ जाती है। लेकिन वैसे भी पुष्कर में सालों भर सैलानी पहुंचते हैं। 



कैसे पहुंचे - पुष्कर राजस्थान में जयपुर से तकरीबन 150 किलोमीटर आगे है। पुष्कर पहुंचने के लिए आप कहीं से भी अजमेर पहुंचे। अजमेर में ही आप किसी होटल में अपना ठहराव कर सकते हैं। यहां से पुष्कर महज 13 किलोमीटर है। सिर्फ बसें जाती हैं। पहाड़ी के एक तरफ अजमेर दूसरी तरफ पुष्कर।

हेरिटेज होटल सरोवर - पर अगर आप पुष्कर में रुकना चाहें तो राजस्थान सरकार के सरोवर होटल में ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं। यहां किफायती से लेकर लग्जरी कमरे उपलब्ध हैं। सरोवर होटल दरअसल महाराजा मान सिंह ( 1590-1614 ) द्वारा बनवाया गया महल है, जिसे हेरिटेज होटल में तब्दील कर दिया गया है। इस होटल में रेस्टोरेंट और स्विमिंग पुल भी है। ( संपर्क- 0145-2772040 मोबाइल : 7412086078) 
- विद्युत प्रकाश मौर्य -vidyutp@gmail.com 
 ( PUSHKAR, BARHMA TEMPLE, AJMER, RAJSTHAN ) 

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