Saturday, October 20, 2012

मीणा राजाओं का था आमेर का किला


पहली बार जब जयपुर जाना हुआ था 1998 में तो जयपुर शहर को घूमने की इच्छा थी। इसका सस्ता विकल्प था बस में सीट बुक करके घूमना। तो सिंधीकैंप बस स्टैंड के पास से ही अगले दिन के लिए बस में सीट बुक की। ये मिनी बस सैनी ट्रैवल्स की थी। तकरीबन आधे दिन में जयपुर शहर के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराती है। इसमें हवा महल, जंतर-मंतर, सिटी पैलेस, संग्रहालय, जल महल आदि सूची में होते हैं। पर सबसे प्रमुख है आमेर का किला।

हजारों की संख्या में लोग रोज आमेर के किला को देखने आते हैं। इसमें भारतीय और विदेशी दोनों तरह के सैलानी होते है। आमेर किला उंचाई पर होने के कारण दूर से ही सुन्दर दिखाई देता है। जब आप किले पर चढ़ाई करते हैं तो इसके प्राचीर से आसपास का नजारा भी शानदार दिखाई देता है।

वास्तव में आमेर राजस्थान की राजधानी जयपुर का एक उपनगर है। यह दिल्ली रोड पर है। जयपुर शहर से इसकी दूरी 11 किलोमीटर है। यह जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जो कि पहाड़ी पर स्थित है। आमेर पहले एक शहर हुआ करता था। इसका इतिहास बहुत रोचक और उतार चढ़ाव भरा है। सबसे पहले इसे मीणा राजा आलन सिंह ने बसाया था, कम से कम 967 ईस्वी से यह नगर अस्तित्व में रहा। कहा जाता है इस किले का नाम आंबेर, अंबा माता के नाम पर पड़ा जो मीणाओं की कुल देवी हैं।

आमेर को 1037 ईस्वी में राजपूत जाति के कछवाहा कुल के राजाओं ने जीत लिया था। कछवाहा खुद को राम चंद्र के बेटे कुश का वंशज मानते हैं और सूर्यवंशी क्षत्रिय बताते हैं। वर्तमान आमेर दुर्ग का निर्माण राजा मान सिंह-प्रथम ने करवाया था। आमेर पक्के किले का निर्माण सन 1562 मे शुरू हुआ था इसके बाद कई पीढ़ियो तक इसका निर्माण चलता रहा।  बलुआ पत्थर से बना यह किला राजस्थान के किलों के समूह में यूनेस्को के विश्व विरासत की सूची में भी शामिल है। आमेर के किले के अंदर की चित्रकारी देखने वालों को चकित कर देती है। इसमें हिंदू संस्कृति की सुंदर झलक दिखाई देती है। किले का मुख्य द्वार भगवान गणेश को समर्पित है। किले के अंदर दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, सुख निवास, जय मंदिर आदि प्रमुख हिस्से हैं जिन्हे देखना चाहिए।



अनूठा शीश महल - आमेर किले के अंदर अनूठे शीश महल को बनाया गया है। इसकी सुंदरता का हर कोई अपने अपने तरीके से बखान करता है। शीश महल को सीसे से बनाया गया है। जब भी सूरज क़ी रोशनी इस पर पड़ती है तो किरणों से पूरा हॉल रोशनी से भर जाता है। इससे शीशमहल की सुंदरता कई गुनी बढ़ जाती है। शीशमहल कुल 40 खंबो पर खड़ा है।

आमेर किला और जयगढ़ किले के बीच एक गुप्त रास्ता है जिसकी लंबाई  दो किलोमीटर है। इस रास्ते का इस्तेमाल राजा और उसके परिवार युद्ध  होने पर प्रयोग करते थे। यह रास्ता अब भी देखा जा सकता है। 

किले के आसपास कई जलाशय - राजस्थान में पानी का संकट हमेशा से रहा है। राज परिवार ने पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए आमेर के किले के आसपास कई जलाशयों का निर्माण कराया गया था।
आमेर के किले का भ्रमण करते समय आप हाथी की सवारी का आनंद ले सकते हैं। साथ ही यहां से राजस्थानी कलाकृतियां खरीद कर अपने साथ ले जा सकते हैं। अच्छी तरह अगर किला घूमना चाहते हैं तो कम से कम तीन घंटे का वक्त जरूर निकालें। बस के पैकेज में बस वाले कम से देते हैं।
अगर आप पैकेज बस से आमेर के किले तक पहुंचते हैं तो वहां से किले के प्रवेश द्वार तक पैदल जाना पड़ता है। आप अलग से शेयरिंग जीप से भी जा सकते हैं। इसका किराया बस पैकेज से अलग देना होगा।

खुलने का समय - आमेर का किला सुबह 9.30 से शाम 4.30 तक खुला रहता है। यह भारत सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारकों में है। यहां प्रवेश के लिए टिकट है। कैमरा या वीडियो कैमरा का शुल्क अलग से है।

साउंड एंड लाइट शो - अब यहां शाम को लाइट एंड साउंड शो भी आरंभ हो गया है। सर्दियों में रोज एक शो अंग्रेजी में 6.30 से और हिंदी में 7.30 बजे से होता है। गरमियों में इसका समय 7.30 व 8.30 बजे हो जाता है। अमिताभ बच्चन की आवाज में होने वाला यह शो राजस्थान का इतिहास समझने में काफी सहायक है। 
कैसे पहुंचे - आमेर जयपुर शहर से 15 किलोमीटर दिल्ली रोड पर स्थित है। आप यहां शहर के चांदपोल,  बड़ी चौपड़ या सिटी पैलेस से सिटी बसों द्वारा पहुंच सकते हैं। रात को वापसी के लिए 9 बजे तक बसें मिल जाती हैं। किले के टिकट घर के आसपास छोटा सा बाजार है जहां खाने पीने की वस्तुएं मिल जाती हैं। खरीददारी के लिए कुछ दुकाने भी हैं। किले के आसपास सालों भर सैलानियों की चहल पहल रहती है।

 (AMBER FORT, JAIPUR, RAJSTHAN, WORLD HERITAGE SITE )  


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