Wednesday, October 10, 2012

गोलकुंडा के किले की 600 सीढ़ियों की चढ़ाई

गोलकुंडा के किले से हैदराबाद का नजारा...
आजादी से पहले देश में दो हैदराबाद हुआ करते थे। एक सिंध हैदराबाद ( अब पाकिस्तान में ) दूसरा हैदराबाद डेक्कन ( दक्खन) । हैदराबाद डेक्कन शहर के बाहरी इलाके में चारमीनार से 13 किलोमीटर दूर है गोलकुंडा का किला। आठ किलोमीटर के दायरे में फैले इस किले पर चढ़ाई करना किसी पहाड़ पर चढ़ाई करने से कम नहीं है। गोलकुंडा का किला घूमने के लिए पूरा एक दिन का समय चाहिए। हमने एक दिन का समय निकाला। हमारे साले रवि रंजन, पत्नी माधवी और दो साल के अनादि थे।

किले के शिखर तक पहुंचने के लिए 600 से ज्यादा सीधी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। किला तकरीबन 400 फीट ऊंचा है। इस बीच रास्ते में कई अलग अलग तरह के ऐतिहासिक भवन हैं। किले की सबसे ऊंचे बुर्ज पर चढ़ने के बाद यहां हमेशा ठंडी ठंडी तेज हवाएं चलती रहती हैं। वहां से पूरे हैदराबाद शहर का नजारा ऐसा लगता है मानो ईश्वर ने अपनी कूची से कोई शानदार की पेंटिंग रच डाली हो। किले की इस ऊंचाई से 30 किलोमीटर दूर तक भी नजारा देखा जा सकता है। यानी दुश्मन पर चौकस निगाहें रखने के लिए मुफीद जगह। 

हमने गलत रास्ता चुन लिया - गोलकुंडा के किले पर चढ़ने के लिए दो रास्ते हैं। एक सीढ़ियों वाला तो दूसरा थोड़ा समतल रास्ता है। हालांकि किले की ऊंचाई पर चढ़ने के बाद पता चला कि हमने गलत रास्ता चुन लिया था। चढ़ाई का रास्ता लंबा वाला है जिसमें कम सीढ़ियां हैं। इस चढ़ाई में दो साल के अनादि थक गए तो रवि मामा ने उन्हे अपने कंधे पर बिठा लिया। हमें उतरने के लिए सीढ़ियों वाला रास्ता चुनना चाहिए था। पर अब हमलोग सीढ़ियों वाले रास्ते से पहुंचे तो उतरने के लिए दूसरा रास्ता तय किया। 





गोल्ला कोंडा मतलब चरवाहों की पहाड़ी-  गोलकुंडा का पुराना नामा गोल्ला कोंडा था। इसका मतलब चरवाहों की पहाड़ी। दरअसल किला बनने से पहले इस पहाड़ी पर चरवाहे अपनी पशुधन को लेकर चराने के लिए आते थे। 

काकातीय राजाओं ने बनवाया था किला - किले के साथ कई ऐतिहासिक कथाएं जुड़ी हैं। वारांगल के काकातीय राजाओं ने इसे 1143 ई. में ये किला करीब 390 फीट ऊंचे ग्रेनाइट के चट्टान पर बनवाया था। पर तब यह मिट्टी का किला हुआ करता था।  

सोलहवीं सदी में मुहम्मद शाह और कुतुब शाह के जमाने में इसे विशाल चट्टानों से बनवाया गया। देश के सबसे बड़े और सुरक्षित किलों में से एक गोलकुंडा बहमनी के शासकों के भी अधीन रहा। बहमनी शासकों के दौर में गोलकुंडा की ख्याति तेजी से फैली। 

फतेह दरवाजा से प्रवेश -  किले के अंदर शास्त्रागार, अस्तबल, मंदिर और मसजिद का निर्माण कराया गया है। किले का मुख्य द्वार जहां से लोग प्रवेश करते हैं इसका नाम फतेह दरवाजा है। पूरा किला 11 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ था। 

हीरों की तिजारत का केंद्र - किसी जमाने में गोलकुंडा के इलाके के हीरे के खदानों से ही दुनिया का मशहूर कोहेनूर हीरा निकला था। कुतुबशाही शासन में गोलकुंडा का किला तिजारत का बड़ा केंद्र था। खास तौर पर इस इलाके से निकलने वाले हीरों की खरीददारी के लिए दुनिया भर से व्यापारी यहां आते थे। कोहिनूर के अलावा कई विश्व प्रसिद्ध हीरे इस इलाके के खदानों से ही निकले थे। इनमें दरिया-ए-नूर, होप डायमंड, रीजेंट, निजाम, जैकब जैसे प्रसिद्ध हीरों के नाम हैं दो कभी यहीं से निकाले और तराशे गए थे। 



किले में कैफेटेरिया भी - किले के टॉप पर एक कैफेटेरिया भी बना है। अगर आप घूमते हुए थक जाएं तो यहां थोड़ी से पेट पूजा का भी इंतजाम है। यहां पर आपको खाने के लिए आइसक्रीम और पीने के लिए कोल्ड ड्रिंक भी मिल सकती है। गर्मी के दिनों में गोलकुंडा के किले में घूमना थोड़ा मुश्किल है। बेहतर हो कि आप सर्दी के दिनों में जाएं।

कैसे पहुंचे - गोलकुंडा किले के बगल में ही मूसी नदी बहती है। किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। यह सैलानियों के लिए सुबह से शाम तक खुला रहता है। पर हर सोमवार को किला बंद रहता है। गोलकुंडा का किला हैदराबाद रेलवे स्टेशन से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सिटी बसें भी किले के गेट तक जाती हैं। या फिर आप आटो रिक्शा बुक करके पहुंच सकते हैं। 
-   -  विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com 
( ( GOLKUNDA FORT, HYDRABAD, TELANGANA ) 


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