Tuesday, October 9, 2012

यहां है भारत का सबसे छोटा रेल इंजन - हसंग

भारतीय उप महाद्वीप में चलने वाला सबसे छोटा भाप इंजन हसंग था। यह 1897 में बना था। इसे रेल संग्रहालय में देखा जा सकता है। यह रेल संग्रहालय में एक कोने पर ऊंचाई पर संरक्षित करके रखा गया है।

इस लोकोमोटिव का निर्माण डब्लूजी बांगानाल कंपनी द्वारा ब्रिटेन के स्टाफोर्ड में किया गया था। पहियों के लिहाज से यह 0-4-0 श्रेणी का लोकोमोटिव था। इसका नंबर था ए 885,  इसका इस्तेमाल असम के लीडो कोल माइन्स में किया जाता था। वहां यह माल ढुलाई के लिए प्रयुक्त डिब्बों को खींचने के काम में लाया जा रहा था। बाद मे इसे राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में लाकर संरक्षित किया गया। हालांकि इसे रेल संग्रहालय में भारतीय उप महाद्वीप में इस्तेमाल सबसे छोटे लोकोमोटिव में रूप में बताया गया है। पर यह दुनिया के सबसे छोटे लोकोमोटिव में से एक है।   


रेल म्युजिम - जानकारी के साथ मौज- मस्ती भी।
रोचक है विकास की कहानी - छुक...छुक करती आई रेल....रेलगाड़ी ने डेढ़ सौ साल के इतिहास में भारत में बहुत बड़ा बदलाव देखा है। आज भारतीय रेल का जितना बड़ा नेटवर्क है, उसके विकास की कहानी और भी रोचक है। रेलगाड़ी पर न जाने कितने गीत बने हैं और कितनी कहानियां लिखी गई हैं। पर भारतीय रेल ने रेलवे की इस विकास यात्रा को एक जगह संजोने के लिए नई दिल्ली के चाण्क्यापुरी में नेशनल रेल म्यूजियम बनाया है। करीब दस एकड़ में फैले इस रेल म्यूजियम में आप भारतीय रेल के पूरे इतिहास को अपनी आंखों के समाने देख सकते हैं। सौ साल पुराने इंजन, महाराजाओं के सैलून,  पुरानी पटरियां देख सकते हैं। साथ ही रेलवे जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें और मॉडल भी यहां देख सकते हैं। खास तौर पर बच्चों के लिए रेल म्यूजियम बड़ी रोचक जगह है। बच्चे यहां आकर अपना ज्ञान तो बढ़ाते ही हैं वे खुश भी होते हैं ज्वाय राइड वाली ट्रेन में सफर करके।

 स्टीम लोकोमोटिव आरएमआर एफ 734
रेल म्यूजियम आकर बच्चे आनंदित तो होते ही हैं साथ ही वे अपना ज्ञान भी बढ़ते हैं पर यह बड़े लोगों के लिए कम रोचक जगह नहीं है। 

आज हम राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में  यात्रा करते हैं पर रेलगाड़ियों का यह सुविधायुक्त सफर कैसी कैसी पटरियों से सफर करके यहां पहुंचा है। यह सब कुछ यहां जाने को मिल सकता है। जब देश गुलाम था तो भारत में अगल अलग राजा रजवाडों ने अपनी अपनी रेल कंपनियां शुरू की थीं। इन्होंने अपनी-अपनी रेलगाड़ियां चलाई थीं। इनमें ज्यादातर रेलगाड़ियां नैरो गेज की पटरियों वाली थीं। 
यहां पर आप हैदराबाद निजाम का शाही सैलून देख सकते हैं। उनकी रेलगाड़ी का इंजन भी देख सकते हैं। निजाम देश भर में यात्राएं अपने इसी सैलून में करते थे। नागपुर, जयपुर, भावनगर के राजाओं ने कैसी अपनी रेलगाड़ियां चलवाई, यह सब कुछ आप यहां देख सकते हैं। थोड़ा अतिरिक्त शुल्क देकर आप राजाओं के सैलूनों का अंदर से भी नजारा कर सकते हैं। 

रेल म्यूजियम में आकर आप यह भी जान सकते हैं पहले कभी भारतीय रेल में थर्ड क्लास का भी डिब्बा हुआ करता था। आप म्यूजियम में थर्ड क्लास का डिब्बा भी देख सकते हैं।

1977 में हुई शुरुआत - नई दिल्ली में इस रेल संग्रहालय की शुरूआत एक फरवरी 1977 को हुई। उस समय कमलापति त्रिपाठी रेल मंत्री थे। इसके बाद से रेल संग्रहालय में हर साल नई नई चीजें जुड़ती जा रही हैं। यहां दो तरह की राइड उपलब्ध है। एक जॉय राइड और दूसरी टॉय ट्रेन की राइड। आप दोनों का मजा ले सकते हैं।  रेल संग्रहालय में एक सोवनियर शॉप भी है। यहां से आप टी शर्ट, की चेन और दूसरी स्मृति की वस्तुएं खरीद सकते हैं।   

-  --   विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com
( ( RAIL MUSEUM, DELHI, CHANKYAPURI, STEAM HISTORY) 




No comments:

Post a Comment