Friday, August 3, 2012

उदयगिरी की पहाड़ियां और कलिंगराज खारवेल

धौली और पिप्पली की सैर के बाद हम आ पहुंचे हैं उदयगिरी और खंडगिरी की पहाड़ियों की ओर। यह ओडिशा की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत है। राजधानी भुवनेश्वर से इसकी दूरी सात किलोमीटर है। पर हमलोग शहर में प्रवेश करने से पहले यहां पहुंचे हैं। हमारे बस के चालक ने एक घंटे का समय दे रखा है पैदल जाकर इन गुफाओ को देखकर आने के लिए। हल्की हल्की बारिश शुरू हो गई है। इस बीच हम ऐतिहासिक विरासत के दर्शन के लिए निकल पड़े हैं। उदयगिरी और खंडगिरी की पहाड़ियां आमने सामने है। यह जगह कलिंगराज खारवेल के प्रसिद्ध हाथीगुंफा अभिलेख के लिए जानी जाती है।

हाथीगुंफा अभिलेख - तो पहले चलेंगे उदयगिरी की ओर। इससे पहले थोड़ा जान लें कलिंगराज खारवेल के बारे में। कलिंगराज खारवेल का समय 193 ईसा पूर्व का है। खारवेल कलिंग में राज करने वाले महामेघवाहन वंश में तीसरी पीढ़ी का राजा था। वह इस वंश का सबसे महान और प्रख्यात सम्राट माना जाता है। 
खारवेल के बारे में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी हाथीगुम्फा में चट्टान पर खुदी हुई सत्रह पंक्तियों वाला प्रसिद्ध शिलालेख में मिलती है। हाथीगुम्फा, भुवनेश्वर के निकट उदयगिरि पहाड़ियों में है। इस शिलालेख के अनुसार खारवेल जैन धर्म का अनुयायी था। 

हाथीगुंफा अभिलेख प्राकृत भाषा में है। मौर्य वंश की शक्तियां कम होने के बाद खारवेल का ओडिशा में एक बड़े सम्राज्य के तौर पर उदय हुआ था। इस अभिलेख के अनुसार कलिंग की बहुसंख्यक जनता जैन धर्म को अपना चुकी थी। खारवेल विद्वान राजा था। उसने धर्म , अर्थ, शासन, मुद्रा पद्धति आदि का विशद अध्ययन किया था। वह 24 वर्ष की आयु में कलिंग का राजा बना। उसने खुद को कलिंगाधिपति उपाधि से नावाजा। उसने अपनी विजय यात्रा पर दक्षिण और उत्तर के कई प्रदेशों को जीता। उसने उन प्रदेशों पर हमला किया जो मौर्य शासन के कमजोर पड़ने के बाद एक बार फिर स्वतंत्र हो गए थे। हाथीगुंफा शिलालेख में खारवेल द्वारा पराजित किए गए संघात प्रदेश (तमिल देश ) का उल्लेख मिलता है। 

हाथीगुंफा अभिलेख पहाड़ियों को काटकर गुफा में लिखा गया है। इस गुफा के दोनों तरफ दो विशाल हाथियों की प्रतिमा पत्थरों को काटकर उत्कीर्ण की गई है। इसलिए इसका नाम हाथी गुंफा पड़ गया। उदयगिरी में दो मंजिला रानी गुंफा भी देखने लायक है। इसका इस्तेमाल मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए किया जाता था।


आपको उदय गिरी की पहाड़ियों से खंडगिरी की पहाड़ियों का विहंगम नजारा दिखाई देता है। ठीक इसी तरह खंडगिरी पर चढ़ाई करने जाएंगे तो वहां से उदयगिरी नजर आती हैं। आपको पास समय हो तो दोनों ही पहाड़ियों का भ्रमण करें। इस दौरान आप ईसा पूर्व पहली और दूसरी सदी के ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू होंगे। 

खंडगिरी की जैन गुफाएं - खंडगिरी का शिखर 123 फीट ऊंचा है। यह आसपास के पहाड़ियों में सबसे ऊंचा स्थल है। खंडगिरी की गुफाएं जैन संप्रदाय से संबंधित हैं। इन सारी गुफाओं का निर्माण पहली शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ है। उदयगिरी और खंडगिरी मिलाकर यहां पर कुल 19 गुफाएं हैं। इसमें कुछ गुफाएं अनाम हैं। मतलब इनकी पहचान नहीं की जा सकी है। इन गुफाओं को स्थानीय भाषा में लेना कहते हैं।कहा जाता है कि इनका निर्माण पूर्णिमा की चांदनी रातों में किया गया था। कई सौ सालों से जैन साधु इन गुफाओं की ओर आते रहे हैं। यह देश प्रमुख जैन स्मारक स्थलों में शुमार है। अगर सभी गुफाओं को देखना चाहते हैं तो आपको इसके लिए पूरा एक दिन समय अलग से निकालना चाहिए।

-विद्युत मौर्य  vidyutp@gmail.com
(ODISHA, KHARWEL,UDAIGIRI AND KHAND GIRI HILL)

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