Wednesday, October 23, 2013

चलो राजगीर चलें - थोड़ा इतिहास में झांके


हमलोग श्रमजीवी एक्सप्रेस से दिल्ली से चलकर पटना जा रहे थे। ट्रेन के पटना पहुंचने से पहले अचानक मैंने बताया कि हमारा टिकट राजगीर तक का है।  माधवी बचपन से अनगनित बार राजगीर जा चुकी हैं। इसलिए उन्होंने राजगीर के प्रति अनिच्छा जताई। तो माधवी तो पटना में उतर गई। पर मैं दूसरी बार तो अनादि पहली बार राजगीर के सफर पर निकल पड़े। मैं और अनादि राजगीर के लिए श्रमजीवी एक्स में ही बैठे रहे। पटना से दिल्ली जाने वाली श्रमजीवी राजगीर तक जाती है। पर पटना से आगे इस ट्रेन में मानो रामराज्य आ जाता है। बख्तियारपुर के बाद तो इसके वातानुकूलित कोच में स्कूली छात्र घुसने लगे। ये क्या लड़कियां भीं। एक लड़की सौम्या, जो हमारे बगल में आकर बैठ गई, बोलती हैं यहां टिकट कोई नहीं पूछता। वे छात्र स्कूल या कोचिंग से लौट रहे थे। तो हमलोग दोपहर से पहले राजगीर पहुंच चुके थे।

पांच पहाड़ियों से घिरी हरी भरी घाटी - राजगीर पांच पहाड़ियों से घिरी हरी भरी घाटी है। अपने सौंदर्य बोध, सुरम्य वातावरण और दर्शनीय स्थलों के मामले में देश के किसी भी दूसरे बड़े पर्यटन स्थल को टक्कर देने का माद्दा रखता है राजगीर। नदी, पहाड़, झरने, मंदिर, ऐतिहासिक अवशेष, गुफाएं, रोप वे क्या कुछ नहीं है यहां। हम जब घूमने निकलते हैं तो क्या देखना चाहते हैं, नदी पहाड़ झरने, इतिहास, संस्कृति, आस्था, ज्ञान बढ़ाने या फिर भूख।

वह सब कुछ जो आपके पर्यटन उद्देश्य हो सकता है वह सब राजगीर में है। महाभारत काल, बौद्ध, जैन और सिख मतालंबियों से जुडे स्थल यहां हैं। कई काल खंड में ये धर्म और बौद्धिक सक्रियता का केंद्र रहा है। अलग अलग काल में ये शहर राजगृह, गिरिव्रज, वसुमती, वृहद्रहथपुर आदि नामों से जाना जाता रहा है।

छोटा सा रेलवे स्टेशन है नालंदा - नालंदा जिले का मुख्यालय बिहार शरीफ है। बिहारशरीफ शहर से आगे बढ़ने पर नालंदा रेलवे स्टेशन आता है। जहां आप नालंदा के खंडहर देखने के लिए रुक सकते हैं। इसके आगे खाजा के लिए प्रसिद्ध सिलाव कस्बा उसके बाद राजगीर। राजगीर के आसपास पावापुरी, कुंडलपुर, बड़गांव (सूर्य मंदिर) आदि भी देखने जा सकते हैं।

कैसे पहुंचे - बिहार की राजधानी पटना से महज से महज दो घंटे का रास्ता ( 80 किलोमीटर)। आप पटना से सुबह राजगीर जाकर दिन भर में घूम कर शाम को लौट भी सकते हैं। सुबह श्रमजीवी एक्सप्रेस और इंटरसिटी एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें में भी जाती है। वैसे पटना से बस से भी बिहारशरीफ तक जाया जा सकता है। 

बिहार पर्यटन राजगीर के लिए पैकेज टूर भी चलाता है। लेकिन राजगीर जाएं तो वहां एक दो दिन रुके इतिहास में झांके प्राकृतिक सौन्दर्य का मजा लें। पर्यटन के नक्शे पर सालों से उपेक्षित राजगीर अब रेल से जुड़ गया है। न सिर्फ पटना से बल्कि अब गया की ओर हिसुआ होते हुए भी राजगीर पहुंचा जा सकता है।


कहां ठहरें - राजगीर में रहने लिए अच्छे और सस्ते होटल और धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। तो यहां महंगे पांच सितारा होटल भी उपलब्ध हैं। आप राजगीर के चप्पे चप्पे में घूमना चाहते हैं तो यहां एक हफ्ते रहने का कार्यक्रम बना कर आएं। 

राजगीर महोत्सव और मलमास का मेला - 
हर चौथे साल मलमास ( अधिकमास) वाले साल में राजगीर में एक महीने तक चलने वाला मलमास मेला लगता है। इस समय राजगीर में खूब रौनकर रहती है। वहीं बिहार सरकार पर्यटन के विकास के लिए हर साल चार दिनों तक चलने वाले राजगीर महोत्सव का भी आयोजन करती है। इस महोत्सव में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार प्रस्तुति देते हैं।     
 -----विद्युत प्रकाश मौर्य vidyutp@gmail.com
(BIHAR, RAJGIR, NALANDA, FIVE HILLS, MALMAS MELA )

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