Tuesday, April 12, 2016

कोलकाता का अलीपुर जू- देश का सबसे पुराना चिड़ियाघर


कोलकाता में छह दिन गुजारने के दौरान हमलोग बड़े आरामतलब मूड में रोज घूम रहे थे। एक दिन कालीघाट, दक्षिणेश्वर और बेलुर तो एक दिन न्यू मार्केट के आसपास का इलाका। यहां पर हमने पहली बार स्वचलित सीढ़ियां देखी।एक दिन हमलोग कोलकाता के चिड़ियाघर जा पहुंचे। यह देश का सबसे पुराना चिडियाघर है। भले ही यह क्षेत्रफल में पटना या चेन्नई जितना विशाल न हो पर इसका अपना अलग महत्व है। यह चिड़ियाघर कुल 46 एकड़ में फैला हुआ है। लिहाजा आप पूरा इलाका पैदल पैदल आराम से घूम सकते हैं।

इस चिडियाघर में आप जंतुओं और वनस्पतियों का अनूठा संग्रह देख सकते हैं। बहुत समय तक यह चिड़ियाघर विशाल कछुए अद्वैत के कारण जाना जाता था। उसका निधन 250 वर्ष की आयु में 2006 में हो गया। इस चिड़िया घर में 1000 से ज्यादा जीव जंतु देखे जा सकते हैं। कोलकाता में मानूसन के दिनों में यहां घूमने का अपना अलग आनंद है। यहां पर हमने एक विशाल पेड़ भी देखा। इस पेड़ के मूल तने को काट दिया गया है। अब यह पेड़ अपने सहायक टहनियों के सहारे ही खड़ा है। मेरे पिताजी ने कृषि विज्ञान की पढ़ाई की है तो वे जू में हमारे गाइड बन गए थे।

किसी समय में यहां पर विदेशी परिंदे भी आया करते थे। पर अब इनकी आमद कम हो गई है। चिड़ियाघर में शेर और शेरनी, बाघ, भालू, हिरण जैसे कई जानवरों को देखा जा सकता है। यहां पर आप कई तरह के वनस्पतियों से भी रूबरु हो सकते हैं। छात्रों और बच्चों के लिए यह ज्ञानवर्धक जगह है। पर कोलकाता के लोग यहां मनोरंजन के लिए भी पहुंचते हैं।

बदलते वक्त के साथ इस चिड़ियाघर का आकर्षण कम नहीं हुआ है। यहां पर आप कई तरह के सांप भी देख सकते हैं। हां आप यहां एनाकोंडा भी देख सकते हैं। कम जगह में यह बड़ा ही व्यस्थित चिडियाघर है। कोलकाता आने वाले सैलानी इस अलीपुर जू जरूर पहुंचते हैं।

अलीपुर जू की स्थापना सन 1800 में तत्कालीन गवर्नर जनरल रिचार्ड वेलेजली द्वारा निजी उद्यान के तौर पर की गई थी। इसकी स्थापना में फ्रांसिस बुकानन की प्रमुख भूमिका थी। वे इस पेशे से सर्जन थे और इस जू के मेडिकल सुपरिटेंडेंट थे। तब यह इंडियन नेचुरल हिस्ट्री प्रोजेक्ट का हिस्सा था। बाद में ब्रिटिश शासकों ने इसे बड़ा रुप देने की सोची। सन 1876 में एक जनवरी को प्रिंस आफ वेल्स एडवर्ड प्रिंस ने अलीपुर जू का उदघाटन किया। तब इसके लिए तमाम जीव जंतु लोगों ने उपहार में दिए थे। उपहार देने वालों में मैसूर के राजा कृष्ण राज वाडियार चतुर्थ भी शामिल थे। मैमन सिंह ( अब बांग्लादेश ) के राजा सूर्यकांत आचार्य ने भी इस जू के लिए दान दिया।

खुलने का समय- अलीपुर जू सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक खुला रहता है। यह गुरुवार को बंद रहता है। आजकल इसका प्रवेश शुल्क 25 रुपये है। कैमरे के लिए कोई शुल्क नहीं है।

कैसे पहुंचे – अलीपुर जू कोलकाता के अलीपुर इलाके में ही स्थित है। पास का इलाका खिदिरपुर है। कोलकाता मेट्रो के नेताजी भवन मेट्रो से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। कोलकाता के किसी भी हिस्से से लोकल बसों से भी यहां तक पहुंचा जा सकता है। ज्यादा जानकारी के लिए कोलकाता चिड़ियाघर की वेबसाइट देखें।
-        विद्युत प्रकाश मौर्य- vidyutp@gmail.com
-        ( ALIPUR ZOO, KOLKATA )

No comments:

Post a Comment