Friday, July 13, 2012

काशी से उत्तर काशी - भूकंप राहत शिविर में (1)

ऋषिकेश में गंगा जी का विस्तार ( साल 2019 ) 

साल 1991 में सर्दियों के ठीक पहले उत्तराखंड के उत्तर काशी क्षेत्र में बड़ा भूकंप आया जिसमें जान माल का बड़ा नुकसान हुआ। देश भर मदद के हाथ उठने लगे। तब उत्तराखंड राज्य नहीं बना था ये क्षेत्र उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा था। राष्ट्रीय युवा योजना के निदेशक एसएन सुब्बराव जी का खत आया कि हम उत्तरकाशी जिले में और टिहरी जिले में भूकंप पीड़ित लोगों के बीच एक राहत शिविर लगाएंगे। मैं तब बीएचयू में स्नातक का द्वितीय वर्ष का छात्र था। इससे पहले मैं अलीगढ़ शिविर में शिरकत कर चुका था। हालांकि दिसंबर में पहाड़ की ओर जाना मुश्किल कार्य था। पर कुछ दोस्तों का साथ मिला तो हमने भी तय किया कि इस राहत शिविर में हाथ बंटाने हम भी जाएंगे।

बस हमने बोरिया बिस्तर बांधा अपने कुछ दोस्तों के साथ चल पड़े हो गए दस दिन के इस शिविर में हिस्सा लेने के लिए। शिविर में जाने से पहले हमने घर घर घूम कर थोड़ी राहत सामग्री भी जुटाई। हमारे साथ थे हमारे बीएचयू के एएनडी हॉस्टल के साथी राजीव कुमार सिंह और मनोज कुमार बोस, महेंद्रवी हॉस्टल के विपिनचंद्र चतुर्वेदी,  मुगलसराय के चंद्रभूषण मिश्र कौशिक और संजय पाठक।


वाराणसी से हरिद्वार का सफर रेल से 

हमलोग वाराणसी देहरादून एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में 30 नवंबर की सुबह सवार हुए। रेल का 50 फीसदी का रियायती टिकट हमें मिल गया था। वाराणसी से अलीगढ़ के बाद ये मेरा दूसरा लंबा रेल सफर था।

एक दिसंबर 1991 की सर्द सुबह में हम हरिद्वार स्टेशन पर उतरे। पता चला कि थोड़ी देर में ही यहां से दूसरी पैसेंजर ट्रेन से ऋषिकेश जाएगी। हमलोग इसी में सवार होकर ऋषिकेश के लिए चल पड़े। हरिद्वार से चली पैसेंजर ट्रेन तुरंत ही एक सुरंग में घुस गई। बाहर आई तो थोड़ी देर बाद रेल राजाजी नेशनल पार्क के से गुजर रही थी। हम मोतीचूर के जंगलों से गुजर कर अपनी मंजिल पर पहुंचे। 

हरिद्वार से ऋषिकेश की दूरी 23 किलोमीटर है। मोतीचूर के बाद राईवाला जंक्शन आता है। यहां से देहरादून के लिए रेलवे लाइन अलग हो जाती है। ऋषिकेश इस मार्ग पर आखिरी रेलवे स्टेशन है। हमारा बेस कैंप था ऋषिकेश में। 

ऋषिकेश के शिवानंद आश्रम में देश भर से आए स्वयंसेवक जुटने लगे थे। पंजाब से लेकर दक्षिण भारत तक के लोग पहुंचे थे। यहीं पर मेरी पहली मुलाकात पटना के सुनील कुमार सेवक से हुई। हमारा रात्रि विश्राम शिवानंद आश्रम में था। इस आश्रम में बड़ी संख्या में विदेशी भी दिखाई दिए। वे यहां योगासन,  प्राणयाम सीखने और आध्यात्मिक शांति की तलाश में आए हैं। 
ऋषिकेश में गंगा दर्शन - एक दिन के प्रवास दौरान हमें ऋषिकेश को देखने और महसूस करने का पूरा मौका मिला। हमने सुबह गंगा का मनोरम तट देखा। वाराणसी की तुलना में यहां का पानी कितना साफ है। यहां गंगा में गहराई भी ज्यादा नहीं है। पर पानी में वेग बहुत है। प्रातः काल में काफी देर तक गंगा दर्शन के बाद हमलोग आश्रम वापस आए।
सुहानी यादें - ऋषिकेश में सुबह सुबह मां गंगा की गोद में । ( संजय, बिपिन, मनोज बोस, विद्युत, राजीव, चंद्रभूषण मिश्र ) 

उत्तर काशी क्षेत्र में 19 अक्टूबर 1991 में जो भूकंप आया था उसमें कुल 768 लोगों की मुत्यु हो गई थी। ये भूकंप 6.8 तीव्रता का था।)  

( आगे पढ़े - ःऋषिकेश से टिहरी की ओर..... ) 

-    विद्युत प्रकाश मौर्य – vidyutp@gmail.com

( HARIDWAR, RISHIKESH, TEHRI, UTTRAKHAND, NYP, EARTHQUAKE RELIEF CAMP 1991 ) 

No comments:

Post a Comment