Thursday, July 19, 2012

वाराणसी से चेन्नई : गंगा कावेरी एक्सप्रेस से


देश के अलग अलग राज्यों को नदियां जोड़ती हैं या फिर रेलगाड़ियां। ट्रेन का नाम है गंगा कावेरी एक्सप्रेस। गंगा उत्तर भारत में बहती हैं तो कावेरी दक्षिण भारत में। इन दोनों को जोड़ देती है गंगा कावेरी एक्सप्रेस। साल 1992 में इस ट्रेन में शुरू से अंत तक यात्रा करने का मौका मिला। तब इस ट्रेन का नंबर हुआ करता था 2670 डाउन में तो 2669 नंबर था अप में। गंगा कावेरी के साथ यह तब तक की हमारी सबसे लंबी रेल यात्रा थी।


गंगा कावेरी एक्सप्रेस वाराणसी से चेन्नई जाती है। तब चेन्नई का नाम मद्रास हुआ करता था। आजकल इस ट्रेन का विस्तार छपरा से चेन्नई हो गया है। पर तब यह ट्रेन वाराणसी से शाम को पांच बजे के आसपास चलती थी। तीसरे दिन करीब 42 घंटे के सफर के बाद चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर उतार देती थी। ट्रेन हफ्ते में दो दिन चला करती करती थी। हमलोग आठ जनवरी 1992 को इस ट्रेन में सवार हुए। दिन था बुधवार। हमारे साथ सहयात्री थे - दिग्विजय नाथ सिंह, राजीव कुमार सिंह, अमिताभ सिंह, जॉन राजेश्वर कुजुर, संदीप कुमारठाकुर आदित्येंद्र प्रताप सिंह। हम सब लोग जा रहे हैं बेंगलुरु आध्यात्मिक युवा शिविर में हिस्सा लेने।


पर इससे पहले आरक्षण कराने की पूर्व कथा। आजकल की तरह तब ट्रेन में ऑनलाइन या अग्रिम आरक्षण कंप्यूटराइज्ड नहीं हुआ करता था। हमारे सिनियर साथी आनंद वर्धन जी ने बताया कि गंगा कावेरी में आरक्षण के लिए वाराणसी सिटी स्टेशन चले जाना। उस स्टेशन का अलग से कोटा है। हालांकि ट्रेन वाराणसी कैंट स्टेशन से बनकर चलती थी। तो मैं बीएचयू से 12 किलोमीटर साइकिल चलाता हुआ वाराणसी सिटी पहुंचा। दो आरक्षण कराए। एक में छह साथियों का दूसरे पत्र से दो साथियों का। हमें राष्ट्रीय युवा शिविर के लिए 50 फीसदी का डिस्काउंट मिलता था। इसके लिए पत्र को पहले डीआरएम ऑफिस जाकर एप्रूव कराना पड़ता था। यानी टिकट बनवाने के लिए दो चक्कर पहला डीआरएम ऑफिस काफिर रेलवे स्टेशन का। खैर वाराणसी सिटी स्टेशन पर आरक्षण आसानी से मिल गया। आरक्षण काउंटर पर तब बोर्ड लगे होते थेजिसमें छोटे छोटे लालहरे बॉल से आने वाले तारीखों में उपलब्धता के बारे में जानकारी दी जाती थी। उन दिनों को याद करके लगता है कि अब आरक्षण प्रक्रिया कितनी आसान हो गई है। ये अलग बात है कि आज भी इसमें धांधली की खबरें आती हैं।
उस दिन यानी 8 जनवरी को ही आचार्य नरेंद्र देव हॉस्टल में चुनाव था। भाई दिग्विजय महामंत्री का चुनाव जीत गए थे। हमलोग चुनावी गहमागहमी से निकल कर शाम को लंबी यात्रा पर गंगा कावेरी एक्सप्रेस में सवार हो गए हैं। ट्रेन वाराणसी से चलने के बाद मुगलसराय होती हुई चुनार मिर्जापुर नैनी के बाद मध्य प्रदेश में प्रवेश कर गई। अचानक दिग्विजय भाई पूछते हैं कितने घंटे ट्रेन में रहना है। हमने बताया लगभग 40 घंटे। अरे वाह इतनी लंबी यात्रा। हां मैंने कहा, मेरी भी सबसे लंबी रेल यात्रा है। तो हम सब लोग इस यात्रा को लेकर रोमांचित थे। पर रात हो गई तो सब अपनी अपनी बर्थ पर सो गए।

सघन वन से गुजरते हुए - अगले दिन सुबह नींद खुली तो ट्रेन मध्य प्रदेश में वन क्षेत्र से गुजर रही थी। सतना, कटनी के बाद जबलपुर जैसे स्टेशन गुजर चुके थे। हमने इटारसी में दिन का भोजन लिया। मुझे लगता है सबसे सस्ता खाना इटारसी स्टेशन पर मिला। एक रोटी 30 पैसे में। मतलब डेढ़ रुपये में पांच रोटियां। दिन में ट्रेन के ठहराव काफी देर से आ रहेे हैं। हमारे कुछ साथ बोर हो रहे हैं। इस यात्रा में। अमिताभ सिंह कहते हैं चलो पूरी ट्रेन घूम कर आते हैं। तो हम लोग ट्रेन के स्लीपर क्लास से सारे डिब्बों में घूमने निकल पड़े। फिर वापस अपने बर्थ पर। नागपुर से पहले दोनों तरफ घने जंगल नजर आ रहे हैं। इन्ही जंगलों के बीच बेतुल रेलवे स्टेशन आया। मुझे राबर्ट फ्रेस्ट की कविता याद आ रही है...
The Woods are lovely
Dark and deep. 
But I have promise to keep
I have miles to go
before I sleep... 

शाम ढलने के साथ ट्रेन मध्य प्रदेश छोड़ महाराष्ट्र में प्रवेश कर गई है। हमने संतरों का स्वाद लिया नागपुर में। बड़ा नाम सुना था इनका। नागपुर से कुछ घंटों बाद हमारी ट्रेन आंध्र प्रदेश में प्रवेश कर गई और शुरू हो गया दक्षिण भारत। हम पहली बार दक्षिण जा रहे हैं। पर आंध्र के ज्यादातर स्टेशन रात में गुजर गए। अगली सुबह हुई तो ट्रेन मद्रास के काफी करीब थी। हम जल्द ही चेन्नई सेंट्रल पहुंचने वाले हैं। सुबह 10 बजे आसपास हमलोग चेन्नई (तब मद्रास) में उतरे। चेन्नई रेलवे स्टेशन की इमारत काफी विशाल है। लाल रंग की यह इमारत ब्रिटिशकालीन वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है। तो वणक्कम चेन्नई। पर सफर तो अभी जारी है। हमें बेंगलुरु जाने वाली अगली ट्रेन का इंतजार है।



यात्रा मार्ग - वाराणसीमुगलसरायसतनाकटनीजबलपुरपिपरियाइटारसीबेतुलपांडुरनानागपुरसेवाग्रामचंद्रपुरबल्लारशाहसिरपुर कागज नगरवारंगलखम्ममविजयवाड़ाओंगुलगुडुरचेन्नई।
- विद्युत प्रकाश मौर्य - vidyutp@gmail.com 

(GANGA KAVERI EXPRESS, VARANASI, MADRAS, CHENNAI )


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