Monday, July 30, 2012

नीलांचल यानी पुरी का सुरम्य समुद्र तट

पुरी में समंदर से ये हमारी पहली मुलाकात थी। कहते हैं मनुष्य को अकेलेपन का वक्त काटना हो तो समंदर से बढ़िया कोई साथी नहीं हो सकता। वह भी अगर ओडिशा के पुरी का समुद्र तट हो तो बात ही क्या। पुरी का समुद्र तट यानी नीलांचल। इस समुद्र तट की बात बाकी समुद्र तटों से काफी अलग है। पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से दो किलोमीटर आगे है पुरी का विशाल और लंबा समुद्र तट। 

हिन्दुस्तान में वैसे तो मुंबईगुजरात, कर्नाटक, केरल,  चेन्नईकन्याकुमारी जैसे तमाम जगहों समुद्र तट देखा जा सकता है। किसी को कोई भी समुद्र तट सुंदर लग सकता है लेकिन पुरी के नीलांचल की बात कुछ अलग है। नीलांचल का मतलब ही पुरी है। तभी तो दिल्ली से पुरी जाने वाली ट्रेन का नाम ही नीलांचल एक्सप्रेस रखा गया है।

यहां बैठकर जब आप समुद्र को निहारते हैं तो आसमान के फलक और समुद्र के मिलन के बीच एक खास तरह का सानिध्य का एहसास नजर आता है। नीले रंग के इस समुद्र को आप घंटों निहारते रहें लेकिन आप को अकेलापन नहीं खलेगा। समंदर का संगीत जो रहता है साथ में।
पुरी होटल के बाहर 1991 
पुरी के समुद्र तट किनारे कई किलोमीटर में फैले होटल हैं। एक श्रंखला में सौ से ज्यादा होटल। अगर आप सी बीच पर किसी होटल में ठहरते हैं तो होटल के कमरे से भी समंदर की अटखेलियों का आनंद उठा सकते हैं। साथ ही आप समंदर के तट के साथ टहलते हुए कई किलोमीटर तक आगे बढ़ते जा सकते हैं। जब थक जाएं तो अपने होटल को वापस लौट आएं।

आप समंदर में नहाने का खूब मजा ले सकते हैं। लेकिन आपको पता ही होगा कि समंदर में नहाने के बाद फिर से आकर होटल के कमरे में साफ पानी में नहाना पड़ता है।
भगवान जगन्नाथ के शहर पुरी में छुट्टियां मनाना बाकी शहरों से सस्ता है। बस रथयात्रा का एक महीना ( जून जुलाई ) यहां का पीक सीजन होता है। साल के बाकी महीनों में यहां आना बेहतर है अगर आप समंदर की लहरों के साथ खेलना का पूरा आनंद उठाना चाहते हैं तो।

अगर आप पुरी जाएं तो समुद्र तट पर पुरी होटल में ठहरने का विकल्प चुन सकते हैं। यह एक मध्यवर्गीय सुविधाजनक होटल है। पुरी रेलवे स्टेशन से पुरी होटल के लिए होटल की ओर से फ्री बस सेवा भी उपलब्ध रहती है। पुरी होटल की खिड़की से आप देर रात तक समुद्र की लहरों का नजारा कर सकते हैं।



वैसे पुरी में समुद्र तट के किनारे पंक्ति में 100 से ज्यादा होटल हैं। पुरी होटल की अपनी विरासत और आतिथ्य की परंपरा है। देश आजाद होने वाले साल में ही 1947 में ये होटल तीन कमरोें के साथ शुरू हुआ था।  

पुरी सालों भर सैलानियों से गुलजार रहता है। वैसे यहां जाने के लिए सर्दी का मौसम ज्यादा अच्छा है। तब समंदर के किनारे टहलने का आनंद बढ़ जाता है। अगर आप पुरी जाएं तो समंदर के किनारे ही किसी होटल में रुकें तो ज्यादा आनंद आएगा। पुरी में समंदर के किनारे होटलों की लंबी फेहरिस्त है। सभी होटल समंदर के सामने खुलते हैं। यहां पर आप आनंद के कुछ दिन बड़े मजे से गुजार सकते हैं। कई सैलानियों को तो पुरी इतना पसंद आता है कि वे हर साल वहां जाने का कार्यक्रम बनाते हैं।

-  -   विद्युत प्रकाश मौर्य Email -vidyutp@gmail.com
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